संस्कृति

शारदीय नवरात्रि पर्व सप्तमी तिथि पर मां कालरात्रि की उपासना - डॉ रविंद्र द्विवेदी भक्ति,शक्ति,सिद्धि,बुद्धि,समृद्धि का पर्व- नवरात्रि

शारदीय नवरात्रि महापर्व हिन्दू धर्म का एक महत्वपूर्ण त्योहार है जो मां दुर्गा की आराधना के लिए आयोजित किया जाता है। इस पर्व को भारतीय संस्कृति में बहुत उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। नवरात्रि महापर्व में मां दुर्गा की आराधना की जाती है, जो सृष्टि की उत्पत्ति की शक्ति को प्रतिष्ठित करती हैं। इस अवसर पर भक्त उनकी पूजा और उपासना करके उनकी कृपा और आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।नवरात्रि में नौ विभिन्न देवियों की पूजा की जाती है, जिन्हें नवदुर्गा कहा जाता है। हर दिन एक विशेष देवी की पूजा करने से भक्त उनकी कृपा और आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।


शारदीय नवरात्रि में सप्तमी तिथि को मां कालरात्रि की पूजा होती है इस दिन मां का मन बहुत प्रसन्न मुद्रा में रहता है इस दिन मां कालरात्रि मनोवांछित फल देने के लिए पूरी तरह तत्पर रहती है। इन्हें देवी पार्वती के समतुल्य माना गया है तथा कालरात्रि को महायोगिनी महायोगेश्वरी भी कहा गया है।सप्तमी तिथि पर मां काली की पूजा करने से व्यक्ति को शक्ति और सौभाग्य प्राप्त होता है। मां काली का रूप उस शक्ति को प्रतिष्ठित करता है जो संसार में संतुलन और न्याय बनाए रखता है।
सप्तमी तिथि को मां काली की पूजा करने से भक्त को दैवीय शक्तियों की कृपा प्राप्त होती है और वे संसार में उत्तम संतुष्टि और समृद्धि को प्राप्त कर सकते हैं। यह दिन मां काली की कृपा को प्राप्त करने के लिए एक अच्छा अवसर है और उनकी उपासना से अध्यात्मिक उन्नति होती हैं।


नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती का पाठ करना बहुत ही महत्वपूर्ण और शुभ माना जाता है। इसके पीछे कई धार्मिक और आध्यात्मिक कारण हैं, जो इस पाठ को विशेष बनाते हैं।


​दुर्गा सप्तशती एक प्राचीन हिंदू ग्रंथ है, जिसमें 700 श्लोक हैं। यह ग्रंथ देवी महात्म्य का वर्णन करता है, जिसमें बताया गया है कि देवी दुर्गा ने कैसे विभिन्न असुरों (जैसे मधु-कैटभ, महिषासुर और शुंभ-निशुंभ) का वध करके धर्म की रक्षा की।
​नवरात्रि में पाठ का महत्व
​देवी की स्तुति और कृपा प्राप्ति:
​दुर्गा सप्तशती में देवी दुर्गा के विभिन्न रूपों और उनकी शक्तियों का वर्णन किया गया है।
​इस ग्रंथ का पाठ करके भक्त देवी की स्तुति करते हैं और उनकी कृपा प्राप्त करते हैं। यह पाठ देवी को प्रसन्न करने का सबसे प्रभावी तरीका माना जाता है।
​जिस प्रकार देवी दुर्गा ने असुरों का संहार किया, उसी तरह इस पाठ को करने से जीवन की सभी नकारात्मक शक्तियाँ, बाधाएँ और भय दूर होते हैं।
​यह पाठ बुरी शक्तियों, बुरी नजर और जादू-टोना के प्रभाव से भी बचाता है। ​दुर्गा सप्तशती का पाठ करने से व्यक्ति के भीतर आध्यात्मिक शक्ति और आत्म-विश्वास बढ़ता है।
​संभव हो तो, पूरे नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती का पाठ करना चाहिए यह न केवल एक धार्मिक अनुष्ठान है, बल्कि यह एक ऐसी प्रक्रिया है जो भक्तों को आध्यात्मिक रूप से सशक्त बनाती है और उनके जीवन से सभी प्रकार की बाधाओं को दूर करती है।
इस नवरात्रि पवित्र पर्व पर मां दुर्गा की कृपा आप पर सदैव बनी रहे और आपके जीवन में सुख, समृद्धि और सफलता लाए। नवरात्रि के इस पावन पर्व में आपके लिए खुशियों की बौछार हो, और आपकी मनोकामनाएं पूरी हों। आपके परिवार और समाज में सुख-शांति बनी रहे, और आपका जीवन हमेशा प्रकाशमय हो।
या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता।
 नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
शारदीय नवरात्रि की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं।
डॉ रविंद्र द्विवेदी 
शिक्षक एवं साहित्यकार 
चांपा जांजगीर-चांपा छग

Leave Your Comment

Click to reload image