राजधानी

बलौदाबाजार के गैस वितरकों ने पेट्रोलियम मंत्रालय के नाम कलेक्टर कों सौंपा ज्ञापन सेवा शुल्क में वृद्धि नहीं तो एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स करेंगे अनिश्चितकालीन आंदोलन

गोविन्द राम ब्यूरो चीफ बलौदाबाजार:-

जिले के सभी गैस एजेंसी संचालकों ने पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय, भारत सरकार के नाम जिला कलेक्टर बलौदाबाजार के माध्यम से ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स ने सरकार से डिलीवरी प्रभार एवं प्रशासकीय शुल्क में 75 रूपये की वृद्धि की तत्काल मांग करते हुए चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया, तो देशभर के वितरक अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने को बाध्य होंगे। एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन द्वारा 19 अप्रैल 2025 को आयोजित राष्ट्रीय अधिवेशन में पारित प्रस्ताव के अनुसार, वितरकों ने बताया कि वर्ष 2019 तक हर वर्ष नियमित रूप से डिलीवरी चार्ज और एडमिनिस्ट्रेटिव चार्ज बढ़ाए जाते थे, किन्तु कोविड-19 के बाद से इस पर कोई समुचित निर्णय नहीं लिया गया है। 2022 में जो थोड़ी बहुत वृद्धि हुई, वह महंगाई की दर और लागत मूल्य के अनुपात में बेहद नगण्य थी। ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि जहां एक ओर सरकारी अधिकारी एवं तेल कंपनियों के कर्मचारी हर साल महंगाई भत्ता का लाभ ले रहे हैं, वहीं एलपीजी वितरकों के शुल्क में दो वर्षों से कोई वृद्धि नहीं की गई है। इससे वितरकों का जीवन-यापन संकट में पड़ गया है और उनके कर्मचारियों को वेतन देना तक मुश्किल हो गया है।

एलपीजी वितरक संघ के राष्ट्रीय पदाधिकारियों ने 17 अक्टूबर को ज़ूम मीटिंग के माध्यम से आंदोलन का निर्णय लिया, जिसके तहत वितरकों ने चरणबद्ध आंदोलन की रूपरेखा तय की है जिसमें 24 अक्टूबर 2025 से सभी वितरक और उनके कर्मचारी काली पट्टी बांधकर विरोध जताएंगे।
29 अक्टूबर 2025 को देशभर में वितरक मोमबत्ती और मशाल जुलूस निकालकर अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन करेंगे। 5 नवंबर 2025 को नो मनी – नो इंडेंट अभियान के तहत वितरक कोई भी नया ऑर्डर नहीं लेंगे और तेल कंपनियों के अकाउंट में राशि जमा नहीं करेंगे। यदि सरकार ने तब भी मांगों पर ध्यान नहीं दिया, तो वितरक अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने के लिए विवश होंगे।

ज्ञापन में वितरकों ने यह भी गंभीर आरोप लगाया है कि ऑयल कंपनियों के कुछ अधिकारी वितरकों पर अनैतिक दबाव डालते हैं, जिसके चलते कई वितरक मानसिक रूप से परेशान होकर आत्महत्या जैसे कदम उठाने को मजबूर हुए हैं। वितरकों ने सरकार से अपील की है कि डिनोबा समिति की सिफारिशों के अनुरूप, उनकी लागत एवं वर्तमान महंगाई को ध्यान में रखते हुए होम डिलीवरी और एडमिनिस्ट्रेटिव चार्ज में 75 रूपये की वृद्धि की जाए।

ज्ञापन में स्पष्ट कहा गया है कि यदि भारत सरकार ने इस पर सहानुभूतिपूर्वक और तत्काल निर्णय नहीं लिया, तो एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन  देशभर में आंदोलन को और तेज करेगा। ज्ञापन में वितरकों का यह दो टूक संदेश दर्ज है कि सरकार यदि हमें हमारी लागत के अनुसार सेवा शुल्क नहीं देती, तो आंदोलन के अलावा और कोई रास्ता नहीं है। यदि बढ़ती महंगाई, संचालन लागत और प्रशासनिक खर्चों के अनुपात में वर्षों से नहीं बढ़े शुल्कों को लेकर एलपीजी वितरकों का यह आंदोलन देशव्यापी असर डाल सकता है। यदि एलपीजी वितरक हड़ताल पर जाते हैं तो गैस उपभोक्ताओं के सामने बड़ी संकटपूर्ण स्थिति उत्पन्न हो सकती है। हड़ताल के चलते पूरे देश में घरेलू गैस सिलेंडरों की आपूर्ति ठप हो जाएगी। इससे आम उपभोक्ताओं, विशेषकर गृहणियों, होटल-ढाबों, हॉस्टलों और अस्पतालों को भारी परेशानी झेलनी पड़ेगी। सिलेंडर की नई बुकिंग, डिलीवरी और रिफिल सेवा पूरी तरह बंद हो जाएगी, जिससे खाना पकाने के लिए ईंधन का संकट गहराएगा। ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में काला बाजारी और सिलेंडर की कालाबाज़ार दरें बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है। यदि आंदोलन लम्बा खिंचता है तो देशभर में त्राहिमाम जैसी स्थिति बन सकती है, क्योंकि रसोई गैस अब घर-घर की जरूरत बन चुकी है। सरकार के लिए यह एक चेतावनी है कि यदि समय रहते फैसला नहीं लिया गया, तो घरेलू गैस वितरण व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो सकती है।

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