राजनीति

डीएमएफ भर्ती प्रक्रिया पर विधायक विक्रम मंडावी ने उठाए सवाल

स्वास्थ्य विभाग की भर्ती प्रक्रिया निरस्त कर स्थानीय अभ्यर्थियों को प्राथमिकता देने कलेक्टर को सौंपा पत्र

सदाशिव राना/ बीजापुर 

बीजापुर। स्वास्थ्य विभाग अंतर्गत जिला खनिज न्यास निधि (डीएमएफ) मद से चल रही भर्ती प्रक्रिया को लेकर बीजापुर विधायक विक्रम मंडावी ने सवाल उठाए हैं। विधायक ने कलेक्टर को पत्र सौंपकर भर्ती प्रक्रिया में सामने आई कथित विसंगतियों की जांच करते हुए प्रक्रिया निरस्त करने तथा जिले के स्थानीय अभ्यर्थियों को प्राथमिकता देने की मांग की है।

विधायक ने पत्र में कहा है कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा हॉस्पिटल कंसल्टेंट एवं पब्लिक हेल्थ कंसल्टेंट पदों के लिए अलग-अलग आवेदन मंगाए गए थे, लेकिन दोनों पदों के लिए एक ही कौशल परीक्षा/साक्षात्कार के अंकों को जोड़कर अंतिम वरीयता सूची एवं चयन सह प्रतीक्षा सूची जारी की गई। पत्र के अनुसार, इस प्रक्रिया में कुछ स्थानीय अभ्यर्थी न्यूनतम अंक नहीं ला पाने के आधार पर अपात्र कर दिए गए।

विज्ञापन में न्यूनतम अंक का स्पष्ट उल्लेख नहीं होने का दावा

विधायक ने अपने पत्र में कहा है कि भर्ती विज्ञापन के दिशा-निर्देशों में कौशल परीक्षा/साक्षात्कार में न्यूनतम अंक प्राप्त करने पर ही चयन किए जाने का स्पष्ट उल्लेख नहीं था। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर अभ्यर्थियों के बीच असंतोष की स्थिति बनी है।

पत्र में उल्लेख है कि कुछ स्थानीय अभ्यर्थियों की वांछित योग्यता अन्य अभ्यर्थियों की तुलना में अधिक होने के बावजूद उन्हें पर्याप्त अवसर नहीं मिला। विधायक ने परीक्षा एवं साक्षात्कार की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाते हुए पारदर्शिता के साथ मूल्यांकन कराने की मांग की है।

स्थानीय बेरोजगारों को प्राथमिकता देने की मांग

विधायक ने विज्ञापन के दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि बीजापुर जिले के स्थानीय बेरोजगार अभ्यर्थियों को प्राथमिकता दिए जाने का प्रावधान है। साथ ही, स्थानीय अभ्यर्थी उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में छत्तीसगढ़ के अन्य जिलों के अभ्यर्थियों पर विचार किए जाने का उल्लेख होने की बात कही गई है।

उन्होंने कलेक्टर से मांग की है कि भर्ती प्रक्रिया की समीक्षा कर आवश्यक कार्रवाई की जाए और स्थानीय पात्र अभ्यर्थियों को नियमों के अनुरूप उचित प्राथमिकता सुनिश्चित की जाए।

विधायक ने भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने और अभ्यर्थियों के हित में निष्पक्ष तरीके से पुनर्विचार किए जाने की मांग की है।

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