संस्कृति

धार्मिक आयोजन ! श्रीमद्भागवत कथा का पंचम दिन

जड़-भरत चरित्र, ध्रुव , प्रह्लाद चरित्र, नरसिंह अवतार सहित जीवन से जुड़ें हुए विभिन्न विषयों पर पंडित नारायण महराज ने आध्यात्मिक प्रवचन दिया और बोले :-

श्रीमद्भागवत कथा , जीवन के लिए हैं सीख  

न्यूज़ जांजगीर-चांपा । श्रीमद्भागवत कथा एक प्राचीन और पवित्र  ग्रंथ हैं , जो भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं तथा उनके भक्तों की कथाओं का वर्णन करता हैं । यह आनंदमई कथा जीवन के लिए कई महत्वपूर्ण सीख प्रदान करती हैं जैसें कि जीवन में कैसे भी घर में रहते हुए कैसे भी स्थिति बन जाए, माता-पिता, भाई-बहन या फिर किसी के प्रति भी कैसी भी वैमनस्यता हो जाएं बातचीत बंद नहीं करनी चाहिए ।  बातें करने से ही कोई न कोई पहल आयेगी । मौनी मत बनिए,यह हमें श्रीमद्भागवत कथा सिखाती हैं - पं नारायण महराज ।

श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन आध्यात्मिक ज्ञान

मारुति विहार कालोनी, शासकीय बिसाहू दास महंत चिकित्सालय के पीछे कंचन की नगरी ,चांपा में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन छत्तीसगढ़ के गौरव, माटी पुत्र और राष्ट्रीय कथा वाचक पूज्य श्री नारायण महराज ने जीवन से जुड़े हुए विभिन्न विषयों पर आध्यात्मिक प्रवचन दिया । उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा हमें आध्यात्मिक ज्ञान प्रदान करती हैं और हमें जीवन के उद्देश्यों को समझने में मदद करती हैं । यह कथा हमें बताती हैं कि भगवान की भक्ति ही जीवन का सच्चा उद्देश्य हैं । मीडिया जगत से जुड़ें हुए शशिभूषण सोनी ने बताया कि मात्र 6 वर्ष की उम्र अर्थात् बाल्यावस्था से ही नारायण जी अपने पिताश्री के सानिध्य में एवं भारत-वर्ष के शंकराचार्य वृन्दावन के साधु-संतों के आशीर्वाद से राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान एनआईटी के इंजीनियरिंग के छात्र रहे हैं । छत्तीसगढ़ के ऐसे गौरवशाली विभूति श्रद्धेय नारायण महाराज,श्रीराधे निकुंज धाम शिक्षक एवं जन कल्याण संस्थान ,जजगिरी भिलाई- 3  छत्तीसगढ़ के निवासी हैं और कंचन की नगरी, चांपा में कथा रसपान करवा रहे हैं । मात्र 9 वर्ष उम्र से भारतवर्ष के अनेक राज्यों में जैसे उत्तर प्रदेश ,मध्यप्रदेश ,झारखंड उड़ीसा ,महाराष्ट्र में सनातन धर्म का प्रचार कथा के माध्यम से निरंतर कर रहे हैं । इनके रोहिणी गोधाम में 8 वर्षों से आश्रम संचालित है।पूज्य महाराज जी का कथा के साथ-साथ एक ही उद्देश्य हैं गौं माता की सेवा और संरक्षण हो । 

कथा का मुख्य विषय

कथा का मुख्य विषय यह हैं कि प्रातःकाल उठकर अपने माता-पिता,बहन, श्रेष्ठ गुरुजन और ईश्वर को प्रणाम करना चाहिए । आजकल के समय क्या यह संभव हैं ?  भागवताचार्य पं नारायण महराज ने कहा कि अपने दोनों हाथ उठाकर बताओं कि सुबह उठकर कितने लोग अपने माता-पिता का प्रणाम करते हो । परिवार की बगिया में दादा-दादी, माता-पिता, भाई-बहन, बेटे-बेटियां और पोते-पोती सब रहते हैं । उन्होंने कथा के दौरान आह्वान किया कि माता-पिता चलते-फिरते तीर्थ हैं । प्रणाम कर अपने माता-पिता को बुढापे में आदर दे ।

श्रीमद्भागवत कथा के आयोजक !


सप्त-दिवसीय संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ सप्ताह महोत्सव महापुराण की शुरुआत बुधवार दिनांक 12 नवंबर को कलशयात्रा, वेद पूजन,भागवत कथा महात्म्य और शुकदेव जन्म कथा से शुरु हुई । आयोजक रामबिलास देवांगन श्रीमति अमृता देवांगन ने कथा के आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई । कथा श्रवण करने वालों में मुख्यतः मेकरुराम,गोपाल प्रसाद,अमित, रामगोपाल, राम खिलावन , देवेंद्र, जीतेंद्र, सुरेंद्र,शिवकुमार-चद्रकली देवांगन,अशोक, नंदकुमार देवांगन- संतोष कुमार देवांगन, संजय, मोहनलाल अग्रवाल, सुनील कुमार अग्रवाल, शशिभूषण सोनी सहित देवांगन परिवार के सदस्य बड़ी संख्या में मौजूद थे ।

कथा का आज पंचम दिवस ! 

कथा के आज पंचम दिन रविवार को भगवान श्रीकृष्ण जन्मोंत्सव ,बाल लीला,माखन चोरी, गोवर्धन लीला और छप्पन भोग कथा से छत्तीसगढ़ के गौरव,माटी पुत्र और राष्ट्रीय कथा वाचक पूज्य नारायण महाराज, श्रीराधा निकुंज अपनी ओजस्वी वाणी से सराबोर करेंगें |

Leave Your Comment

Click to reload image