राजधानी

नोटिस: पत्रकारिता पर सीधा हमला*

रायपुर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने मानहानि का नोटिस भेजकर पत्रकारिता पर सीधे तौर पर हमला कर दिया है और पत्रकारों की निष्पक्षता पर ही सवाल उठा दिया है, रायपुर के वरिष्ठ पत्रकार विप्लव दत्ता ने यह स्पष्ट किया है कि उन्होंने खबर केवल सूत्रों के हवाले से प्रकाशित की थी, जैसा कि मुख्यधारा की पत्रकारिता में आम चलन है। बावजूद इसके, उन्हें नोटिस थमा दिया गया, जिसे पत्रकार जगत उनके मनोबल को तोड़ने की कोशिश माना रहा है।

पहले भी लग चुके हैं आरोप

यह पहला मामला नहीं है जब कांग्रेस नेता सुशील आनंद शुक्ला विवादों में आए हों। इससे पहले महिला कांग्रेस की पूर्व राष्ट्रीय प्रवक्ता राधिका खेड़ा ने भी उन पर गंभीर आरोप लगाए थे, जिनमें अशोभनीय व्यवहार और अनुचित प्रस्ताव जैसी बातें शामिल थीं।

पत्रकारिता को दबाने की साजिश?

मीडिया समुदाय का मानना है कि यह घटना एक चिंताजनक संकेत है, जहां पत्रकारों को केवल इसलिए निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि वे सत्ता से सवाल पूछ रहे हैं। पत्रकारों ने इस कदम को इमरजेंसी की याद दिलाने वाला बताया है, जब इंदिरा गांधी के शासनकाल में मीडिया की आजादी पर पहरा बैठा दिया गया था।

अब सवाल यह है—क्या कांग्रेस अब भी अभिव्यक्ति की आजादी से डरती है?

पत्रकारों की मांग है कि लोकतंत्र में सवाल उठाना गुनाह नहीं होना चाहिए। कांग्रेस पार्टी को यह स्पष्ट करना चाहिए कि क्या वह अब भी उस पुरानी शैली में यकीन रखती है, जिसमें असहमति को दबाया जाता है, या फिर वह एक खुले और उत्तरदायी लोकतंत्र की समर्थक है।

सुनील आनंद शुक्ला – मीडिया संचार प्रभारी

गलत तरीके से समाचार चलाया गया था इसलिए हमारे वकील द्वारा नोटिस दिया गया है।

गौरीशंकर श्रीवास प्रवक्ता भाजपा –  एक चरित्र हीन व्यक्ति ने जिन पर, उनकी पार्टी की महिला ने गंभीर आरोप लगाए थे वह व्यक्ति गुंडा की तरह पत्रकारों को नोटिस देकर धमकाने की कोशिश कर रहे है। ऐसा प्रतीत होता है कि सत्ता का नशा अभी उतरा नहीं , प्रदेश में विष्णुदेव की सुशासन की सरकार है पत्रकारों के साथ हम खड़े रहेंगे और इस लड़ाई को लड़ेंगे

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