जंगल के मजदूरों को उठाकर मुर्गी फार्म मे काम करवाया, भुगतान भी नहीं किया वनरक्षक मनबोधन टंडन की भ्रष्टाचार की परतें खुल रही
बलौदाबाजार:-
बलौदाबाजार वन परिक्षेत्र के अंतर्गत धाराशिव अस्थाई रोपणी मे तैनात बीट गार्ड मनबोधन टंडन पर एक ऐसा सनसनीखेज आरोप सामने आया है जो न केवल शासकीय सेवा के मूल सिद्धांतों को ठेंगा दिखाता है, बल्कि मानवाधिकारों के खुलेआम उल्लंघन का उदाहरण भी बन चुका है। आरोप है कि मनबोधन टंडन ने न केवल नरेगा मजदूरों के नाम पर फर्जी मस्टररोल तैयार कर सरकारी राशि का गबन किया, बल्कि ग्रामीण मजदूरों को जबरदस्ती एक निजी मुर्गी फार्म में कार्य करवाने के लिए विवश किया, और इसके एवज में उन्हें कोई मजदूरी तक नहीं दी गई। प्राप्त जानकारी के अनुसार, दर्जनों ग्रामीणों को जो पहले जंगल में श्रम करके जीविकोपार्जन कर रहे थे, उन्हें बीट गार्ड टंडन द्वारा यह कहकर बुलाया गया कि उन्हें नरेगा के तहत जंगल कार्य में लगाया जाएगा। लेकिन वास्तविकता में उन्हें भेजा अपने करीबी अतिक्रमणकारी मित्र के दूसरे गाँव स्थित मुर्गी फार्म में, जहाँ उनसे मुर्गियों की सफाई, दाना डालना, फार्म की साफ-सफाई जैसे कार्य करवाए गए। कई ग्रामीणों ने बताया कि वे रोज़ सुबह से देर शाम तक फार्म में कार्य करते थे, लेकिन उन्हें एक रुपये तक का भुगतान नहीं मिला। उक्त कृत्य न केवल घिनौना है बल्कि पूरी तरह से अनुशासनहीनता का घोर उदाहरण है।
धाराशिव वन क्षेत्र में भ्रष्टाचार की जड़ें गहराई तक
इस तरह धाराशिव वन क्षेत्र में तैनात बीट गार्ड मनबोधन टंडन दिनों-दिन आरोपों के घेरे में घिरते जा रहे हैं। भ्रष्टाचार, पक्षपात और सरकारी पद के दुरुपयोग को लेकर ग्रामीणों में गहरा आक्रोश व्याप्त है। ग्रामीणों का कहना है कि मनबोधन टंडन द्वारा वन भूमि का संरक्षण करने के बजाय उसे निजी हितों और कमीशनखोरी का अड्डा बना दिया गया है। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, जब निर्धन और बेघर परिवारों ने वन भूमि में अस्थायी रूप से झोपड़ी डालकर सिर छुपाने की कोशिश की, तो वन विभाग ने तुरंत उन्हें खदेड़ दिया। यही नहीं, सरकार द्वारा स्थापित किए जा रहे धान उपार्जन केंद्र को भी वन विभाग की अनुमति न मिलने से अधर में लटका दिया गया है। वहीं दूसरी ओर, बीट गार्ड मनबोधन टंडन द्वारा अपने निजी संबंधों के लोगों को मोटी रकम लेकर पक्के मकान निर्माण की अनुमति दी जा रही है। चौंकाने वाली बात यह है कि ये लोग पहले से ही गाँव में बड़े-बड़े मकानों के मालिक हैं और संपन्न वर्ग से आते हैं।
फर्जी मस्टररोल और नरेगा घोटाले का भी आरोप
मनबोधन टंडन के खिलाफ एक और बड़ा आरोप नरेगा योजना के तहत फर्जीवाड़े का भी है। ग्रामीणों ने खुलासा किया है कि जंगल चौकीदार संतोष यदु के पूरे परिवार के नाम पर फर्जी मस्टररोल भरकर हजारों रुपये का गबन किया गया, जबकि वे कभी जंगल कार्य में शामिल ही नहीं हुए। इसके उलट, जो असल में जंगलों की सुरक्षा व रखरखाव में दिन-रात मेहनत कर रहे थे, उन्हें आज तक मजदूरी की राशि नहीं मिली।
दर्जनों मजदूरों को नरेगा के नाम पर हेरफेर कर अपने करीबी अतिक्रमणकारी के मुर्गी फार्म में जबरिया कार्य करवाया जाना , अपने चौकीदार के परिवारवालों के नाम मस्टररोल जारी करना, अपने दोस्ती यारी मे मित्रगण को वनभूमि मे अतिक्रमण करने देना यह पूरी घटना शासकीय कर्मचारी के आचरण नियमों का घोर उल्लंघन है और सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग का ज्वलंत उदाहरण भी। वनमंत्री को किये गए शिकायत मे ग्रामीणों ने कहा है कि यदि निष्पक्ष जाँच कार्यवाही नहीं होती तों व्यपाक जनआंदोलन किया जावेगा।