संस्कृति

जगन्नाथ रथयात्रा अद्भूत अलौकिक अकल्पनीय श्रद्धा उत्साह और भक्ति से सराबोर हुई चांपा की गलियां

चाम्पा,

जगन्नाथ रथयात्रा इस समय चाम्पा नगरी में इतिहास में पहली बार बहुत ही धूमधाम से मनाया गया है,धन्य है हमारी वृंदावन भक्ति कुटीर जांजगीर और धन्य है हमारी रुकमणी-कन्हैया धाम चांपा और धन्य है वह तमाम सहयोगी जिन्होने हमारी इस असाधारण निर्णय को चरितार्थ कर दिखाया ! और चाम्पा में इस जगन्नाथ रथयात्रा के माध्यम से भक्ति की एक नई उमंग पैदा कर दी। जहां-जहां से यह रथयात्रा निकली वहां-वहां से भक्तगण अपनी तमाम गृहस्थ उलझनों को एक तरफ दरकिनार करते हुए हरे कृष्णा हरे रामा की धुन में डूबकर भावविभोर होकर झुमने को मजबूर हो गये।

अंर्तराष्ट्रीय कृष्णभावनामृत संघ जिसे इस्कॉन के नाम से भी लोग जानते है इसी का एक सेंटर का नाम है वृंदावन भक्ति कुटीर, जांजगीर। एक छोटे से जगह से अपना सेंटर चलाते हुए  इनके अनुयायी एक विशाल जनसमूह के हृदयों में अपनी छाप छोडती आगे बढ़ रही है, अब वृंदावन भक्ति कुटीर के भक्त जांजगीर से बाहर निकलकर चांपा के रुकमणी-कन्हैया धाम में बच्चों के लिए अपनी वेल्यू एजुकेशन का कोर्स के साथ-साथ इंग्लिस स्पीकिंग का भी कोर्स कराती हैं। यहां भी 40-50 बच्चों की एक टीम बन चुकी हैं, जिनके सहयोग से इस वर्ष जगन्नाथ रथयात्रा निकालने के लिए मंथन किया। लेकिन यह काम इतना आसान भी नहीं था और योजना बनाते-बनाते रथयात्रा का समय भी नजदीक आ गया था ,चूंकि जांजगीर में यह रथयात्रा प्रतिवर्ष निकलती है जो बड़े ही भव्य व विशाल जनसमूह का नेतृत्व भी करती है इसलिए भक्तों का सारा समय जांजगीर में ही व्यतित हो गया। अपने निर्धारित समय में जांजगीर की रथयात्रा भी बहुत ही जबरदस्त रही। जांजगीर के बाद सभी भक्त बिलासपुर के रथयात्रा में शामिल होने के लिए व्यस्त हो गये। अब  और बेचैनी होने लगी कि  चांपा के लिए साल भर से सिर्फ योजना ही बना रहे हैं लेकिन धरातल पर कुछ भी नजर नही आ रहा है। थोड़े हताश भी हुए कि शायद ही अब  चांपा में रथयात्रा का आयोजन कर पाएंगे। तभी दशमी तिथि के आखिरी तीन दिन पहले जगन्नाथ प्रभु की ऐसी कृपा हुई और यह तय हुआ कि दशमी तिथि को ही चांपा में पहली बार इस्कान के भक्तों द्वारा एक भव्य रथयात्रा निकलेगी माने निकलेगी! परन्तु दो दिन का समय और तैयारी कुछ भी नही और ऊपर से वर्षा भी लगातार तीन दिन से अनवरत बरस रही थी, तो थोड़ा चिंता होना भी स्वाभाविक है लेकिन यह तो तय था कि अब चाहे पानी गिरे या फिर ओले पड़े हमारी रथयात्रा निकलेगी माने निकलेगी। यहां प्रभु की फिर एक बार कृपा हुई कि पूरी रथयात्रा के दौरान अचानक आसमान एकाएक साफ होकर मौसम एकदम से खिल गयी। और रथयात्रा के समापन के पश्चात पुनः वर्षा अपनी असली रुप में आकर झमाझम बरसने लगी।

अब बारी है इस यात्रा के दौरान  अनुभव की। सोचकर चले थे कि यह  पहला प्रयास है अगली बार से हम बड़े ही धूमधाम व पूर्ण तैयारी के साथ निकालेंगे, परन्तु जैसे ही रथ यात्रा प्रारंभ हुई तो ऐसा लगा जैसे हम ही नही पूरे चांपा के लोगों को भी हमारी इस रथयात्रा का इंतजार रहा हो. एकाएक भक्तों की संख्या बढ़ने लगी, सभी भक्त भगवान जगन्नाथ के रथ की रस्सी को खीचने के लिए उतावले होकर प्रत्येक गली के हर घर से लोग निकलने लगे, कोई भगवान जगन्नाथ के रथ के आगे झाडू लगाने को उत्साहित थे तो कोई जयकारा लगाने के लिए उत्साहित थे,
यह सब देखकर मन अति उत्साह से भर गया। और ऐसा लगा जैसे  मेहनत रंग लायी। इस दौरान भगवान के प्रति बच्चों की मस्ती भी देखने लायक रही, कोई झूम रहा है तो कोई नाच रहा है ऐसा दृश्य देखकर मन तो मानों जैसे आनंद से भर गया हो।

चांपा में रथयात्रा के दौरान वह जो आनंद के क्षण थे उसे शायद किसी शब्दों में न बांध पांऐ। उस क्षण का आनंद तो वही बता सकता है जो वहां मौजूद रहा हो। माताएं बहनों का वह भगवान के प्रति सर्मपण व नृत्य को देखकर तो पूरा नगर झूम उठा और हमको बार-बार लोग पूछने लगे कि ये लोग कौन है कहां से आएं है हमने तो ऐसा चांपा में इन्हें पहले कभी नही देखा शायद ये लोग वृंदावन से आए होंगे इत्यादि तमाम तरह की चर्चाएं पूरी रथयात्रा के दौरान होती रही और  नगरवासी भी अपने को रोक नही सके और भगवान जगन्नाथ रथयात्रा के सहभागी बनते गये। जैसे -जैसे हमारी यात्रा आगे बढ़ती गयी मानो हमारा उमंग भी बढ़ती गयी, फिर क्या था हमारे वृंदावन भक्ति कुटीर के भक्तों की कीर्तन मंडली के टीम की गायन, वादन व नृत्य की अपनी एक अलग ही छटा देखने को मिली। इस दौरान अत्यधिक भीड होने के कारण रोड जाम तक की नौबत आने लगी तब पुलिस प्रशासन का भी सहयोग जबरदस्त रहा जो हमारी यात्रा को भी आगे बढ़ाते रही और लोगों को भी कोई परेशानी न हो इसकी भी बराबर ध्यान रखती रही।

भगवान जगन्नाथ, भैया बलभद्र व माता सुभद्रा जी के स्वागत के लिए हर घर से आरती के दीप जलाकर व नारियल, फल, मिठाई इत्यादि पकवान भगवान को भेट स्वरुप समर्पण करते भक्तजन अपने-अपने घर के द्वार में इंतजार करते भी देखे गये, तो वही अनेक भक्तजन झुमते नाचते गाते भगवान के अनुयायियों का थकान दूर करने के लिए जगह-जगह पानी, शरबत व जूस का स्टाल लगाकर उन्हें अपने हाथों से पिलाते नजर भी आए, जो हमारी आनंद व उमंग को और भी बढ़ाने का कार्य कर रही थी।
अब यात्रा अपने अंतिम पड़ाव की ओर पहुँचने वाली थी। तब भक्तों का उत्साह और भी चरम को छुने लगी, रुकमणी-कन्हैया धाम के सामने वे रोड पर ही बैठ गये व झूम-झूम कर नाचने लगे, तत्पश्चात भगवान की आरती उतारी गई फिर भगवान जगन्नाथ, भैया बलभद्र व माता सुभद्रा जी को रुकमणी-कन्हैया धाम में कुछ समय के लिए आराम स्वरुप आसन पर बैठाया गया। उसके बाद तमाम भक्तजनों के लिए महाप्रसाद की व्यवस्था की गयी थी। सो वे सभी महाप्रसाद पाते गये।

कार्यकम की अत्यधिक सफलता को देखते हुए अनेक संगठनों ने इस प्रयास को सराहा भी और अगली रथयात्रा में अपनी सहभगिता देने का भी प्रतिबद्धता जताई। जो आने वाले समय में उत्साह को और भी दुगना करेगी। इस कार्यक्रम को सफल बनाने में सबसे बड़ा योगदान आर. के .ज्वेलर्स के रविन्द्र सोनी भारत एवं उनके परिवार एवं अनुयायियों का रहा है, जिसके  सभी जगह तारीफ हो रही है ।

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