गौवंश का आत्मनिर्भर भारत मिशन: अब खुद ही करेंगे चारा-पानी का इंतज़ाम
बलौदाबाजार:-
डबल इंजन की सरकार जहां एक ओर गौमाता की सेवा को अपना धर्म और कर्तव्य बताकर मंचों पर भाषण देती रहती है, वहीं दूसरी ओर ज़मीनी सच्चाई गौवंश की आत्मनिर्भरता के नए अध्याय को जन्म दे रही है।
ताज़ा मामला बलौदाबाजार जिला मुख्यालय का है, जहां जिला पंचायत कार्यालय परिसर के सुंदर-सुसज्जित गार्डन में दो दर्जन से अधिक मवेशी बिना किसी सरकारी आदेश के—स्वेच्छा से—घास चरते और विश्राम करते पाए गए। मवेशी इतने निश्चिंत मुद्रा में थे कि देखने वालों को यह भ्रम हुआ कि शायद यहीं अब इनका स्थायी निवास बनने जा रहा है।
मौके पर मौजूद एक गाय ने, जब मुँह में घास चबाते हुए संवाददाता की ओर देखा, तो उसकी आँखों में एक ही भाव था—“अब भरोसा खुद पर ही करना होगा।” यह दृश्य उस ‘गौ-रक्षक शासन व्यवस्था’ पर करारा तमाचा था, जो आये दिन टीवी चैनलों पर गौसेवा के नाम पर वाहवाही लूटती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह ‘गार्डन सत्याग्रह’ गौवंश की वह आत्मघोषित योजना है, जिसमें वे खुद ही अपने चारे-पानी, विश्राम और सुरक्षा की व्यवस्था खोज निकाले हैं क्योंकि सरकार के भरोसे रहने का नतीजा वो पहले ही भुगत चुके हैं। कभी सड़कों पर एक्सीडेंट की शिकार होती गायें, कभी कूड़े के ढेर में भोजन तलाशते गौवंश। अब यह मूक प्राणी ‘गौरक्षा’ के खोखले वादों से तंग आ चुके हैं।
जिला पंचायत गार्डन को अब ‘गौवृंदवन’ नाम दिया जाना उचित होगा , जहां हरी-हरी घास, शांति, और भीड़-भाड़ से दूरी—सभी कुछ उपलब्ध है। सूत्रों की माने तो आने वाले दिनों में गौवंश की ओर से बाकायदा एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर यह घोषणा की जा सकती है कि वे अब सरकार की कृपा पर नहीं, अपने ‘चारागृह लोकतंत्र’ के अंतर्गत जीना पसंद करेंगे।
प्रशासन क्या कर रहा है?
प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। जिला पंचायत कार्यालय पहुंचे अनेकों लोगों का कहना है कि कम से कम यहां तो ट्रैफिक का खतरा नहीं है। जो जहां सुरक्षित है, वहीं रहना चाहिए।” सूत्र बताते हैं कि नगर पालिका के सफाई कर्मचारियों को यह निर्देश ज़रूर मिला है कि “कृपया मवेशियों को डिस्टर्ब न करें, वरना वें कहीं और चले जाएंगे।”
गौमाता अब वोट की राजनीति का मुद्दा नहीं, विकास की विडंबना बन चुकी हैं। चारा-पानी के इंतज़ाम से लेकर आश्रय स्थल तक का प्रबंधन जब मवेशी खुद करने लगें, तब समझिए कि ‘डबल इंजन’ से ज्यादा ताकतवर शायद चार पैर ही हो गए हैं।