संस्कृति

अहंकार इंसान का विवेक और सम्मान छीन लेता है, शंकराचार्य आश्रम में हुआ प्रवचन

रायपुर

श्री शंकराचार्य आश्रम बोरियाकला में चल रही चातुर्मास प्रवचन माला में सती मोह प्रसंग की कथा सुनाई गई। आश्रम के प्रभारी डॉ. स्वामी इन्दुभवानंद तीर्थ महाराज ने कहा कि अनादर का कष्ट मृत्यु से भी बढ़कर होता है। उन्होंने बताया कि भगवान शिव ने माता सती को समझाते हुए कहा कि बिना बुलाए किसी के घर जाना सम्मान को ठेस पहुंचा सकता है।

स्वामी जी ने बताया कि माता सती के पिता दक्ष ने यज्ञ का आयोजन किया था। इसमें ब्रह्मा, विष्णु, महेश सहित देवताओं और ऋषियों को बुलाया गया, लेकिन भगवान शिव को आमंत्रित नहीं किया गया। भगवान शिव ने माता सती से कहा कि बिना बुलाए किसी के घर जाना उचित नहीं है। इससे व्यक्ति को अपमान और दुख का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि मनुष्य शत्रु के बाण से घायल होकर जितना दुखी नहीं होता, उससे कहीं अधिक पीड़ा उसे अपने ही लोगों की निंदा से होती है। उन्होंने बताया कि विद्या, तप, धन, सुंदर शरीर, युवावस्था और ऊंचा कुल अच्छे लोगों के गुण होते हैं, लेकिन अहंकार होने पर यही चीजें अवगुण बन जाती हैं। व्यक्ति सम्मानित और योग्य लोगों का अपमान करने लगता है।

स्वामी इन्दुभवानंद तीर्थ ने कहा कि राजा दक्ष को ऊंचा पद मिलने के बाद अहंकार हो गया था। इसी कारण उन्होंने भगवान शिव का अपमान करने के लिए यज्ञ का आयोजन किया। भगवान शिव ने इसी कारण माता सती को उस यज्ञ में नहीं जाने की सलाह दी। कथा से संदेश दिया गया कि जीवन में सम्मान, विनम्रता और अच्छे व्यवहार को हमेशा महत्व देना चाहिए। कथा से पहले शिव भक्तों ने भगवान शिव और शिव पुराण पोथी का पूजन किया। जगत गुरुकुलम् के छात्रों ने वेद मंत्रों का पाठ किया।

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