*पलारी–रोहांसी मार्ग पर ‘गड्ढों का राज’, बलौदी गांव में सड़क बेहाल—जनता परेशान, जिम्मेदार बेखबर* बिहान छत्तीसगढ़
कुछ हिस्सों में सड़क कम, गड्ढे ज्यादा! बरसात में पानी से लबालब गड्ढे बने जानलेवा, स्कूली बच्चों और मरीजों की बढ़ी मुसीबत
बलौदाबाजार। पलारी से रोहांसी जाने वाले मार्ग के कुछ हिस्सों में सड़क की हालत ऐसी हो चुकी है कि वहां सड़क कम और गड्ढों का भंडार ज्यादा नजर आता है। बरसात ने रही-सही कसर पूरी कर दी है। गड्ढों में पानी भर चुका है और वाहन चालक अंदाजे से सड़क पार करने को मजबूर हैं। जरा सी चूक हुई नहीं कि वाहन गड्ढे में और जिंदगी खतरे में!
पूरे मार्ग की हालत एक जैसी नहीं है, लेकिन जिन हिस्सों में सड़क बुरी तरह टूट चुकी है, वहां सुधार की सख्त जरूरत है। आमने-सामने वाहन आने पर गड्ढों से बचते हुए निकलना किसी स्टंट से कम नहीं। खासकर बारिश में हालात और गंभीर हो जाते हैं।
बलौदी में पक्की सड़क, फिर भी कीचड़ और गड्ढों का राज
इसी मार्ग पर बलौदी गांव में पक्की सड़क होने के बावजूद कुछ हिस्से गड्ढों और कीचड़ के कब्जे में हैं। बारिश होते ही गड्ढों में पानी भर जाता है और सड़क का वास्तविक चेहरा पानी के नीचे छिप जाता है।
स्कूली बच्चे इसी रास्ते से गुजरते हैं। ग्रामीण इसी रास्ते से आते-जाते हैं। किसी को बाजार जाना है तो इसी रास्ते से, किसी को जरूरी काम है तो इसी रास्ते से और अगर किसी मरीज को अस्पताल ले जाना पड़ जाए तो यही रास्ता परेशानी को कई गुना बढ़ा देता है।
ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है—क्या सड़क की मरम्मत के लिए भी अब किसी हादसे की खबर का इंतजार किया जा रहा है?
अधिकारी-नेता रोज गुजरते हैं, गड्ढे शायद उन्हें सलाम करके रास्ता छोड़ देते हैं
सबसे ज्यादा हैरानी तो इस बात की है कि इसी रास्ते से सरकारी गाड़ियां दौड़ती हैं। अधिकारी-कर्मचारी गुजरते हैं। स्थानीय नेता और जनप्रतिनिधि भी इसी मार्ग का इस्तेमाल करते हैं।
फिर भी सड़क के गड्ढे जस के तस!
आम जनता को गड्ढे दिख रहे हैं, वाहन चालकों को गड्ढे दिख रहे हैं, स्कूली बच्चों को गड्ढे दिख रहे हैं—लेकिन जिम्मेदारों को आखिर क्या दिखाई दे रहा है?
जनता अब तंज कस रही है कि शायद सरकारी वाहनों के पहियों में ऐसी तकनीक लगी है, जिससे उन्हें गड्ढों का झटका महसूस नहीं होता
शासन-प्रशासन अंधा-बहरा या फिर हादसे का इंतजार?
बरसात के मौसम में गड्ढों में पानी भरने से खतरा और बढ़ गया है। रात के समय तो स्थिति और भी खतरनाक हो जाती है। सड़क पर पानी देखकर अंदाजा नहीं लगाया जा सकता कि नीचे कितना गहरा गड्ढा है।
जनता का सवाल है—जब समस्या आंखों के सामने है, तो कार्रवाई क्यों नहीं?
क्या किसी बच्चे के गिरने के बाद सड़क सुधरेगी?
क्या किसी मरीज को अस्पताल पहुंचाने में गंभीर परेशानी होने के बाद जिम्मेदार जागेंगे?
या फिर किसी बड़े हादसे के बाद अधिकारी मौके पर पहुंचकर सिर्फ पंचनामा और आश्वासन देने आएंगे?
जनता की मांग—भाषण नहीं, गड्ढों का सुधार चाहिए
ग्रामीणों की मांग है कि पलारी–रोहांसी मार्ग के जिन हिस्सों में गड्ढों का भंडार बन चुका है, उनका तत्काल निरीक्षण कर स्थायी सुधार कराया जाए। बलौदी गांव में कीचड़, जलभराव और क्षतिग्रस्त हिस्सों की भी मरम्मत हो, ताकि स्कूली बच्चों, मरीजों और आम राहगीरों को राहत मिल सके।
सड़क विकास का आईना होती है, और पलारी–रोहांसी मार्ग के ये गड्ढे फिलहाल व्यवस्था की तस्वीर दिखा रहे हैं।
अब देखना यह है कि जिम्मेदारों की नजर फाइलों से निकलकर सड़क के गड्ढों तक कब पहुंचती है।
क्योंकि जनता को अब आश्वासन नहीं चाहिए—
गड्ढों से राहत चाहिए। सड़क चाहिए। सुरक्षित रास्ता चाहिए।