ओमकार हॉस्पिटल पर ईलाज के नाम पर वसूली, मरीज को बंधक बनाकर डराने-धमकाने की शिकायत
इधर स्वास्थ्य मंत्री राज्योत्सव में भाषण देते रहे ,उधर जिला अस्पताल से मरीजों कों नीजी अस्पताल में भेजनें का शर्मनाक खेल चलता रहा
बलौदाबाजार:-
जिले के चर्चित ओमकार हॉस्पिटल एक बार फिर विवादों में है। इलाज के नाम पर गरीब मरीजों से जबरन रुपए वसूलने, डराने-धमकाने और यहां तक कि मरीज को बंधक बनाने जैसे गंभीर आरोप सामने आए हैं। यह ताजा मामला जिला बिलासपुर के ग्राम बसंतपुर निवासी गोरेलाल पटेल द्वारा जिला कलेक्टर बलौदाबाजार भाटापारा को दिए गए लिखित आवेदन के माध्यम से उजागर हुआ है। आवेदक गोरेलाल पटेल ने बताया कि उसका पुत्र शम्भू पटेल दिनांक 2 नवम्बर (रविवार) की रात लगभग 8 से 9 बजे के बीच पनगाँव बायपास के पास सड़क दुर्घटना का शिकार हो गया। घटना की जानकारी मिलते ही परिजन घायल को तत्काल जिला अस्पताल बलौदाबाजार लेकर पहुँचे। वहां प्राथमिक उपचार के बाद कर्मचारियों ने यह कहकर मरीज को बाहर ले जाने की सलाह दी कि डॉक्टर उपलब्ध नहीं हैं। इसी दौरान अस्पताल परिसर में खड़ी एक निजी एम्बुलेंस के चालक ने उन्हें ओमकार हॉस्पिटल ले जाने की सलाह दी और कहा कि वहाँ आयुष्मान कार्ड से बेहतर इलाज होता है। मजबूरी में परिजन उसी एम्बुलेंस से घायल को ओमकार हॉस्पिटल ले गए।
आवेदक के अनुसार, हॉस्पिटल में डॉक्टरों ने एक्सरे आदि किया और रातभर मरीज को भर्ती रखा। अगले दिन सुबह बताया गया कि जबड़ा टूट गया है और ऑपरेशन करना पड़ेगा, जिसकी लागत डेढ़ से दो लाख रुपए बताई गई। गरीब परिवार होने के कारण जब उन्होंने ऑपरेशन से इंकार करते हुए डिस्चार्ज मांगा, तो डॉक्टरों ने बेहद अभद्र और अमानवीय व्यवहार किया। पीड़ित के लिखित शिकायत आवेदन के अनुसार डॉक्टर ने कथित रूप से कहा कि ये होटल का भजिया नहीं है कि तुम बोलोगे और हो जाएगा। तुम लोग अपनी मर्जी से आए हो, जाओगे हमारी मर्जी से।
इतना ही नहीं, अस्पताल प्रशासन ने परिजनों से कई जगह कागजों पर जबरन हस्ताक्षर करवा लिए और बाद में बाउंसरों के जरिए मरीज के परिजनों को बाहर निकाल दिया। घायल शम्भू पटेल को ऑक्सीजन और पाइप लगाकर कमरे में बंद कर दिया गया। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन अब 80 हजार की मांग कर रहा है और पैसे दिए बिना मरीज को छोड़ने से साफ इनकार कर दिया है। विश्वसनीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, ओमकार हॉस्पिटल के खिलाफ इससे पहले भी शिकायतें सामने आ चुकी हैं। प्रशासन ने तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की थी, लेकिन अब तक उस जांच का कोई ठोस परिणाम सार्वजनिक नहीं हुआ है। इससे यह स्पष्ट होता है कि निजी अस्पतालों की मनमानी और गरीबों के शोषण पर नियंत्रण की स्थिति संतोषजनक नहीं है। मामले की शिकायत सामने आने के बाद जिला कलेक्टर बलौदाबाजार भाटापारा ने मामले को गंभीरता से लिया है। कलेक्टर ने तत्काल जांच के आदेश जारी करते हुए स्वास्थ्य विभाग और पुलिस प्रशासन को कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, संबंधित विभागों की संयुक्त टीम जांच में जुट गई है।
जिला अस्पताल व एम्बुलेंस नेटवर्क पर भी उठे सवाल
इस प्रकरण ने जिला अस्पताल की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। मरीजों को डॉक्टर नहीं है कहकर बाहर भेज देना और फिर अस्पताल परिसर से ही निजी एम्बुलेंस द्वारा महंगे निजी अस्पतालों में भेजना, संभावित मिलीभगत का संकेत देता है। आवेदक ने अपने पत्र में इसे सुनियोजित नेटवर्क बताया है, जो गरीब व असहाय मरीजों को फंसाने का काम करता है।
यह घटना स्वास्थ्य सेवा व्यवस्था की जमीनी हकीकत को उजागर करती है। जब सरकारी अस्पतालों में इलाज उपलब्ध नहीं होता और निजी अस्पताल इसे अवसर बनाकर गरीबों का आर्थिक व मानसिक शोषण करते हैं, तो यह केवल एक परिवार का नहीं बल्कि पूरे समाज का दर्द बन जाता है। कलेक्टर की जांच टीम की रिपोर्ट का इंतजार अब जिलेभर में किया जा रहा है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि ओमकार हॉस्पिटल के ऊपर लगे इस आरोप के पीछे कितनी सच्चाई है और कितनी गहराई तक यह नेटवर्क फैला हुआ है।