संस्कृति

श्रीराम ग्रुप द्वारा आयोजित धार्मिक यात्रा ! छत्तीसगढ़ स्वर्णकार समाज का सप्त-दिवसीय तीर्थ यात्रा को गांधी भवन से हरी झंडी दिखाकर किया गया रवाना ।

न्यूज़ जांजगीर-चांपा  

भारतवर्ष की प्राचीन परंपरा हैं , धार्मिक तीर्थयात्रा !  तीर्थ यात्रा करने से मनुष्य को धर्म और पुण्य का लाभ प्राप्त होता हैं, आत्मा को शुद्धि और मोक्ष की प्राप्ति होती हैं । इसी भावना को बढ़ावा देने के उद्देश्य से श्रीराम ग्रुप द्वारा छत्तीसगढ़ स्वर्णकार समाज सर्किल, चांपा के संयुक्त तत्वावधान में सप्त-दिवसीय धार्मिक तीर्थ यात्रा का आयोजन गांधी भवन चांपा से रवाना कर किया गया ।  तीर्थ यात्रा की रवानगी छत्तीसगढ़ स्वर्णकार समाज के केंद्राध्यक्ष जयदेव सोनी, संरक्षक रमेश, अनिल, सर्किल अध्यक्ष राजकुमार,युवा अध्यक्ष अनिल, महिला अध्यक्ष श्रीमति रजनी तथा मीडिया प्रभारी शशिभूषण सोनी ने गांधी भवन, चांपा से हरी झंडी दिखाकर लग्जरी बस क्रमांक CG O7CX 2005 को रवाना किया । यह यात्रा  दिनांक 25 अक्टूबर 2025 से  दिनांक 30 अक्टूबर 2025 तक चलेगी। इस यात्रा के तहत लगभग 50 यात्रियों को चित्रकूट, बनारस, अयोध्या, प्रयागराज और विंध्यवासिनी जैसें प्रमुख धार्मिक-सांस्कृतिक स्थलों को कवर करेगी।

धार्मिक यात्रा में जाने वाले तीर्थ यात्रियों में प्रमुख ।

सिद्धनाथ सोनी ,रजनी सोनी चांपा, ममता सोनी ,उषा सोनी शिवरीनारायण, सावित्री-स्व. वेशचंद सोनी ,सावित्री-स्व जीवन लाल सोनी शिवरीनारायण, रमा, राहौद ,सुशीला बोधी राम सोनी राहौद ,रामेश्वर सोनी ,गोमती सोनी चांपा,गंगा सोनी, हरनारायण सोनी हरदीबाजार, विनोद सोनी, प्रीति सोनी ,खुशी सोनी ,हर्ष सोनी,लता सोनी, चांपा, बसंत सोनी,  गौरी सोनी बिलासपुर ,सावित्री स्व.सोन साव फरसवानी , प्रतिभा सोनी , शिवरीनारायण ,नीलेश्वर सोनी दीपका, उर्मिला सोनी शिवरीनारायण , सुमित्रा सोनी कोटमी, कौशिल्या सोनी खरौद , कौशिल्या सोनी बलौदा ,अंजली सोनी खरौद ,संजना सोनी खरौद ,किशोरी सोनी फरसवानी ,पंच कुमारी सोनी  खरौद ,युगल किशोर सोनी  खरौद , गायत्री सोनी, रश्मि सोनी, मुकेश सोनी कोटमी ,संतोषी सोनी ,सुनील सोनी ,समर्थ सोनी, कीर्ति सोनी, प्रांजली सोनी ,ज्योति सोनी, श्रीमति वंदना पाण्डेय, कृष्ण कुमार पाण्डेय , पचोरी मुड़पार,अमित राठौर , मनी देवी सोनी , सीता देवी सोनी चांपा ,सुनील सोनी कोटमी, शारदा सोनी ,अमर सोनी कोटमी सोनार हैं।


यात्रा के मुख्य आकर्षण स्थल।


चित्रकूट- भगवान श्रीरामचन्द्र जी की तपस्थली 

बनारस- भगवान शंकर की महिमा से मण्डित बनारस ( काशी)  को विश्व का प्राचीनतम नगर होने का गौरव प्राप्त हैं।यहा पर शक्तिपीठ है और ज्योतिलिंग भी हैं। वरुणा और अस्सी नदी के बीच होने के कारण इसका नाम वाराणसी के नाम से प्रसिद्ध हुआ। इसके पास ही सारनाथ स्थित हैं जहां भगवान बुद्ध ने प्रथम उपदेश दिया था।आदि शंकराचार्य ने अपनी धार्मिक दिग्विजय यात्रा यही से आरंभ किया। काशी विश्वनाथ मंदिर दर्शनीय हैं । मणिकर्णिका घाट, दशाश्वमेध,केदार और हनुमान घाट आदि यहां के प्रमुख घाट हैं ।

अयोध्या -  भारतवर्ष की सांस्कृतिक पुरियों में अयोध्या का नाम सबसे प्रथम हैं। यह भगवान श्रीरामचन्द्र जी की जन्मभूमि और राजधानी रही हैं। अयोध्या सरयू नदी के तट पर स्थित हैं। यहां के प्राचीन मंदिर को तुड़वाकर बाबर ने मस्जिद बनवा दी थी किन्तु अब यहां पर भगवान श्रीराम जन्मभूमि में दिव्य मंदिर सुशोभित हैं।इस स्थान पर कई मंदिर दर्शनीय हैं - कनक भवन, सीता रसोई, चौबिस अवतार,कोप भवन, रत्न सिंहासन,आनंद भवन, और साक्षी गोपाल इत्यादि मंदिर हैं ।

प्रयागराज- त्रिवेणी संगम तट पर स्थित प्रयागराज पवित्र स्थान हैं। जिसे समुद्र मंथन के बाद कुंभ कलश से अमृत सुधा रस की कुछ बूंदें सर्वप्रथम प्राप्त हुई थी। गंगा, यमुना और सरस्वती के त्रिवेणी संगम पर स्नान करने का विशेष महत्व और फल माना जाता हैं।अपनी परम पवित्रता के कारण इस स्थल पर बारह वर्ष में महाकुंभ मेला लगता हैं। इस तीर्थस्थल पर बड़े-बड़े साधु-संतों का सम्मेलन और यज्ञ आदि होते हैं ।

विंध्यवासिनी-  देवी विंध्यवासिनी का दिव्य मंदिर देखने लायक है।

कार्यक्रम विवरण ।

तिथि- दिनांक 24 अक्टूबर 2025, 2025

समय-  दोपहर 2:00 बजें रवानगी 

स्थान- गांधी भवन, परशुराम मार्ग, चांपा 

आप सभी को इस धार्मिक-सांस्कृतिक यात्रा में शामिल होने और स्वर्णकार समाज के साथ इस पवित्र अनुष्ठान यात्रा का हिस्सा बनने के लिए पधारने वालों में मुख्यतः हेमंत सराफ, संतोष सोनी, मधूसुदन शशिभूषण विनोद, अनिल, रमेश, राम वल्लभ, महावीर प्रसाद, दिलीप सोनी, रघुनंदन, अजय, अनिल, दीपक, पवन, शिवराम, सुरेश, रमेश,सत्या, श्रद्धा ममता पाण्डेय, जितेंद्र पाण्डेय, सरिता सोनी, ममता, हेमा, ज्योति आदि शामिल हुए ।

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