लोक आस्था के महापर्व छठ पूजा को लेकर मुंगेली में भी रौनक नजर आई।
इमरान खोखर बिहान छत्तीसगढ़
मुंगेेली
आगर नदी के घाट पर पर व्रतियो ने डूबते सूरज को अर्ध दिया, वही कल उगते सूर्य को अर्ध्य देकर अपने व्रत का समापन करेगी। इस दौरान घाट पर बड़ी संख्या मे पूजा करने वालों के साथ साथ प्रसासनिक अमला भी तैनात रहा। मुंगेली पुलिस अधीक्षक भोजराम पटेल एवं जिला पंचायत सीईओ प्रभाकर पाण्डेय ने लोगो को छठ पर्व की बधाई दी.
पर्व की शुरुवात - 25 अक्टुबर से 28 अक्टुबर तक चलने वाले इस पर्व में पहला दिन नहाय-खाय (25 अक्टूबर, शनिवार) छठ पूजा की शुरुआत नहाय-खाय से होती है। इस दिन व्रती महिलाएं प्रातःकाल पवित्र नदी, तालाब या जलाशय में स्नान कर घर आती हैं और घर की साफ-सफाई करती हैं। इसके बाद शुद्धता का ध्यान रखते हुए सात्विक भोजन बनाया जाता है इस दिन आमतौर पर लौकी-भात और चने की दाल का प्रसाद तैयार किया जाता है। व्रती स्वयं यह भोजन ग्रहण करती हैं और इसी के साथ छठ व्रत का शुभारंभ होता है। इस दिन से वे पूर्ण सात्विक जीवनशैली अपनाकर व्रत की तैयारी शुरू करती हैं।
दूसरा दिन कृ खरना (26 अक्टूबर,रविवार) - दूसरे दिन को खरना कहा जाता है। यह दिन अत्यंत तपस्या और श्रद्धा का प्रतीक है। व्रती दिनभर निर्जला उपवास रखती हैं कृ अर्थात् जल तक ग्रहण नहीं करतीं। संध्या के समय व्रती महिलाएं नदी या तालाब से पवित्र जल लाकर पूजा करती हैं। प्रसाद के रूप में गुड़ से बनी खीर, गेहूं की रोटी का भोग तैयार किया जाता है। पूजन के बाद यह प्रसाद परिवार व आस-पड़ोस में बांटा जाता है। इस दिन के बाद व्रती 36 घंटे तक निर्जला व्रत रखती हैं जो प्रातः अर्घ्य के बाद ही समाप्त होता है।
तीसरा दिन संध्या अर्घ्य (27 अक्टूबर, सोमवार) - तीसरे दिन श्रद्धालु महिलाएं और पुरुष व्रती सोलह श्रृंगार कर सूर्यास्त के समय घाटों की ओर प्रस्थान करते हैं। वे सूप में ठेकुआ, फल, गन्ना, सिंघाड़ा, नींबू, नारियल और केले सहित विविध प्रसाद सजाते हैं। सूर्यास्त के समय अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया जाता है और छठी मइया से परिवार की सुख-समृद्धि, संतान की लंबी आयु और कल्याण की कामना की जाती है। घाटों पर दीपों की रोशनी और लोकगीतों से वातावरण भक्तिमय बन जाता है।
चौथा दिन कृ प्रातः अर्घ्य (28 अक्टूबर, मंगलवार) - अंतिम दिन प्रातः अर्घ्य का होता है, जिसे छठ पर्व का सबसे पवित्र क्षण माना जाता है। व्रती महिलाएं तड़के 3 से 4 बजे के बीच उठकर तैयार होती हैं और घाट की ओर जाती हैं। जैसे ही सूर्य उदय होता है, व्रती उगते सूर्य को अर्घ्य अर्पित करती हैं और संतान सुख, परिवार की समृद्धि व स्वास्थ्य की कामना करती हैं। इसके बाद व्रत पारण किया जाता है कृ यानी उपवास समाप्त कर प्रसाद, फल और दलिया ग्रहण किया जाता है।
छठ पूजा का महत्व - छठ पर्व सूर्य उपासना का एकमात्र पर्व है जिसमें सूर्यास्त और सूर्याेदय दोनों समय अर्घ्य दिया जाता है। यह पर्व शुद्धता, अनुशासन, आत्मसंयम और प्रकृति के प्रति आभार का प्रतीक है। मान्यता है कि इस व्रत से संतान सुख प्राप्त होता है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। इन चार दिनों तक व्रती महिलाएं सूर्य देव की उपासना कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करेंगी।
इस दौरान व्रत रखी अनामिका सिंह ने बताया कि भगवान सूर्य की आराधना का यह महापर्व है जिसे बड़ी उत्साह से मनाया जाता है डूबते सूर्य को अर्ग देकर व्रत की शुरुआत की जाती है,, जो प्रातः काल उगते सूर्य को अर्ग देकर समाप्त किया जाता है। इस दौरान हम अपने परिवार की खुशहाली और उन्नति के लिए सूर्य देवता से प्रार्थना करते है.
वही समिति के अध्यक्ष अभिलाष सिंह ने इस पर्व के लिए प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन के सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।