गुरु पूर्णिमा के अवसर पर चार दिवसीय एडवांस मेडिटेशन प्रोग्राम आयोजित । ध्यान, ज्ञान और आत्मबोध के माध्यम से व्यक्ति अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकते हैं।
न्यूज़ जांजगीर-चांपा । गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर मड़वा कालोनी जांजगीर-चांपा में एडवांस मेडिटेशन प्रोग्राम का आयोजन किया जा रहा हैं । यह प्रोग्राम ज्ञान, ध्यान और मौन का एक अद्भुत संगम होगा जो कि दिनांक 3 से 6 जुलाई , 2025 तक धर्म-कर्म और आध्यात्मिक में रूचि रखने वालों के लिए अनुभवी प्रशिक्षक आर्ट ऑफ लिविंग प्रभात कुमार जी के मार्गदर्शन में किया जा रहा हैं । पवन कुमार अग्रवाल एवं शशिभूषण सोनी से चर्चा करते हुए बताया , जिसे प्रेस को साझा किया गया हैं ।
इस प्रोग्राम की कुछ मुख्य विशेषताएं -:
ध्यान और विश्राम - गहरा ध्यान और विश्राम के माध्यम से शारीरिक और मानसिक हीलिंग होती हैं ।
ऊर्जावान शरीर और प्रसन्न होता हैं मन - प्रोग्राम का मुख्य उद्देश्य शरीर को ऊर्जावान और मन को प्रसन्न बनाना हैं ।
ज्ञान और आत्म-बोध - प्रोग्राम में भाग लेने मात्र से ही ज्ञान और आत्म-बोध के माध्यम से स्वयं का बोध कराया जाएगा ।
प्रोग्राम में शामिल होने से सात्त्विक भोजन का प्रावधान हैं, और इससे जुड़ने वाले व्यक्ति लाभान्वित होते हैं ।
3 से 6 जुलाई 2025 को मड़वा कालोनी, जांजगीर-चांपा में कार्यक्रम आयोजित किया गया हैं, इसके लिए रिपोर्टिंग 2 जुलाई 2025 से शुरू हो जायेग
आर्ट ऑफ लिविंग के मुख्य प्रशिक्षक-प्रभात कुमार जी हैं । इसके लिए रजिस्ट्रेशन फीस रुपया 3500 रुपया निर्धारित किया गया हैं ।
आध्यात्मिक भूख को शांत करने के लिए व्यक्ति को ध्यान की आवश्यकता पड़ती हैं - श्रद्धेय रविशंकर जी उवाच ।
प्रश्नकर्ता - आदरणीय श्रीयुत गुरुदेव, जब मैं आर्ट ऑफ़ लिविंग एडवांस मेडिटेशन प्रोग्राम करता हूं तो मैं खोखला और खाली महसूस करता हूँ । लेकिन एक हफ़्ते बाद फिर से मैं पाता हूँ कि मैं इच्छाओं और परेशानियों से भरा हुआ हूँ। मैं हर समय खोखला और खाली कैसे रह सकता हूं ?
सदगुरु श्री-श्री आध्यात्मिक गुरु रविशंकर जी - यह पूछने जैसा ही हैं कि 'मैं इस जीवन में एक बार कैसे खा सकता हूं और हर दिन खाना न खाऊ ! ' आप जानते हैं यह बहुत उबाऊ काम हैं । हर दिन आपको खाना बनाना और खाना पड़ता हैं । अगर आप आज़ खाते हैं तो कल फिर आपको भूख लगती हैं । अगर आप सुबह खाते हैं, तो शाम को फिर आपको भूख लगती हैं। आप सिर्फ़ एक बार खाकर संतुष्ट नहीं हो सकते क्योंकि शरीर का अपना स्वभाव होता हैं। यही आपके मन के साथ भी हैं। एक बार मनोरंजन करना पर्याप्त नहीं हैं । क्या आप मेरी बात मानेंगे अगर मैं आपसे कहूं कि आपके जीवन में सिर्फ़ एक फ़िल्म देखना ही पर्याप्त हैं ? आपको बार-बार मनोरंजन की ज़रूरत होती हैं । शरीर को बार-बार पोषण की ज़रूरत होती हैं । भूख मिटाने के लिए हम खाना खाते हैं । प्यास बुझाने के लिए हम पानी पीते । थक जाने पर हम आराम करते हैं । इसी तरह अध्यात्म भी ऐसा ही हैं । आध्यात्मिक भूख को संतुष्ट करने के लिए हमें बार-बार ध्यान करने की ज़रूरत पड़ती हैं ।