गंदे आचरण करने वाले को सही उपदेश दो तो उन्हें बुरा लगेगा: प्रेमानंद महाराज
प्रेमानंद महाराज के सत्संग और प्रवचन आध्यात्मिक गहराई के लिए प्रसिद्ध हैं। वह भक्तों के सवालों का सरलता से जवाब देते हैं। प्रेमानंद महाराज ने 'माया' के बारे में अपने भक्तों को बहुत ही साधारण तरीके समझाया है।
वृंदावन के प्रमुख हिंदू संत और आध्यात्मिक गुरु प्रेमानंद महाराज के सत्संग के वीडियो जमकर वायरल होते हैं। एक वीडियो में प्रेमानंद महाराज कहते हैं कि भारत की जनसंख्या 1 अरब 40 करोड़ के आसपास है। अब उनमें से ऐसे कितने लोग हैं, जो अध्यात्म में चलते हैं। चलने वालों में ऐसे कितने हैं, जो सही चल पाते हैं। सही चलने वालों में ऐसे कितने हैं, जो पहुंच पाते हैं। ये बहुत कठिन भगवान की माया का चरित्र रचा हुआ है। हम इसी में राजी हैं।
प्रेमानंद महाराज ने कहा कि जैसे नाली का कीड़ा, नाली में ही सुख का अनुभव करता है। कीड़े को अमृतकुंड में डाले तो उसे पसंद नहीं आएगा। ऐसे जो गंदे आचरण कर रहे हैं न, उनको सही बात उपदेश करो तो उन्हें बुरा लगेगा। उनको अच्छा नहीं लगेगा। जैसे आप सब बच्चे हो, यहां आए हो तो सुधरने के लिए न, हम कड़ुआ भी बोलेंगे। तुम गर्लफ्रेंड, बॉयफ्रेंड बनाना बंद करो, तुम कोई नशा मत करो, अपने माता-पिता की आज्ञा में रहो।
अब इसी को बुरा मानो तो अगर संतजन तुम्हें उपदेश नहीं करेंगे तो शास्त्रों तक तुम्हारी पहुंच नहीं है। तुम कैसे जानोगे कि अच्छाई क्या है और बुराई क्या है? नए बच्चे हो, संसार में आए हो। तुमको लग रहा है कि सुख चाहिए। अब सुख व्यसन में, विचार में, गंदे व्यवहार में है। यही सब तुम्हें डिप्रेशन में ले जाएगा। यही तुम्हें सुसाइड करने के लिए प्रेरित करेगा। ऐसी घटनाएं बन जाएंगी। वही तुम्हें नाना प्रकार के आचरणों में फंसा करके जेल पहुंचाएगा।
क्या है माया?
उन्होंने ने कहा कि संत, सद्गुरु और शास्त्र... इनकी बातों का मनन करें। तो माया है ही नहीं। 'मा माने नहीं, या माने जो' मतलब जो है ही नहीं, लेकिन अपना कमाल कर जाती है। बड़े-बड़े लोगों को भ्रष्ट कर देती है। ये है भगवान की माया। भक्तों से प्रेमानंद ने पूछा, 'आप बताओ माया कहां है? आप माया हो, हम माया हैं। हमारा अलग नाम है। आपका अलग स्वरूप है। आप और हमारे बीच के जो आचरण हैं, यदि वो गलत हो गए तो माया हो गई।'