रेलवे की जमीन या निजी संपत्ति? चांपा में कब्जे को लेकर मचा बवाल सहिस मोहल्ला बना विवाद का केंद्र, रेलवे नोटिस से मचा हड़कंप
जांजगीर चांपा:-
जांजगीर-चांपा जिला के चांपा नगर के भोजपुर स्थित सहिस मोहल्ला में रेलवे भूमि पर अवैध कब्जे का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। मोहल्ले के रहवासी जहां रजनी भगत पर रेलवे की भूमि पर अवैध निर्माण और कब्ज़ा करने का आरोप लगा रहे हैं, वहीं रजनी भगत ने सभी आरोपों को निराधार बताते हुए रेलवे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर ही सवाल उठा दिए हैं। मोहल्लेवासियों ने रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों को भेजी गई शिकायत में उल्लेख किया है कि जिस स्थान पर कब्जा किया जा रहा है, वहां वर्षों से सांस्कृतिक कार्यक्रम, दुर्गा पूजा और बच्चों के खेलकूद जैसी सामाजिक गतिविधियाँ आयोजित की जाती रही हैं। ऐसे में उस स्थल पर कब्जा किया जाना पूरे मोहल्ले के लिए चिंता का विषय है। शिकायतकर्ताओं ने यह भी बताया कि रजनी भगत द्वारा इससे पूर्व भी उक्त स्थान पर कब्जा करने की कोशिश की गई थी, जिसे रेलवे प्रशासन ने कार्रवाई कर हटाया था। बावजूद इसके, दोबारा कब्जे की नियत स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है।


रेलवे प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए नोटिस जारी किया है। 18 अक्टूबर को रेलवे ने शबीना भगत को नोटिस भेजते हुए सात दिनों के भीतर रेलवे भूमि खाली करने के निर्देश दिए हैं। नोटिस में स्पष्ट कहा गया है कि निर्धारित समय सीमा में अतिक्रमण नहीं हटाए जाने पर रेलवे प्रशासन बलपूर्वक कार्रवाई करेगा और इसके दौरान हुए किसी भी नुकसान की जिम्मेदारी कब्जाधारी की होगी।
क्या कहते हैं जमीन के हकदार जानते हैं उन्हें की जुबानी
भूमि स्वामी सबीना भगत ने कहा कि अपने ही जमीन पर कब्जा करना पढ़ रहा है भारी वैध दस्तावेज के बावजूद भी प्रशासन नोटिस देकर हमारी छवि को धूमिल कर रहे हैं और साथ ही साथ परेशान भी कर रहे हैं , जमीन मालिक ने आगे हमारे संवाददाता से बात की जिसमें कहा कि मेरे दुवारा किसी भी जमीन पर अवैध रूप से कब्जा नहीं किया है, खरीदी बिक्री के माध्यम से यह जमीन खरीदी किया गया है जिसका वैध दस्तावेज मेरे पास मौजूद है, लेकिन कुछ रसूखदार और क्षेत्रीय लोगों के दबाव के कारण रेलवे के द्वारा इस प्रकार का नोटिस भेजा गया है जो अनुचित है ,मेरे पास जमीन का वैध दस्तावेज b1 नक्शा खसरा साथ ही साथ जमीन की पर्ची भी है जिसे शासन प्रशासन के दुवारा जारी किया गया है जिसे अनदेखा करते हुए दबाव पूर्व नोटिस भेजा गया है जो की अनुचित है, बता दे चंपा क्षेत्र में कई ऐसे बड़े रसूखदार है जिन पर कोई कार्यवाही नहीं हुई है ,और मुझे महिला समझकर इस प्रकार की प्रशासनिक दबाव बनाया जा रहा है जो की अनुचित है सरकार को चाहिए कि संपूर्ण रूप से जांच पड़ताल करने के बाद कार्यवाही करें।
हालांकि, रजनी भगत का कहना है कि उन्होंने किसी भी रेलवे भूमि पर कब्जा नहीं किया है और न ही वहां उनकी कोई संपत्ति है। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना सत्यापन किए रेलवे अधिकारियों ने उन्हें अनुचित रूप से नोटिस भेजा है, जो प्रशासनिक लापरवाही का परिचायक है।

दूसरी ओर, शबीना भगत ने स्वयं को उक्त भूमि की वैध स्वामिनी बताते हुए रेलवे मंडल प्रबंधक बिलासपुर को एक विस्तृत आवेदन दिया है। अपने आवेदन में उन्होंने कहा है कि उनके द्वारा रेलवे के निकट की 28.25 डिसमिल भूमि उसके भूमिस्वामी से वैध रूप से खरीदी गयी है जहाँ पर निर्माण सामग्री रखी गई थी, जिसे कुछ स्थानीय रसूखदारों और कथित रेलवे कर्मचारियों ने मिलकर क्षति पहुंचाई। उन्होंने लगभग 7 लाख की निर्माण सामग्री के नुकसान का दावा करते हुए इसकी भरपाई की मांग की है। शबीना ने यह भी आरोप लगाया है कि क्षेत्र में पहले से कई लोग रेलवे भूमि पर मकान, दुकान और होटल बनाकर बैठे हैं, मगर उनके विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं की जा रही। वहीं, एक आदिवासी महिला होने के नाते उन्हें लगातार धमकियां दी जा रही हैं, जो उनके मौलिक अधिकारों का हनन है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि न्याय नहीं मिला तो वे न्यायालय की शरण लेंगी।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि इस पूरे प्रकरण में सच्चाई सामने लाने के लिए रेलवे प्रशासन को निष्पक्ष जांच करनी चाहिए। बिना तथ्यों की पुष्टि किए किसी पर कार्रवाई करना न केवल प्रशासनिक असंतुलन पैदा करता है, बल्कि निर्दोष व्यक्ति के अधिकारों का भी उल्लंघन है। अब देखना यह होगा कि रेलवे प्रशासन निष्पक्ष जांच कर सच्चाई को उजागर करता है या फिर यह विवाद भी अन्य अतिक्रमण मामलों की तरह फाइलों में ही दफन हो जाएगा।