राजधानी

ग्राम कुकदा की आवाज बनी मीडिया, रोजगार सहायक बर्खास्त जनशक्ति और पत्रकारिता के समन्वय से मिली न्याय की राह

बलौदाबाजार:-

बलौदाबाजार ज़िले के ग्राम कुकदा में लंबे समय से चल रही प्रशासनिक मनमानी और ग्रामीणों के साथ हो रहे पक्षपात ने आखिरकार एक निर्णायक मोड़ ले लिया। गांव के जागरूक निवासियों ने प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत हो रही लापरवाहियों, भ्रष्टाचार और ग्राम रोजगार सहायक की स्वेच्छाचारिता को लेकर आवाज़ उठाई। उन्होंने लोकतंत्र के चौथे स्तंभ—मीडिया—से उम्मीद की कि यह मुद्दा न केवल उठाया जाएगा, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार की दिशा भी दिखाई जाएगी।

मीडिया की निर्भीक भूमिका: उम्मीद से विश्वास तक

ग्रामीणों ने बलौदाबाजार जिला प्रेस क्लब से निवेदन किया कि इस जनहित मामले को प्राथमिकता से उठाया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि मीडिया का ईमानदार और निष्पक्ष योगदान ही वह आधार है, जिसकी वजह से वे अपनी पीड़ा सार्वजनिक रूप से रखने का साहस कर पाए। ग्रामीणों का यह विश्वास मीडिया की उस भूमिका को रेखांकित करता है, जिसने वर्षों से आम जनता की आवाज़ को मंच दिया है और भ्रष्टाचार, अनियमितताओं एवं पक्षपात पर खुलकर सवाल उठाए हैं।

प्रेस क्लब ने मामले की गंभीरता को समझते हुए तत्काल संज्ञान लिया और अपने कार्यालय में एक विशेष प्रेस वार्ता आयोजित की। इस प्रेस वार्ता के ज़रिए ग्रामीणों की बातों को प्रमुखता से प्रकाशित किया गया, जिससे प्रशासनिक गलियारों में हलचल मच गई।

प्रशासन हरकत में आया, दोषी रोजगार सहायक को बर्खास्त किया गया

प्रेस कवरेज और जनदबाव के चलते प्रशासन ने मामले की जांच शुरू की। जांच में यह स्पष्ट हो गया कि ग्राम पंचायत कुकदा में पदस्थ रोजगार सहायक राजेन्द्र सिंह मार्कण्डेय ने प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) अंतर्गत पदीय दायित्वों के निर्वहन में घोर लापरवाही एवं मनमानी की थी। यह कार्य न केवल सरकारी सेवा नियमों के विरुद्ध था, बल्कि सीधे तौर पर लोकहित को नुकसान पहुंचाने वाला था।

इस आधार पर सिविल सेवा संविदा नियुक्ति नियम 2012 की कंडिका 11(5) के तहत, जनपद पंचायत पलारी के मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा राजेन्द्र सिंह मार्कण्डेय की संविदा सेवा एक माह के वेतन के साथ समाप्त कर दी गई। यह फैसला प्रशासनिक जवाबदेही और पारदर्शिता की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है।

जनआंदोलन और मीडिया की शक्ति से मिली सफलता

यह घटना केवल एक व्यक्ति की बर्खास्तगी भर नहीं है, बल्कि यह उदाहरण है कि जब जनसाधारण और मीडिया एकजुट होकर अन्याय के विरुद्ध खड़े होते हैं, तो लोकतंत्र की जड़ें और भी मजबूत होती हैं। ग्राम कुकदा के निवासियों ने अपनी आवाज उठाकर यह साबित कर दिया कि चुप्पी कभी समाधान नहीं होती और पत्रकारिता अगर ईमानदारी से अपने दायित्व निभाए, तो वह व्यवस्था को आईना दिखाने में सक्षम है।

इस मामले ने एक बार फिर यह सिखाया कि 'लोकतंत्र की असली ताकत जागरूक नागरिक और निर्भीक मीडिया में निहित होती है।

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