राजधानी

जिला पंचायत भवन बना ‘कचरा घर’, प्लास्टिक ढेर ने खोली जिम्मेदारों की पोल

 गोविंद राम ब्यूरो रिपोर्ट बलौदाबाजार।


जिला पंचायत भवन परिसर—जहाँ से पूरे जिले की स्वच्छता योजनाएँ संचालित होती हैं—आज खुद गंदगी का अड्डा बन चुका है। भवन के सामने गार्डन के बगल रोड किनारे प्लास्टिक की थालियाँ, नाश्ता पैकिंग प्लेट, पानी की बोतलें, प्लास्टिक बोरी और कागजों का ढेर खुलेआम पड़ा है।

यह दृश्य केवल बदबू और मच्छरों का घर नहीं बना रहा, बल्कि जिला पंचायत की कार्यशैली पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। जिस संस्था का दायित्व पूरे जिले की ग्राम पंचायतों में साफ–सफाई और स्वच्छ भारत मिशन की सफलता सुनिश्चित करना है, उसी के दफ्तर के दरवाजे पर कचरे का अम्बार उनके खोखले दावों की पोल खोल रहा है।प्लास्टिक कचरे को खुले में छोड़ देने से पर्यावरण को दीर्घकालिक नुकसान,मच्छरों और संक्रामक बीमारियों का खतरा,परिसर आने–जाने वालों को असुविधा,
और सबसे अहम, स्वच्छ भारत मिशन की साख पर आघात पड़ रहा है।


लोग खुलेआम उपहास कर रहे हैं कि जब जिला पंचायत खुद अपने घर का कचरा नहीं संभाल पा रही, तो गाँव–गाँव की स्वच्छता कैसे सुनिश्चित करेगी? यह स्थिति न सिर्फ लापरवाही बल्कि साफ–साफ जिम्मेदारी से मुंह मोड़ने का उदाहरण है। यदि तत्काल ठोस कदम नहीं उठाए गए तो यह गंदगी केवल पंचायत परिसर तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि जिले की साख और स्वास्थ्य दोनों को निगल जाएगी। अब सवाल यह है कि क्या जिला पंचायत अपने ही भवन की गंदगी साफ करने की हिम्मत दिखाएगी, या फिर ‘स्वच्छता’ केवल कागजों और भाषणों तक ही सीमित रहेगी?

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