संस्कृति

धर्म और आध्यात्म ! भक्त गण श्रीमद्भागवत के भक्तिमय वातावरण में झूमते रहे।

खडवालिया परिवार के द्वारा श्रीमद्भागवत कथा महापुराण का धार्मिक आयोजन , जिसमें श्रद्धालु भक्त अमृत रस का श्रवण कर रहे हैं ।

न्यूज़  जांजगीर-चांपा

श्रीमद्भागवत कथा महात्म्य से श्रद्धालु-जनों को आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त होता हैं और वे अपने जीवन को सकरात्मक दिशा में आगे बढ़ा सकते हैं । श्रीमद्भागवत कथा से ही भक्ति और श्रद्धा बढ़ती है और वे भगवान श्रीकृष्ण की महिमा को समझने में सक्षम होते हैं , उक्त उद्गार अमृतमय रस का रसास्वादन करवा रहे भागवताचार्य पीठाधीश्वर आचार्य देशमुख वशिष्ठ जी महाराज ने  खडवालिया परिवार, नैला-जांजगीर चांपा, कोरबा,दर्री, जमनीपाली, पथलगांव और रायगढ़ के द्वारा श्रद्धालु-जनों को रसपान कराते हुए कहा। श्रीमद्भागवत कथा महात्म्य का आयोजन अमरताल स्थित आनंदनधाम परिसर में बड़े पंडाल में किया जा रहा हैं । श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन दिनांक 27 अगस्त, 2025 को कथा महात्म्य श्रवण कराते हुए कहा कि महर्षि वेदव्यास द्वारा रचित ग्रंथ श्रीमद्भागवत में समस्त वेद-पुराणों का सार हैं और जीवन का व्यवहार भी हैं । श्रीमद्भागवत महापुराण 18 पुराणों में से एक हैं । इसमें 12 खंड, 335 अध्याय और 18000 श्लोक हैं । इस ग्रंथ के नायक भगवान श्रीकृष्ण हैं  और इसमें उनकी महिमा और लीलाओं का वर्णन किया गया हैं।

भादो मास में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन और उमड़ती भीड़-भाड़ ।

भादो मास में पितृमोक्षार्थ  श्रीमद्भागवत पुराण का आयोजन समग्र दृष्टि से कथा विवेचन करते हुए सहारनपुर से पधारे भागवत पीठाधीश्वर आचार्य देशमुख वशिष्ठ जी महाराज जी के मुखारविंद से आनंदनधाम ,अमरताल में श्रीमद्भागवत कथा का दिव्य आयोजन किया जा रहा हैं । इस अवसर पर  शामिल होने जिला शिक्षा अधिकारी सक्ति डॉ श्रीमति कुमुदिनी द्विवेदी, डॉ रविन्द्र द्विवेदी तथा साहित्यकार शशिभूषण सोनी ने कथा स्थल पहुंचकर श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण किया व भागवत पीठाधीश्वर आचार्य श्रीदेशमुख वशिष्ठ जी महाराज से आशीर्वाद लिया । समिति के सदस्य संजय अग्रवाल,  आशीष कुमार अग्रवाल , राजेश कुमार अग्रवाल जी ने डा द्विवेदी दंपत्ति और शशिभूषण सोनी को अंग वस्त्र पहनाकर स्वागत-सत्कार किया ।

श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन और श्रवण करने श्रद्धालु-जन । 

श्रीमद्भागवत कथा के गुढ रहस्यों का प्रतिपादन करते हुए पंडित देशमुख जी महाराज ने कहा कि भगवान भक्तों का दुःख दूर करने के लिए कभी ब्रम्हा, कभी विष्णु तो कभी शिवजी का रुप धारण करते हैं । उन्होंने भक्त प्रह्लाद की कथा के माध्यम से कहा कि भगवान नृसिंह खंभे से प्रकट हुए और हरिण्याकश्यप का वध करके उसके शरीर को बहुत दूर फेंक खड़े हो जाते हैं और जोर-जोर से गर्जना करते हैं और पिता को सद्गति प्रदान करते हैं । यह दृश्य देखकर भक्त प्रह्लाद की आंखों से आंसू की धारा प्रवाहित होने लगती हैं । कथा महात्म्य का रसपान करने बड़ी संख्या में श्रद्धालु भक्त शामिल हुए ।

Leave Your Comment

Click to reload image