ऐतिहासिक जगन्नाथ मठ मंदिर में गीता जयंती एवं मोक्षदा एकादशी महोत्सव
न्यूज़ जांजगीर-चांपा ।
गीता जयंती सेवा संस्थान समिति , चांपा द्वारा स्मृति शेष राज अग्रवाल की पुण्य-तिथि पर स्थानीय जगन्नाथ मठ मंदिर में गीता जयंती एवं मोक्षदा एकादशी का भव्य समारोह आयोजित किया गया
कार्यक्रम में मुख्य अभ्यागत के रूप में मठाधीश लाल दास महंत जी महाराज उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता मानस मर्मज्ञ एवं भागवत भूषण पंडित दिनेश दुबे ने की । विशिष्ट अतिथि के रूप में पूर्व नपाध्यक्ष चांपा राजेश कुमार अग्रवाल, पंडित कृष्णा द्विवेदी एवं सेवानिवृत्त प्राचार्य पंडित हरिहर प्रसाद तिवारी मंचस्थ थे।
गीता जयंती एवं मोक्षदा एकादशी समारोह का शुभांरभ श्रीमद्भगवद्गीता , श्रीजगन्नाथ स्वामी , दक्षिण मुखी हनुमान जी तथा स्मृति शेष राज अग्रवाल के तैल चित्र पर तिलक-चंदन लगाकर , दीप जलाकर और पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। इसके पश्चात संस्थान के सदस्यों ने बारी-बारी से मंचस्थ विभूतियों का तिलक, कौशेय वस्त्र एवं पुष्प माला से सम्मान किया । जगन्नाथ मठ मंदिर के आचार्य पंडित कृष्ण धर मिश्रा ,ब्रजेद्र गौरहा, डॉ द्विवेदी जी को भी गीता सेवा संस्थान की ओर से कौशेय वस्त्र ,श्रीफल भेंटकर सम्मानित किया गया ।
प्रत्येक हिंदू को प्रतिदिन गीता के 4 श्लोक पढ़ना चाहिए
इस अवसर पर मठाधीश लालदास महंत जी महाराज ने अपने उद्बोधन में कहा कि गीता जयंती एवं मोक्षदा एकादशी का यह पावन आयोजन स्मृति शेष राज अग्रवाल जी की प्रेरणा और उनकी गीता के प्रति आस्था का प्रतीक हैं । उन्होंने गीता के सार एवं कर्मयोग की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए प्रत्येक हिदू को प्रतिदिन श्रीमद्भागवत गीता के 4 श्लोक का पाठ करना चाहिए । गीता कर्म बोध कराती हैं । उन्होंने इसे मानव जीवन को दिशा प्रदान करने वाला ग्रंथ बताते हुए कहा कि सभी धर्मों को त्याग दो,हम उसी के टुकड़े हैं , श्रीकृष्ण जी ने कहा हैं कि मैं तुमको संसार से मुक्त कर दुंगा । कृष्णा द्विवेदी जी ने कहा कि संसार के सभी दर्शनों में श्रीमद्भागवत गीता का स्थान सर्वोपरि हैं।इस पवित्र ग्रंथ का श्लोक हम लोग क्यों याद नहीं करते। गीता भगवान की महिमा महिम मूर्ति हैं । मुख्य वक्ता भागवताचार्य श्रद्धेय दिनेश कुमार दुबे ने मोक्षदा एकादशी के महत्व को रेखांकित करते हुए इसे आत्मिक शुद्धि , आत्मीक शांति और मोक्ष प्राप्ति का माध्यम बताया । उन्होंने कहा कि महाकवि मिल्टन नामक एक व्यक्ति ने अपनी तमाम काव्य शक्तियां ईश्वर को अर्पण कर दिया था। ईश्वर का एक अंग मानकर ईश्वरीय प्रेरणा से गीता का पाठ करना चाहिए। उन्होंने स्मृति शेष राज अग्रवाल जी के धार्मिक और सामाजिक योगदान को नमन करते हुए कहा कि यह आयोजन उनकी स्मृति को चिरस्थायी बनाए रखता हैं ।
राज अग्रवाल के पुण्य कार्यों और मोक्ष गति को स्मरण किया गया
वयोवृद्ध. हरिहर प्रसाद तिवारी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए राज अग्रवाल जी के पुण्य कार्यों और मोक्ष गति को स्मरण किया । उन्होंने गीता और मोक्षदा एकादशी की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि गीता न केवल धर्म का प्रतीक हैं , बल्कि जीवन में सद्गुणों और नैतिकता का पालन करने का मार्गदर्शक भी हैं । उन्होंने यह भी कहा कि जो व्यक्ति गीता को समझ लेता हैं वह समय के महत्व को समझ लेता हैं । राजेश अग्रवाल ने कहा कि गीता सब ग्रंथों का सार हैं ।
गीता एक समझ हैं जो किसी व्यक्ति के जीवन में समझदारी लाती हैं
साहित्यकार शशिभूषण सोनी ने सारगर्भित उद्बोधन में गीता को सर्वशास्त्रमयी बताया। रजनीश अग्रवाल ने गीता को अपने आप में जीवन जीने की शैली करार दिया। उन्होंने कहा कि गीता एक समझ हैं जो हर व्यक्ति में समझदारी लाती हैं। मेरे पिता विभिन्न दिक्कतों का सामना करते हुए व्यापार करते रहे और आप लोगों के संगत से धार्मिक कार्यों से जुड़े। मेरे पिता जीवनपर्यंत संघर्ष करते रहे और गीता जयंती के दिन इसी जगन्नाथ मंदिर में देह त्याग कर दी । पंडित रामकिशोर शुक्ला ने गीता को सारे ग्रंथों के ज्ञान का खजाना कहा । पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष तथा समिति के अध्यक्ष राजेश अग्रवाल , रजनीश अग्रवाल, प्रधान सचिव रामकिशोर शुक्ला, शशिभूषण सोनी व डॉ रविन्द्र द्विवेदी ने स्मृति शेष राज अग्रवाल जी को नमन करते हुए गीता जयंती एवं मोक्षदा एकादशी पर विचार व्यक्त किये साथ ही गीता की महिमा एवं मोक्षदा एकादशी व्रत के महात्म्य पर सारगर्भित उद्बोधन दिया गया ।
श्रीमद भागवत गीता पुस्तक की प्रतियां भेट की गई
इस अवसर पर पार्षद नागेन्द्र गुप्ता द्वारा प्रदत्त श्रीमद्भ भागवद्गीता पुस्तक की प्रतियां श्रद्धालुओं के बीच वितरित की गईं ।
समारोह के अंत में रजनीश अग्रवाल परिवार की ओर से सभी उपस्थित श्रद्धालुओं को काजू-किशमिश के पैकेट, बूंदी मिठाई एवं स्वल्पाहार का पैकेट वितरित किया गया । कार्यक्रम का कुशल संचालन डॉ. रविंद्र द्विवेदी ने किया एवं आभार प्रदर्शन अनिल कुमार सोनी ने किया । इस अवसर पर कीर्ति शेष राज अग्रवाल की सहधर्मिणी श्रीमति पुष्पा अग्रवाल, पं. विनोद मिश्रा, प्रशांत तिवारी, चन्द्रशेखर तिवारी, शिवराम , कन्हैया, लक्ष्मीनारायण सोनी , पं बृजेन्द्र गौराहा , सुश्री अमिता श्रीवास, सी .ए .सुनील सोनी,संतोष सोनी, कृष्ण गोपाल, देवी प्रसाद सोनी, सत्यनारायण , जगदीश प्रसाद सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे ।