राजधानी रायपुर के पंडरी थाना क्षेत्र अंतर्गत मोवा इलाके की दुबे कॉलोनी स्थित ‘क्रॉसविंड सोसाइटी’ में शुक्रवार को अचानक भीषण आग लगने से हड़कंप मच गया। आग सोसाइटी की तीसरी मंजिल पर स्थित एक फ्लैट में लगी, जिसने देखते ही देखते विकराल रूप ले लिया। घटना के समय आसपास के रहवासियों में अफरा-तफरी की स्थिति बन गई और लोग अपने-अपने घरों से बाहर निकल आए।
सूचना मिलते ही पंडरी थाना पुलिस और दमकल विभाग की टीम तत्काल मौके पर पहुंची। दमकल कर्मियों ने तेजी से मोर्चा संभालते हुए आग बुझाने का अभियान शुरू किया। कड़ी मशक्कत के बाद आग पर पूरी तरह काबू पा लिया गया, जिससे एक बड़ी अनहोनी टल गई। राहत की बात यह रही कि इस हादसे में किसी भी प्रकार की जनहानि नहीं हुई।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, फ्लैट से अचानक धुआं निकलता दिखाई दिया, जिसके बाद आग तेजी से फैल गई। शुरुआती जांच में आग लगने का कारण एयर कंडीशनर (AC) में हुआ शॉर्ट सर्किट बताया जा रहा है। हालांकि, आग लगने के सटीक कारणों की पुष्टि के लिए जांच जारी है।
आगजनी की इस घटना में फ्लैट के अंदर रखा फर्नीचर, इलेक्ट्रॉनिक सामान और अन्य घरेलू वस्तुएं पूरी तरह जलकर खाक हो गईं। आग की तीव्रता इतनी अधिक थी कि आसपास के फ्लैटों में भी धुआं भर गया, जिससे लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
प्रशासन और पुलिस ने लोगों से अपील की है कि गर्मी के मौसम में बिजली उपकरणों का उपयोग सावधानीपूर्वक करें और समय-समय पर उनकी जांच कराते रहें, ताकि इस तरह की घटनाओं से बचा जा सके। फिलहाल, स्थिति नियंत्रण में है और आगे की कार्रवाई जारी है।
स्काई वॉक, 77 करोड़ रुपए से भी अधिक की लागत में तैयार हो रहा है। पिछले 8 साल में इसका 50 प्रतिशत भी काम नहीं हो पाया है। हालत यह है कि सड़े-गले टीन शेड, जंग लगी छड़ में इसका बेस बन रहा है।
जबकि इस साफ तौर पर कहा गया है कि पुरानी खराब चीजों को बदलकर सही तरीके से निर्माण किया जाए। लेकिन पीएसएए कंट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड की ओर से जगह-जगह छेद वाले टीन शेड, जंग लगी छड़ में ही ढलाई कराई जा रही है। इससे भविष्य में यह किसी बड़ी दुर्घटना का कारण भी बन सकता है।
वहीं, इस पूरे कंट्रक्शन के दौरान पीडब्लूडी के जिम्मेदार अधिकारी भी गायब हैं, ना ये जांच करने पहुंचते हैं, ना ही इन्हें किसी तरह के काम की जानकारी है। जिम्मेदार ही इसकी देखरेख नहीं कर रहे हैं, अब यह स्काई वॉक भगवान भरोसे है।हालांकि कांग्रेस सरकार के समय इस पर पूरी तरह से ब्रेक लग गया था। लेकिन 2023 में भाजपा की सरकार आते ही फिर से इसका काम शुरू किया गया। लेकिन इसकी लागत 77 करोड़ पार हो गई।
छत्तीसगढ़ में रेत संकट को कम करने और खनन व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए राज्य सरकार ने बड़े स्तर पर सुधारात्मक कदम उठाए हैं। पहले जहां खदानों की संख्या घटने से निर्माण कार्य प्रभावित हो रहे थे और अवैध खनन को बढ़ावा मिल रहा था, वहीं अब नई नीतियों के जरिए इस स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया जा रहा है।रेत के अवैध उत्खनन और परिवहन पर रोक लगाने के लिए जिला और राज्य स्तर पर टास्क फोर्स सक्रिय है। इसमें खनिज, राजस्व, पुलिस, परिवहन और पर्यावरण विभाग के अधिकारी शामिल हैं, जो लगातार निगरानी और कार्रवाई कर रहे हैं। राजनांदगांव और बलरामपुर सहित कई जिलों में अवैध गतिविधियों पर त्वरित कार्रवाई भी की गई है।मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में 16 अप्रैल को हुई कैबिनेट बैठक में छत्तीसगढ़ गौण खनिज साधारण रेत (उत्खनन एवं व्यवसाय) नियम 2025 और गौण खनिज नियम 2015 में संशोधन को मंजूरी दी गई। इन संशोधनों का उद्देश्य खनन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और नियंत्रित बनाना है।नए नियमों के तहत अवैध उत्खनन, परिवहन और भंडारण पर कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है। दोषी पाए जाने पर 25 हजार रुपए से लेकर 5 लाख रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। इससे अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित रामअवतार जग्गी हत्याकांड में एक बार फिर कानूनी मोड़ आ गया है। इस लंबे समय से चल रहे हाई-प्रोफाइल मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए अभियुक्त अमित जोगी को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने फिलहाल उन्हें तुरंत सरेंडर करने से छूट दे दी है और मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।गुरुवार को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्टकी पीठ—जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता—ने अमित जोगी की याचिका पर विचार किया। याचिका में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी गई थी, जिसमें अमित जोगी को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी और 23 अप्रैल तक सरेंडर करने का निर्देश दिया गया था। सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम राहत देते हुए फिलहाल सरेंडर की बाध्यता पर रोक लगा दी। साथ ही, CBI से पूरे मामले में जवाब तलब किया गया है। अब इस मामले में अगली सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।रामअवतार जग्गी हत्याकांड 4 जून 2003 का है। उस दिन NCP नेता राम अवतार जग्गी की राजधानी रायपुर में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। यह घटना उस समय प्रदेश की सबसे चर्चित राजनीतिक हत्याओं में से एक बन गई थी। जांच के दौरान इस मामले में राजनीतिक साजिश की बात सामने आई थी, जिसके चलते यह केस लगातार सुर्खियों में बना रहा। कई सालों तक चली जांच और सुनवाई के बाद मामला अदालतों में लंबित रहा।
करेंसी टॉवर में लिफ्ट का ‘खेल’ जारी, एसीएस के बाद कांग्रेस प्रवक्ता भी फंसे, जांच पर सवाल
राजधानी रायपुर के वीआईपी चौक स्थित करेंसी टॉवर में लिफ्ट हादसों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। एक हफ्ते के भीतर लिफ्ट में फंसने की यह दूसरी बड़ी घटना है। तीन दिन पहले एडिशनल चीफ सेक्रेटरी (एसीएस) ऋचा शर्मा के 20 मिनट तक फंसे रहने के बाद, बुधवार को प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता नितिन भंसाली भी इस तकनीकी खामी का शिकार हुए। गनीमत रही कि गार्ड ने समय रहते उन्हें रेस्क्यू कर सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
बुधवार सुबह करीब 8:30 बजे नितिन भंसाली टॉवर स्थित जिम से निकलकर लिफ्ट के जरिए बेसमेंट की ओर जा रहे थे। तभी अचानक लिफ्ट का सपोर्ट सिस्टम फेल हो गया और वह बीच में ही अटक गई। दरवाजा नहीं खुलने पर उन्होंने शोर मचाया और दरवाजा पीटा, जिसे सुनकर सुरक्षा गार्ड मौके पर पहुंचे और कड़ी मशक्कत के बाद उन्हें बाहर निकाला। घटना से डरे भंसाली ने प्रबंधन की इस घोर लापरवाही पर जमकर फटकार लगाई।
चार में से दो लिफ्ट बंद, बाकी भी कंडम
इस पॉश कमर्शियल कॉम्प्लेक्स में लगी चार लिफ्टों में से दो पहले ही बंद पड़ी हैं, जबकि चालू दो लिफ्टों में भी आए दिन खराबी की शिकायतें मिल रही हैं। मल्टीनेशनल कंपनी की लिफ्ट होने के बावजूद मेंटेनेंस और इमरजेंसी बैकअप न होना प्रबंधन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। करेंसी टॉवर में जॉनसन लिफ्ट एंड एस्केलेटर्स की लिफ्ट लगी हैं।जिम की लिफ्ट में फंसीं IAS ऋचा शर्मा, घुटन से बिगड़ी
हालत, अधिकारियों को फोन करते ही मचा हड़कंप-
रायपुर में लिफ्ट खराबी की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, लेकिन इस बार सामने आया मामला प्रशासनिक हलकों में गंभीर चिंता का कारण बन गया है। एयरपोर्ट मार्ग स्थित श्रीराम मंदिर चौक के पास बने करेंसी टावर में सोमवार सुबह एक बड़ा हादसा टल गया, जब छत्तीसगढ़ शासन की असिस्टेंट चीफ सेक्रेटरी (ACS) ऋचा शर्मा करीब 20 मिनट तक लिफ्ट में फंसीं रहीं
42 डिग्री की आग में झुलसते मजदूर, नाले किनारे दम तोड़ती इंसानियत
कपसदा की ‘कंटेनर बस्ती’ का काला सच: बचपन सिसकता, कानून बेबस
श्रम कानून कागजों में जिंदा, जमीनी हकीकत में ‘आधुनिक गुलामी’
धरसींवा । धरसीवां सिलतरा औद्योगिक क्षेत्र से सामने आई तस्वीरें तथाकथित विकास मॉडल पर बड़े सवाल खड़े कर रही हैं। ब्लॉक मुख्यालय से महज 4 किलोमीटर दूर कपसदा के कोल्हान नाले के किनारे लोहे के कंटेनरों की अस्थायी बस्ती बसाई गई है, जहां 70 से ज्यादा मजदूर और उनके परिवार रहने को मजबूर हैं। यह बस्ती किसी आवासीय सुविधा से ज्यादा एक ‘लोहे का पिंजरा’ नजर आती है, जहां इंसान अपने परिवार के साथ तपती धातु के बीच जीवन काटने को विवश है।
दिन चढ़ते ही ये कंटेनर तंदूर में तब्दील हो जाते हैं। बाहर का तापमान 42 डिग्री के पार पहुंचते ही भीतर की स्थिति और भी भयावह हो जाती है। हवा और रोशनी के अभाव में दम घुटने जैसी स्थिति बन जाती है, जिससे हर समय हीट स्ट्रोक का खतरा बना रहता है। मजदूरों का कहना है कि दोपहर के समय कंटेनर के अंदर रहना असंभव हो जाता है, लेकिन मजबूरी ऐसी कि कहीं और जाने का विकल्प नहीं।
यहां रहने वाले अधिकतर मजदूर पश्चिम बंगाल, बिहार और उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ सीमा से काम की तलाश में आए हैं। बेहतर जीवन की उम्मीद लेकर पहुंचे इन लोगों को बदले में असुरक्षित और अमानवीय परिस्थितियां मिली हैं। नाले के किनारे बसी इस बस्ती में गंदगी, बदबू और अस्वच्छता का माहौल बना रहता है। पीने के पानी और साफ-सफाई की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने से बीमारियों का खतरा लगातार बना हुआ है।
सबसे अधिक चिंता बच्चों की स्थिति को लेकर है। दर्जनों बच्चे इस बस्ती में पल-बढ़ रहे हैं, जिनका बचपन शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं से दूर गुजर रहा है। न स्कूल, न आंगनबाड़ी-इन बच्चों के लिए जिंदगी सिर्फ कंटेनर और उसके आसपास की गंदगी तक सिमट गई है। मच्छरों और गंदगी के बीच रहने से बीमारियों का खतरा भी बना रहता है।
सुरक्षा व्यवस्था भी पूरी तरह नदारद है। कुछ महीने पहले एक मासूम के साथ दुष्कर्म की घटना सामने आई थी, जिसने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया था। इसके बावजूद न तो कोई ठोस सुरक्षा व्यवस्था की गई और न ही जिम्मेदारों की जवाबदेही तय हो पाई। यह स्थिति बताती है कि मजदूरों और उनके परिवारों की सुरक्षा कितनी उपेक्षित है।
सबसे बड़ा सवाल श्रम कानूनों के पालन को लेकर है। फैक्ट्री एक्ट 1948, कॉन्ट्रैक्ट लेबर एक्ट 1970 और इंटरस्टेट माइग्रेंट वर्कर्स एक्ट 1979 जैसे कानूनों की खुलेआम अनदेखी हो रही है। मजदूरों को सुरक्षित आवास, स्वास्थ्य सुविधाएं और सम्मानजनक जीवन देना जिनकी जिम्मेदारी है, वे इस पूरे मामले में मौन साधे हुए हैं। ऐसे हालात भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार) के सीधे उल्लंघन की ओर इशारा करते हैं। प्रशासन और श्रम विभाग की निष्क्रियता इस समस्या को और गंभीर बना रही है।
यह पूरी स्थिति सिर्फ एक बस्ती की कहानी नहीं, बल्कि उस विकास मॉडल का चेहरा है, जहां मुनाफे की दौड़ में इंसानियत पीछे छूट जाती है। उद्योगों की चकाचौंध के पीछे छिपी यह सच्चाई बताती है कि गरीब और मजदूर वर्ग आज भी बुनियादी अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहा है।
अब सवाल यह है कि क्या जिम्मेदार अधिकारी इस गंभीर मामले पर संज्ञान लेंगे, या फिर यह कंटेनर बस्ती यूं ही मजदूरों के लिए जिंदा नर्क बनी रहेगी? क्या इन परिवारों को सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन मिलेगा, या फिर वे यूं ही विकास की भट्टी में झुलसते रहेंगे?
‘तंदूर’ बने कंटेनर
कंटेनरों के भीतर दिन के समय तापमान 45 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच जाता है। लोहे की दीवारें इतनी गर्म हो जाती हैं कि अंदर रहना मुश्किल हो जाता है। वेंटिलेशन और रोशनी के अभाव में दम घुटने जैसी स्थिति बनती है, जिससे मजदूरों और बच्चों पर हीट स्ट्रोक का खतरा हर समय मंडराता रहता है।
बचपन पर संकट
इस बस्ती में रहने वाले दर्जनों बच्चे शिक्षा और पोषण से वंचित हैं। नजदीक में स्कूल या आंगनबाड़ी से उनका कोई जुड़ाव नहीं है। गंदगी, मच्छरों और अस्वास्थ्यकर माहौल के कारण बच्चों में बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है, जिससे उनका भविष्य भी संकट में है।
स्वच्छता की पोल
करीब 100 लोगों के लिए मात्र 8 अस्थायी शौचालय बनाए गए हैं, जो साफ-सफाई के अभाव में उपयोग लायक भी नहीं रहते। नाले के किनारे बसी इस बस्ती में जल निकासी और स्वच्छ पानी की उचित व्यवस्था नहीं है,…
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के विशेष पहल पर माओवाद छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटे पुनर्वासित युवाओं को शासन की विभिन्न योजनाओं का व्यापक लाभ मिल रहा है। इन युवाओं को राशन कार्ड, आधार कार्ड जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज़ तेजी से उपलब्ध कराए जा रहे हैं । इसी तरह प्रशासन द्वारा इन युवाओं को आयुष्मान कार्ड बनाकर लाखों रुपये तक मुफ्त इलाज की सुविधा दी जा रही है ।इन प्रयासों से युवाओं में आत्मविश्वास बढ़ा है और उन्हें आत्मनिर्भर व सम्मानजनक जीवन की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर मिल रहा है ।
दस्तावेजों से लेकर स्वास्थ्य तक पूरा सहयोग
पुनर्वासित युवाओं को सशक्त बनाने के उद्देश्य से उन्हें राशन कार्ड, आधार कार्ड सहित अन्य आवश्यक दस्तावेज सुगमता से उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसी क्रम में बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने के लिए आयुष्मान कार्ड भी बनाए जा रहे हैं, जिससे वे आर्थिक चिंता के बिना इलाज करा सकें।
आयुष्मान योजनाओं से व्यापक स्वास्थ्य सुरक्षा
जिला चिकित्सालय बीजापुर में आयोजित कार्यक्रम में पुनर्वासित युवाओं को आयुष्मान कार्ड प्रदान किए गए। इस कार्ड के माध्यम से विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं के तहत उन्हें बड़ा लाभ मिलेगा— प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना एवं शहीद वीर नारायण सिंह आयुष्मान स्वास्थ्य योजना के अंतर्गत बीपीएल परिवारों को 5 लाख रुपये तक का निशुल्क इलाज एपीएल परिवारों को 50 हजार रुपये तक का इलाज लाभ मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना के अंतर्गत दुर्लभ एवं गंभीर बीमारियों के लिए 25 लाख रुपये तक की मुफ्त चिकित्सा सहायता साथ ही लाभार्थियों को योजनाओं के उपयोग और प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी भी दी गई।
युवाओं में दिखा नया आत्मविश्वास
आयुष्मान कार्ड प्राप्त करने के बाद पुनर्वासित युवाओं में उत्साह और आत्मविश्वास साफ नजर आया। उन्होंने शासन और प्रशासन के इस प्रयास की सराहना करते हुए बेहतर भविष्य की दिशा में आगे बढ़ने की इच्छा जताई।
समावेशी विकास की ओर मजबूत कदम
यह पहल न केवल पुनर्वासित युवाओं को स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान कर रही है, बल्कि उन्हें समाज में सम्मानजनक जीवन जीने के लिए भी प्रेरित कर रही है। प्रशासन का लक्ष्य है कि ऐसे सभी युवाओं को योजनाओं से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जाए।
रायपुर निगम में 69 जमीनों की फाइलें गायब:पूर्व मेयर ढेबर बोले-100 करोड़ से ज्यादा का घोटाला
हुआ, इसकी EOW जांच होनी चाहिए
रायपुर नगर निगम के जोन 10 अमलीडीह ऑफिस से करीब 100 एकड़ जमीन से जुड़ी फाइल गायब हो गई है। निगम कमिश्नर विश्वदीप की बनाई जांच कमेटी की रिपोर्ट से पता चला है कि, सड़क के स्ट्रक्चर का प्रपोजल बिना किसी मंजूरी के भेजा गया। जिसमें कई बातें गलत और गुमराह करने वाली पाई गईं।
इस मामले में कमिश्रर ने 4 अधिकारियों को सस्पेंड किया है। वहीं, पूर्व मेयर एजाज ढेबर ने कहा कि, नगर निगम के इतिहास में इतनी बड़ी लापरवाही का मामला पहली बार हुआ है। इस मामले में 100 करोड़ रुपए से ज्यादा का घोटाला हुआ है। इसकी जांच EOW से होनी चाहिए।
रिपोर्ट में पाया गया कि, जोन-10 के जोन आयुक्त ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर 17 नवंबर 2025 को संयुक्त संचालक, नगर और ग्राम निवेश कार्यालय को प्रस्ताव भेज दिया।
यह प्रस्ताव कमिश्नर की अनुमति और मुख्यालय की जांच के बिना ही भेजा गया, जो नियमों का सीधा उल्लंघन है। नियमों के अनुसार, इस तरह की स्वीकृति का अधिकार केवल आयुक्त को होता है, जिसे जोन स्तर पर नहीं किया गया था।
जमीन और नक्शे में भारी गड़बड़ी
समिति ने 13 अप्रैल 2026 को मौके का निरीक्षण किया। इसमें पाया गया कि प्रस्तावित नक्शे और जमीन की वास्तविक स्थिति में बड़ा अंतर है। कई जगह बने मकान नक्शे में नहीं दिखाए गए।
सड़कों की चौड़ाई और प्लॉट के आकार गलत दर्शाए गए। प्रस्तावित मार्ग संरचना केवल आंशिक रूप से ही सही पाई गई। गूगल इमेज (2019) से भी जांच में यह स्पष्ट हुआ कि कई दावे गलत थे।
अवैध प्लॉटिंग पर नहीं हुई कार्रवाई
जांच में यह भी सामने आया कि, क्षेत्र में लगातार अवैध प्लॉटिंग हो रही थी। इसके बावजूद जोन आयुक्त ने धारा 292 (C) के तहत कोई कार्रवाई नहीं की। बल्कि इसके उलट अवैध प्लॉटिंग वाले क्षेत्र को ही प्रस्ताव में शामिल कर अनुमोदन के लिए भेज दिया गया। जोन कार्यालय से जिस जमीन की नस्ती गुम हुई है, वह अवैध कॉलोनियों में मार्ग बनाने के संबंध में है।
इसी भूखंड में रास्ता बनाने के लिए 2018 में तत्कालीन आयुक्त रजत बंसल ने टीएनसी को पत्र लिखा था। इसमें फिर से संशोधन की कार्रवाई के लिए जोन 10 कार्यालय ने फाइल सीधे टाउन एंड कंट्री प्लानिंग को भेज दी। इस पर टीएनसी ने 2 अप्रैल को अपनी एनओसी जारी कर निगम आयुक्त को भेज दी।
इस पर आयुक्त ने आपत्ति जताई कि, बिना निगम मुख्यालय की जानकारी के फाइल टीएनसी को कैसे भेज दी गई। साथ ही रास्ता बनाने के लिए दर निर्धारण के लिए जोन से नस्ती मंगाई गई, तब जाकर पता चला कि नस्ती गायब है। ऐसे में निगम आयुक्त ने 9 अप्रैल को टीएनसी को पत्र लिखकर इसे निरस्त करने के लिए कहा।
इस पर टीएनसी ने भी 9 अप्रैल को ही बिना सक्षम अधिकारी की स्वीकृति और संज्ञान में फाइल प्रस्तुत किए जाने की बात कहते हुए इसे निरस्त कर दिया। गौरतलब है कि साल 2011-12 में बोरियाखुर्द के निगम में शामिल होने के बाद इस क्षेत्र में अवैध प्लाटिंग हुई। इन्हीं प्लाटिंग क्षेत्रों में रास्ता बनाने के नाम पर यह पूरी प्रक्रिया की गई।
फाइलें गायब, अधिकारियों पर संदेह
सबसे गंभीर बात यह सामने आई कि, इस पूरे मामले से जुड़ी 69 जमीनों की फाइलें जोन कार्यालय से गायब हैं। जिसमें रजिस्ट्री दस्तावेज, पुरानी स्वीकृतियां और अन्य रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं मिले। संबंधित अधिकारियों ने फाइल नहीं मिलने का स्पष्टीकरण दिया, जबकि दस्तावेजों पर उनके हस्ताक्षर मौजूद हैं। समिति ने इसे संदिग्ध माना है।
कूटरचना और षड्यंत्र की आशंका
जांच रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया है कि, पहले गलत प्रस्ताव तैयार किया गया, फिर बिना अनुमति उसे आगे भेजा गया। जब मामला सामने आया, तो फाइलें गायब बता दी गईं। समिति ने इसे कूटरचना, षड्यंत्र और योजनाबद्ध कार्रवाई की आशंका बताई है। जांच समिति के अनुसार यह मामला सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि कानूनी अपराध की श्रेणी में आता है।
पूर्व मेयर ढेबर ने लगाए कई आरोप
इस मामले को लेकर पूर्व मेयर एजाज ढेबर ने वर्तमान परिषद पर आरोप लगाए है कि, अब तक मेयर और MIC सदस्यों का बयान नहीं आया है। इस मामले में देशबंधु संघ रायपुर सचिव डॉ सूर्यकांत शुक्ला, शहवार फातमा और आयशा फिरदौस समेत कई लोग शामिल है।
ढेबर ने आरोप लगाया कि इस मामले में 4 अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया है। लेकिन इसके पीछे जो लोग शामिल थे, उन नेताओं पर कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है। उन्होंने मांग की है कि इस मामले की जांच EOW करवाई जाए।
बिल्डर्स को लाभ पहुंचाने फाइलें की गईं गायब
इस मामले में नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने निगम प्रशासन पर आरोप लगाते हुए कहा कि, नगर निगम के अधिकारी बिल्डर्स और दलालों को लाभ दिलाने के लिए ऐसा किया है। इसमें भाजपा सरकार का भी हाथ है।
निगम के अधिकारी बिना सीमांकन के नाला निर्माण कराते हैं, जगह-जगह अवैध प्लाटिंग का खेल किया जा रहा है। इसके बाद अब 69 जमीनों की नस्ती फाइल ही गुम होने का मामला सामने आता है।
ये पूरी तरह से अधिकारियों की कार्यशैली पर कई सवाल खड़े करता है। उन्होंने इस पूरे प्रकरण की जांच स्वतंत्र कमेटी से कराए जाने और दोषी अधिकारी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
।रायपुर में नगर निगम के जोन 10 अमलीडीह ऑफिस से करीब 100 एकड़ जमीन से जुड़ी अहम फाइल गायब हो गई है। इस गड़बड़ी के पीछे बिल्डरों को फायदा पहुंचाने की आशंका जताई जा रही है। जोन 10 में आने वाले बोरियाकला इलाके के ओम नगर, साईं नगर और बिलाल नगर क्षेत्र से जुड़े 69 भूखंडों की लेआउट फाइल गायब हुई है
रायपुर। आज जनसंपर्क आयुक्त श्री रजत बंसल जी ने नेपाल टूर से लौटकर आए दल के सदस्यों से सौजन्य मुलाकात की। इस दौरान टीम के सदस्यों ने श्री बंसल का रुद्राक्ष एवं पुष्पगुच्छ (बुके) भेंट कर जनसंपर्क कार्यालय, छत्तीसगढ़ संवाद में उनका सम्मान किया। मुलाकात के दौरान श्री शिव शंकर सोनपिपरे, ममता सिंह, विप्लव दत्ता, रमेश अग्रवाल, आशीष काटले, महादेव परिहार, मधुकर पांडे सहित अन्य सदस्यों ने नेपाल में आयोजित कार्यक्रमों एवं अनुभवों को साझा किया। टीम के सदस्यों ने अवगत कराया कि नेपाल में इंडो नेपाल टूरिज्म वेलफेयर सोसाइटी द्वारा आयोजित भव्य सम्मान समारोह में सभी सदस्यों को सम्मानित किया गया। साथ ही दोनों देशों के बीच पर्यटन, सांस्कृतिक आदान-प्रदान एवं आपसी सहयोग को और सशक्त बनाने पर भी चर्चा की गई। इस अवसर पर जनसंपर्क आयुक्त श्री रजत बंसल जी ने टीम के कार्यों की सराहना करते हुए पोर्टल पर विज्ञापन देने का आश्वासन भी दिया। मुलाकात के दौरान अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर भी विचार-विमर्श किया गया तथा भविष्य में ऐसे आयोजनों को और प्रभावी बनाने पर सहमति बनी।
धरसीवां। क्षेत्र में सड़क सुरक्षा और कानून व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से पुलिस द्वारा धरसीवां सहित आसपास के इलाकों में सघन वाहन चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत मोटर व्हीकल एक्ट (एमवी एक्ट) के अंतर्गत सैकड़ों वाहन चालकों पर चालानी कार्रवाई की गई, जिससे क्षेत्र में हड़कंप की स्थिति बन गई। विवाह सीजन के चलते सड़कों पर वाहनों की संख्या बढ़ने के साथ यातायात नियमों की अनदेखी भी सामने आई है।
चेकिंग के दौरान बिना हेलमेट वाहन चलाना, बिना वैध दस्तावेज के वाहन चलाना और नशे में ड्राइविंग जैसे मामलों में पुलिस ने सख्ती बरती। कई वाहन चालक बिना लाइसेंस, बीमा और रजिस्ट्रेशन के पाए गए, जिन पर तत्काल चालान किया गया।
अभियान के दौरान कई लोग चालान से बचने के लिए विभिन्न कारण बताते नजर आए-किसी ने शादी समारोह में जाने की मजबूरी जताई तो किसी ने दस्तावेज घर पर होने की बात कही, लेकिन पुलिस ने किसी भी तरह की लापरवाही को नजरअंदाज नहीं किया और नियमों के तहत कार्रवाई जारी रखी।
20 अप्रैल को खबर लिखते तक धरसीवां थाना क्षेत्र में एमवी एक्ट के तहत 16 प्रकरण दर्ज किए गए, वहीं सिलटारा चौकी में कोटपा एक्ट के तहत 18 प्रकरण बनाए गए। कोटपा एक्ट के अंतर्गत सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान प्रतिबंधित है, 18 वर्ष से कम आयु के व्यक्तियों को तंबाकू बेचना अपराध है तथा शैक्षणिक संस्थानों के 100 गज के दायरे में तंबाकू उत्पादों की बिक्री पर रोक है।
पुलिस द्वारा यह अभियान आगामी 9 मई को आयोजित होने वाली लोक अदालत को ध्यान में रखते हुए भी चलाया जा रहा है, ताकि समरी ट्रायल के माध्यम से मामलों का त्वरित निराकरण किया जा सके। अधिकारियों के अनुसार यह अभियान कुल 15 दिनों तक चलेगा, जिसमें एक सप्ताह पूरा हो चुका है और आगामी दिनों में कार्रवाई और तेज की जाएगी।
पुलिस की इस सख्ती से जहां एक ओर यातायात नियमों के पालन में सुधार देखने को मिल रहा है, वहीं दूसरी ओर कुछ स्थानीय लोगों ने कार्रवाई की निष्पक्षता पर सवाल भी उठाए हैं। नागरिकों का कहना है कि पुलिस को दंडात्मक कार्रवाई के साथ-साथ जनजागरूकता पर भी समान रूप से ध्यान देना चाहिए, ताकि लोग स्वेच्छा से नियमों का पालन करें और सड़क सुरक्षा को स्थायी रूप से मजबूत किया जा सके। वर्जन यह अभियान आगामी 9 मई को होने वाली लोक अदालत को ध्यान में रखते हुए चलाया जा रहा है ताकि समरी ट्रायल के जरिए मामले की त्वरित निराकरण किया जा सके साथ ही साथ जनता को संबंधित विषयों पर जागरूक भी किया जा रहा है और समझाइश भी दी जा रही है । राजेंद्र दीवान थाना प्रभारी धरसीवां
चकरदा (सरसींवा)= सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में कॉमन सर्विस सेंटर व्यवस्था को लेकर एक बेहद गंभीर और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक पारदर्शिता और योजनाओं के संचालन पर सीधे सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्राम पंचायत चकरदा, तहसील सरसींवा निवासी सी एस सी संचालक केदारनाथ साहू ने जिला कलेक्टर को लिखित शिकायत सौंपते हुए सी एस सी जिला प्रबंधक डी एम रवी पर संगठित तरीके से अवैध वसूली और भेदभावपूर्ण कार्रवाई करने के आरोप लगाए हैं। शिकायत के अनुसार, जिले में “महतारी वंदन योजना” जैसे महत्वपूर्ण सरकारी योजना के के वाई सी कार्य को कमाई का जरिया बना दिया गया है। आरोप है कि सी एस सी डी एम की मिलीभगत से कुछ चुनिंदा विएली की आईडी चालू रखी गई है और उन्हीं के माध्यम से आम जनता से ₹50 से ₹100 तक की अवैध वसूली करवाई जा रही है। गरीब और जरूरतमंद लोग, जो सरकारी योजना का लाभ लेने के लिए सी एस सी केंद्रों पर पहुंचते हैं, उनसे खुलेआम पैसे वसूले जा रहे हैं, जबकि शासन द्वारा ऐसी किसी भी प्रकार की फीस निर्धारित नहीं है। सबसे गंभीर आरोप यह है कि शिकायतकर्ता केदारनाथ साहू की सी एस सी आईडी को बिना किसी वैध कारण के अचानक बंद कर दिया गया। उनका कहना है कि यह कार्रवाई जानबूझकर की गई ताकि वे इस अवैध खेल का विरोध न कर सकें। आईडी बंद होने के कारण उनका रोजगार ठप हो गया है और उन्हें आर्थिक संकट के साथ-साथ मानसिक उत्पीड़न का भी सामना करना पड़ रहा है। इस पूरे मामले में “अपने लोगों को फायदा, बाकी को सजा” जैसी स्थिति साफ नजर आ रही है, जहां एक ओर चहेते संचालकों को संरक्षण देकर अवैध वसूली का रास्ता खुला रखा गया है, वहीं दूसरी ओर ईमानदारी से काम करने वालों को सिस्टम से बाहर करने का प्रयास किया जा रहा है। यह न केवल प्रशासनिक तंत्र की निष्पक्षता पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि सरकारी योजनाओं की विश्वसनीयता को भी गहरा आघात पहुंचाता है। केदारनाथ साहू ने कलेक्टर से मांग की है कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए, अवैध वसूली में शामिल लोगों पर सख्त कार्रवाई हो और उनकी सी एस सी आईडी को तत्काल प्रभाव से पुनः चालू किया जाए। अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन इस गंभीर शिकायत को कितनी गंभीरता से लेता है और क्या वाकई इस कथित भ्रष्टाचार के नेटवर्क पर कार्रवाई होती है या मामला भी अन्य शिकायतों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा।
रायपुर ।बाल श्रम के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के तहत उरकुरा क्षेत्र में अवैध रूप से संचालित ईंट भट्ठों पर प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन नाबालिग बच्चों को बाल श्रम से मुक्त कराया है। इस कार्रवाई को स्थानीय प्रशासन और छत्तीसगढ़ बाल अधिकार संरक्षण आयोग की संयुक्त पहल का परिणाम माना जा रहा है, जिसने एक बार फिर बाल अधिकारों की सुरक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता स्पष्ट की है।
जानकारी के अनुसार, प्रशासन को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि उरकुरा क्षेत्र के कुछ ईंट भट्ठों में नाबालिग बच्चों से मजदूरी कराई जा रही है। शिकायतों की पुष्टि होने के बाद संबंधित विभागों की टीम ने योजनाबद्ध तरीके से छापेमारी की। मौके पर पहुंची टीम ने तीन मासूम बच्चों को कठिन परिस्थितियों में काम करते हुए पाया, जिन्हें तत्काल रेस्क्यू कर सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया।
रेस्क्यू किए गए बच्चों को आवश्यक देखभाल और परामर्श उपलब्ध कराया जा रहा है। साथ ही उन्हें पुनर्वास की प्रक्रिया से जोड़ा जा रहा है। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि बच्चों से मजदूरी कराने वाले दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर पूर्णतः रोक लगाई जा सके।
नियमानुसार बाल श्रम न केवल कानूनन अपराध है, बल्कि यह बच्चों के भविष्य के साथ भी गंभीर अन्याय है। प्रत्येक बच्चे को शिक्षा, सुरक्षा और स्वस्थ वातावरण में बढ़ने का अधिकार है, जिसे किसी भी परिस्थिति में छीना नहीं जा सकता।
यह कार्रवाई समाज के लिए एक मजबूत संदेश है कि बाल श्रम के खिलाफ सरकार पूरी तरह सजग और प्रतिबद्ध है। साथ ही आम नागरिकों से भी अपील की गई है कि यदि कहीं बाल श्रम की जानकारी मिले, तो तुरंत संबंधित अधिकारियों को सूचित करें, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके और बच्चों को उनका अधिकार दिलाया जा सके।
रायपुर। रायपुर के सरीखेड़ी क्षेत्र में सोमवार देर रात एक दर्दनाक सड़क हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। अल्ट्राटेक रेडीमिक्स प्लांट के बाहर हुए इस हादसे में लोडर ट्रक की चपेट में आने से दो युवकों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक अन्य युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना के बाद आक्रोशित परिजनों और ग्रामीणों ने मंगलवार को प्लांट के बाहर शव रखकर विरोध प्रदर्शन किया और उचित मुआवजे की मांग की।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, मृतक गोलू यादव और राजू यादव रोज की तरह काम खत्म कर सिब्बल ग्रीन से अपने घर लौट रहे थे। देर रात जब वे सरीखेड़ी के पास पहुंचे, तभी एक तेज रफ्तार लोडर ट्रक ने उनकी बाइक को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि बाइक पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई और दोनों युवक सड़क पर दूर जा गिरे। हादसे में गोलू यादव की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि गंभीर रूप से घायल राजू यादव ने अस्पताल ले जाते समय दम तोड़ दिया। तीसरा युवक घायल अवस्था में उपचाराधीन है।
घटना के बाद इलाके में शोक और आक्रोश का माहौल बन गया। मंगलवार को परिजनों और ग्रामीणों ने अल्ट्राटेक रेडीमिक्स प्लांट के बाहर शव रखकर प्रदर्शन किया और कंपनी पर लापरवाही का आरोप लगाया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि प्लांट के भारी वाहनों की तेज रफ्तार और अनियंत्रित आवाजाही के कारण पहले भी हादसे हो चुके हैं, लेकिन प्रशासन ने इस ओर ध्यान नहीं दिया।
प्रदर्शन को राजनीतिक समर्थन भी मिला, जहां कांग्रेस के स्थानीय नेताओं ने मौके पर पहुंचकर पीड़ित परिवारों के साथ बैठकर न्याय की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने मृतकों के परिजनों को उचित मुआवजा, घायल के इलाज की पूरी जिम्मेदारी और दोषी चालक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और ट्रक चालक की तलाश की जा रही है। प्रशासन द्वारा स्थिति को शांत कराने के प्रयास किए गए ।
छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में हुए वेदांता प्लांट हादसे में कुल 24 मजदूरों की मौत हुई है। हादसे में कुल 36 मजूदर झूलसे थे। 12 घायलों का इलाज अभी जारी है। घटना की शुरूआती जांच में लापरवाही सामने आने के बाद वेदांता के चेयरमैन अनिल अग्रवाल समेत 10 लोगों के खिलाफ डभरा थाने में FIR दर्ज हुई है।
इस कार्रवाई पर उद्योगपति नवीन जिंदल ने सवाल उठाए थे, उन्होंने कहा कि जांच से पहले अनिल अग्रवाल का नाम FIR में शामिल करना गंभीर चिंता का विषय है। पहले घटना की जांच होनी चाहिए।
इस पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने तंज करते हुए कहा कि नवीन जिंदल अनिल अग्रवाल के पक्ष में खड़े हैं। चोर-चोर मौसेरे भाई। बघेल ने आरोप लगाया कि सरकार तो साथ खड़ी है, जिंदल भी खड़े हो गए।
उन्होंने कहा कि मजदूरों के जान की कोई कीमत नहीं। उनको मुआवजा देने से काम चल जाएगा। क्या उन्हें न्याय नहीं मिलना चाहिए। दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होना चाहिए।
14 अप्रैल को हुए हादसे के बाद औद्योगिक सुरक्षा विभाग के बॉयलर इंस्पेक्टर उज्जवल गुप्ता और उनकी टीम ने 15 अप्रैल को घटना स्थल की जांच की। एसपी प्रफुल्ल ठाकुर को सौंपी गई शुरूआती जांच रिपोर्ट में प्लांट प्रबंधन की गंभीर लापरवाही सामने आई थी। जिसके बाद FIR की कार्रवाई की गई।
सिंघीतराई प्रोजेक्ट में NGSL की टीम तैनात है, जिसमें प्रोजेक्ट हेड और साइट इंचार्ज के रूप में राजेश सक्सेना कार्यरत हैं। वे वरिष्ठ महाप्रबंधक स्तर के अधिकारी हैं। वेदांता प्रबंधन और NGSL कॉर्पोरेट ऑफिस के बीच समन्वय की मुख्य कड़ी माने जाते हैं। यूनिट-1 के दैनिक संचालन की जिम्मेदारी भी उन्हीं के पास थी।
इसके अलावा मेंटेनेंस टीम बॉयलर, टरबाइन और अन्य सहायक उपकरणों के रखरखाव के लिए जिम्मेदार थी। ऐसे में ऑपरेशन और मेंटेनेंस से जुड़े सभी अधिकारियों की भूमिका की बारीकी से जांच की जा रही है।
जिले में खनिजों के अवैध उत्खनन, भण्डारण एवं परिवहन पर जिला प्रशासन द्वारा कड़ी निगरानी और कार्रवाई क़ी जा रही है। कलेक्टर कुलदीप शर्मा के कड़े निर्देश पर खनि प्रशासन द्वारा अवैध गतिविधियों पर लगातार कार्यवाही क़ी जा रही है। लगभग डेढ़ माह में खनिजो के अवैध उत्खनन एवं परिवहन के 204 प्रकरणों में 58 लाख रुपए का अर्थदंड प्रस्तावित है।
खनि प्रशासन से प्राप्त जानकारी के अनुसार विगत डेढ़ में खनिज विभाग के द्वारा विशेष अभियान चलाकर विभिन्न खनिजों सहित खनिज अवैध उत्खनन के 141 एवं अवैध परिवहन के 63 प्रकरण खनिज अधिनियम के तहत् पंजीबद्ध किया गया है। इसमें अवैध ईट निर्माण के 138,रेत के 1 एवं मुरूम के 2 प्रकरण शामिल हैं।
खनिज रेत के अवैध परिवहन के 55, खनिज चूनापत्थर के 6, ईट के 2 प्रकरण दर्ज कर खान एवं खनिज (विकास तथ विनियमन) अधिनियम, 1957 की धारा 21 (1) 23 (ख), सहपठित छत्तीसगढ़ गौण खनिज नियम 2015 के नियम 71 एवं छत्तीसगढ़ खनिज (उत्खननन, परिवहन तथा भंडारण) नियम 2009 के नियम 4(3) के प्रावधानो के तहत उक्त प्रकरणों पर 58 लाख रूपये अर्थदंड राशि प्रस्तावित किया गया है।
नकली दवाओं के गंभीर मामले को लेकर शनिवार को NSUI ने रायपुर में प्रदर्शन किया। संगठन के जिला अध्यक्ष शान्तनु झा के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने पुलिस आयुक्त कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा। सिविल लाइन थाना प्रभारी ने ज्ञापन प्राप्त करते हुए मामले में उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया।
NSUI ने मांग की है कि नकली दवा कारोबार से जुड़े आरोपियों को न्यायिक रिमांड पर लेकर पूछताछ की जा रही है, उसी तरह सहायक औषधि नियंत्रक संजय नेताम को भी रिमांड पर लेकर गहन पूछताछ की जाए, ताकि पूरे नेटवर्क का खुलासा हो सके। शान्तनु झा ने मीडिया से चर्चा में कहा कि संजय नेताम का पूर्व कार्यकाल भी विवादों में रहा है और वे अपने प्रभाव के चलते कार्रवाई से बचते रहे हैं। उनका आरोप है कि यदि नेताम से सख्ती से पूछताछ की जाती है, तो पूरे सिंडिकेट का पर्दाफाश हो सकता है।
NSUI ने चेतावनी दी है कि यदि मामले में निष्पक्ष और समान कार्रवाई नहीं की गई, तो संगठन आंदोलन को और तेज करेगा। उन्होंने कहा कि जनता के स्वास्थ्य से जुड़े इस संवेदनशील मामले में किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाना चाहिए।
इस दौरान प्रदेश महासचिव निखिल बघेल, संगठन महामंत्री सूरज साहू, रजत चौधरी, संस्कार पांडे, शत्रुंजय शुक्ला, कपिल, पवन, संजय सहित अन्य कार्यकर्ता मौजूद रहे।
भीषण गर्मी में मेंटेनेंस के नाम पर घंटों बिजली गुल, परेशान हो रहे उपभोक्ता, जनगणना ट्रेनिंग
पर पड़ा प्रभाव
गर्मी शुरू होते ही राजधानी में बिजली व्यवस्था चरमरा गई है। गुरुवार को शहर में कई इलाकों में घंटों बिजली गुल रही। उपभोक्ता परेशान रहे। बिजली बार-बार आ-जा रही थी। जनगणना में भी बाधा पड़ी। मेंटेनेंस के नाम पर घंटों तक बिजली गुल कर दी जा रही है। मेंटेनेंस के नाम पर प्रतिवर्ष करोड़ों खर्च किए जाते हैं। इसके बाद भी उपभोक्ताओं को बिजली की समस्या का सामना करना पड़ता है। उपभोक्ताओं में भारी नाराजगी है। रायपुर परिक्षेत्र-1 व 2 दोनों इलाकों की कई कॉलोनी में 3-4 घंटे सप्लाई बाधित रहती है। रात में भी कई बार बिजली आती-जाती है। इसके अलावा लो-वोल्टेज की समस्या भी कई इलाकों में बनी रहती है।
जनगणना ट्रेनिंग पर पड़ा प्रभाव
15 अप्रैल से रायपुर में जनगणना कर्मचारियों और अधिकारियों की ट्रेनिंग चल रही है। रायपुर के आमापारा स्थित पीएमश्री आरडी तिवारी उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में 15 से 17 अप्रैल तक कर्मचारियों को ट्रेनिंग दी जा रही है। ट्रेनिंग के दौरान कई बार बिजली गुल हुई, जिससे ट्रेनिंग कार्यक्रम प्रभावित रहा। कर्मचारी और ट्रेनर गर्मी से परेशान रहे। हर साल 7 करोड़ खर्च
छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (सीएसपीडीसीएल) हर वर्ष मेंटेनेंस पर 7 करोड़ खर्च कर रही है। फिर भी बिजली सप्लाई बाधित होने की समस्या बनी रहती है। इसमें ट्रांसफार्मर बदलने का खर्च भी शामिल है।
बिजी रहता है शिकायती नंबर 1912
ट्रोल फ्री शिकायती नंबर 1912 पर भी जब भी उपभोक्ता फोन लगाते हैं, तो बिजी होने का संदेश प्राप्त होता है। रात में जब भी 1912 में कोई उपभोक्ता कॉल करता है, तो फोन जल्दी उठता ही नहीं।
साल में दो बार मेंटेनेंस
सीएसपीडीसीएल के अधिकारियों के अनुसार साल में दो बार बिजली मेंटेनेंस का काम किया जाता है। एक बार दीवाली के समय किया जाता है। दूसरी बार मई-जून में। इन महीनों में लोड भी काफी बढ़ जाता है। इससे भी कई जगहों पर फॉल्ट आ जाता है।
मेंटनेंस का काम कुछ इलाकों में चल रहा है। इसलिए कुछ समय बिजली सप्लाई प्रभावित होती है। बिजली सप्लाई सुचारू रूप से संचालित रखने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। महेश कुमार ठाकुर, एसई, रायपुर परिक्षेत्र-2, सीएसपीडीसीएल
बिजली गुल होने से राधास्वामी नगरवासी त्रस्त
रायपुर में नए बस स्टैण्ड भाठागांव के आसपास क्षेत्रों में आए दिन बिजली गुल होने से लोग परेशान हैं। भीषण गर्मी शुरू होने के साथ ही राधास्वामी नगर व आसपास के क्षेत्रों में बिजली गुल कभी भी हो जाती है। कभी कॉलोनी के ट्रांसफार्मर में अत्यधिक लोड होने से लाइट जाती है और बिजली विभाग की मनमानी का आलम यह है कि उनका मेसेज कुछ मिनट पहले ही मोबाइल पर आता है।
अचानक लाइट बंद हो जाने से लोग परेशान हैं। क्योंकि घरों, मोटर पंप बंद हो जाता है। राधास्वामी नगर जनविकास समिति के अध्यक्ष सुरेन्द्र त्रिपाठी ने बताया कि ट्रांसफार्मर से बस स्टैंड मेन रोड पर लगे हाई वोल्टेज लाइट का कनेक्शन किया गया है जिसके कारण यहाँ पर ओवरलोड होने से कालोनी कई बार अंधेरे में डूब जाती है। हमेशा कालोनी में एक फेस नहीं रहता तो कभी लो वोल्टेज की समस्या बनी रहती है। शिकायत करने के बावजूद समस्या का निराकरण नहीं किया जा रहा है।
वेदांता प्लांट हादसा, मजदूर बोले- ओवरलोडिंग-लीकेज से हुआ ब्लास्ट:न सायरन बजा, न एंबुलेंस पहुंची, 2000 लेबर डरकर भागे; अब 50 ही रहे
सक्ती जिले के वेदांता पावर प्लांट में बॉयलर ब्लास्ट में अब तक 20 मजदूरों की मौत हो चुकी है, जबकि 16 का इलाज जारी है। शुरुआती जांच के दौरान मजदूरों-अफसरों बातचीत में यह सामने आया है कि ओवरलोडिंग और पाइप लीकेज से ब्लास्ट हुआ है।
मजदूरों के मुताबिक ब्लास्ट के समय न सायरन बजा और न ही कोई अलर्ट जारी किया गया। हादसे के बाद अफरा-तफरी मच गई और डर के कारण प्लांट के पीछे लेबर क्वार्टर में रहने वाले 2000 से ज्यादा मजदूर घर लौट गए हैं। अब गिनती के करीब 50 मजदूर ही बचे हैं।
ओवरलोडिंग बनी हादसे की बड़ी वजह
हादसे के बाद औद्योगिक सुरक्षा विभाग के बॉयलर इंस्पेक्टर उज्ज्वल गुप्ता की टीम ने बुधवार को 6 घंटे जांच की। शुरुआती जांच में सामने आया कि उत्पादन बढ़ाने के लिए बॉयलर का लोड एक घंटे में तेजी से बढ़ाया गया, जिससे हादसा हुआ।
झारखंड से काम करने आए फिटर इंदर देव राणा ने बताया कि सबसे बड़ी समस्या इंजीनियरिंग स्तर की है। प्लांट को उसकी क्षमता से ज्यादा लोड पर चलाया गया। पहले से ही गर्मी ज्यादा थी, ऐसे में ओवरलोड चलाने की जरूरत नहीं थी।
बंगाल से काम करने आए फिटर सुमित कोले ने बताया कि वे पिछले एक साल से प्लांट में काम कर रहे हैं। धमाके के बाद पूरा इलाका धूल और धुएं से भर गया, लेकिन इसके बावजूद प्लांट के अंदर कोई सायरन नहीं बजा और न ही कोई अलर्ट जारी हुआ। सिर्फ एक तेज धमाका हुआ और देखते ही देखते हादसा हो गया।
उन्होंने बताया कि प्लांट में मौके पर एंबुलेंस तक उपलब्ध नहीं थी। घायलों को बसों में लादकर अस्पताल भेजना पड़ा और हालात बेहद खराब थे।
1 साल पहले टेस्टिंग के दौरान पाइप फटा था, गैस निकली थी…
प्लांट में रिगर का काम करने वाले राम आश्रय सिंह ने बताया कि वे बिहार के गोपालगंज के रहने वाले हैं और ठेकेदार के जरिए यहां काम कर रहे हैं। वे 2024 से इस प्लांट में काम कर रहे हैं। उनके मुताबिक, पिछले साल टेस्टिंग के दौरान एक बार पाइप फटने से गैस लीक हुई थी, लेकिन उस समय कंपनी ने पहले ही सूचना दे दी थी, जिससे कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ। इस बार प्रोडक्शन के दौरान सब कुछ अचानक हुआ।
यह एक हिंदी वेब न्यूज़ पोर्टल है जिसमें ब्रेकिंग न्यूज़ के अलावा, अपराध, राजनीति, प्रशासन, ट्रेंडिंग न्यूज, बॉलीवुड, खेल जगत, लाइफस्टाइल, बिजनेस, सेहत, ब्यूटी, रोजगार तथा टेक्नोलॉजी से संबंधित खबरें पोस्ट की जाती है।