बलौदाबाजार।
जिले की सिटी कोतवाली पुलिस एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में आ गई है। ग्राम रसेड़ा निवासी आकाश साहू द्वारा जिला पुलिस अधीक्षक, पुलिस महानिरीक्षक, पुलिस महानिदेशक, मंत्री टंकराम वर्मा एवं मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल आदि को दिए गए एक लिखित शिकायत पत्र में यह आरोप लगाया गया है कि सिटी कोतवाली बलौदाबाजार के थाना प्रभारी ने चोरी, लूट जैसे गैर-जमानती और संगीन अपराध के आरोपियों को बिना किसी न्यायालयीन आदेश या कानूनी प्रक्रिया के थाने से ही छोड़ भगा दिया है। इस गंभीर मामले ने पूरे जिले में पुलिस प्रशासन की निष्पक्षता और कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिन्ह खड़े कर दिए हैं।
पीड़ित आकाश साहू ने बताया कि दिनांक 05 जनवरी 2024 को जब वह अंबिकापुर में थे, तब आशुतोष मिश्रा एवं अन्य लोग—जो स्वयं को चोला मंडलम् कंपनी के कर्मचारी बता रहे थे—उनके ग्राम रसेड़ा स्थित घर पहुंचे और उनके पिता से मिलकर फोन पर 7.50 लाख रुपये तत्काल जमा करने का दबाव बनाया। जब पैसा नहीं दिया गया, तो रात्रि लगभग 10 बजे बिना किसी पूर्व सूचना या अनुमति के उनके ट्रैक्टर और ट्रॉली को बलपूर्वक खींचकर ले जाया गया। यह पूरी घटना लूट की श्रेणी में आती है, जिसे लेकर पीड़ित ने तत्काल सिटी कोतवाली बलौदाबाजार में रिपोर्ट दर्ज कराने की कोशिशे की, लेकिन थाना प्रभारी ने रिपोर्ट लिखने से स्पष्ट इनकार कर दिया।
इसके बाद पीड़ित ने मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी बलौदाबाजार के न्यायालय में परिवाद पेश किया, जिसके आदेश पर आरोपीगण के विरुद्ध आईपीसी की धारा 379 एवं 34 के अंतर्गत अपराध दर्ज हुआ, जिसे आगे चलकर लूट की धारा में परिवर्तित किया गया।
बिना जमानत आरोपियों को छोड़ना: गंभीर लापरवाही या मिलीभगत?
प्रार्थी के अनुसार, दिनांक 22 जुलाई 2025 को पुलिस द्वारा मुख्य आरोपी आशुतोष मिश्रा एवं खिलेश्वर जायसवाल को गिरफ्तार कर सिटी कोतवाली लाया गया था। लेकिन थाना प्रभारी ने उन्हें मात्र दो घंटे थाने में रखने के बाद, बिना किसी वैधानिक अनुमति या कोर्ट से जमानत आदेश के, चुपचाप छोड़ भगा दिया। यह पूरा घटनाक्रम सीसीटीवी फुटेज में दर्ज होने का दावा भी प्रार्थी द्वारा किया गया है साथ ही पीड़ित आकाश साहू का कहना है कि आरोपियों को लाने सहित थाने से छोड़ने भगाने तक वो स्वयं उस वक्त थाना परिसर के बाहर मौजूद थे और उन्होंने इस अनुचित कार्यवाही को प्रत्यक्ष रूप से देखा हैं। उनका यह भी आरोप है कि थाना प्रभारी ने आरोपियों के प्रभाव और आर्थिक प्रलोभन में आकर यह गैरकानूनी कदम उठाया, जो न केवल कानून की खुली अवहेलना है, बल्कि पीड़ित के संवैधानिक अधिकारों का सीधा उल्लंघन भी है।
स्थायी पदस्थापना से पनप रही मनमानी
यह कोई पहला मामला नहीं है जब सिटी कोतवाली के वर्तमान थाना प्रभारी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे हों। सूत्रों के अनुसार, वे लंबे समय से एक ही स्थान पर पदस्थ हैं और समय-समय पर उनके ऊपर कमीशनखोरी, पक्षपात और प्रभावशाली लोगों को संरक्षण देने जैसे गंभीर आरोप लगते रहे हैं। बावजूद इसके, पुलिस विभाग द्वारा न तो कोई ठोस अनुशासनात्मक कार्यवाही की गई और न ही उनका स्थानांतरण किया गया। यह स्थिति पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर भी गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़े करती है।
डेढ़ वर्ष से ट्रक और ट्रॉली गायब, न्याय की राह देख रहा पीड़ित
उल्लेखनीय है कि पीड़ित आकाश साहू के ट्रक और ट्रॉली को ले जाए जाने की घटना को अब डेढ़ वर्ष से अधिक समय हो गया है, लेकिन उन्हें अब तक अपने वाहन वापस नहीं मिले हैं, न ही पुलिस द्वारा इस संबंध में कोई ठोस कार्रवाई की गई है।
घटना के प्रकाश में आने के बाद स्थानीय जनमानस में भारी असंतोष है। नागरिकों का कहना है कि यदि थाना स्तर पर ही कानून का इस प्रकार मजाक उड़ाया जाएगा और प्रभावशाली अपराधियों को संरक्षण मिलेगा, तो आम आदमी को न्याय कैसे मिलेगा? ऐसे में पुलिस प्रशासन से अपेक्षा की जा रही है कि वह इस मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई करे।
पीड़ित की मांग
पीड़ित आकाश साहू ने मांग की है कि थाना प्रभारी सिटी कोतवाली बलौदाबाजार के विरुद्ध पदीय दुरुपयोग, आपराधिक संरक्षण एवं न्यायिक आदेश की अवहेलना जैसे गंभीर कृत्यों पर अपराध दर्ज कर तत्काल निलंबन तथा विभागीय जांच की जाए, ताकि भविष्य में आम नागरिकों के साथ अन्याय न हो।
"मामले की जांच की जा रही है, और जांच में आवश्यकता पड़ने पर आरोपियों की गिरफ्तारी की जाएगी"
अभिषेक सिंह एएसपी बलौदाबाजार