दावा-वांगचुक की भूख हड़ताल तुड़वाने में कांग्रेस सांसद का रोल:
नई दिल्ली
सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल तुड़वाने में कांग्रेस सांसद का रोल सामने आ रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा ने सरकार और वांगचुक के बीच के गतिरोध को खत्म किया।
करीब 3 दिन तक बैक चैनल बातचीत चली। कई स्तरों पर कोशिशें की गई। इसके बाद सहमति बनाने में कामयाबी मिली। तन्खा पहले भी वांगचुक के NSA मामले में सुप्रीम कोर्ट में उनकी ओर से पैरवी कर चुके हैं।
दोनों के बीच अच्छे रिश्ते हैं। यह भी कहा जा रहा है कि बातचीत में लद्दाख के कुछ नेताओं ने भी मध्यस्थ की भूमिका निभाई।
अनशन तोड़ने के बाद वांगचुक ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर सरकार ने कोई आश्वासन नहीं दिया है। उनके लिए सबसे अहम बात छात्रों पर कार्रवाई रुकवानी थी। धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा इतना जरूरी नहीं था।
NEET पेपर लीक के खिलाफ वांगचुक 27 दिन से भूख हड़ताल पर थे। उन्होंने गुरुवार देर रात 12:30 बजे अपना अनशन खत्म कर दिया। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल पहुंचे, जहां नड्डा ने वांगचुक को जूस पिलाकर अनशन तुड़वाया।
वांगचुक ने शुक्रवार सुबह जारी वीडियो संदेश में कहा कि पिछले दो दिन से सरकार के साथ उनकी लगातार बातचीत चल रही थी। इस दौरान उनकी तीन प्रमुख मांगों पर चर्चा हुई। सरकार की ओर से इन मांगों पर लिखित आश्वासन मिलने के बाद उन्होंने भूख हड़ताल खत्म करने का फैसला लिया। वांगचुक ने कहा,
सरकार ने प्रदर्शनकारी छात्रों पर केस दर्ज नहीं करने, पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही तय करने के मुद्दे पर संसद में चर्चा कराने और आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिजन को उचित मुआवजा देने का आश्वासन दिया।
22 जुलाई को संसद के मानसून सत्र के दौरान विभिन्न विपक्षी दलों के सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल पहुंचा, जहां सोनम वांगचुक भर्ती थे। प्रतिनिधिमंडल में कांग्रेस के विवेक तन्खा, तृणमूल कांग्रेस की सागरिका घोष, सीपीआई(एम) के जॉन ब्रिटास, आम आदमी पार्टी के संजय सिंह समेत कई सांसद शामिल थे।
सांसदों ने वांगचुक को एक संयुक्त पत्र सौंपकर अनशन समाप्त करने की अपील की और भरोसा दिया कि NEET पेपर लीक, परीक्षा प्रणाली में सुधार और शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही का मुद्दा संसद के मानसून सत्र में मजबूती से उठाया जाएगा। शुरुआत में करीब 55 सांसदों ने पत्र पर हस्ताक्षर किए थे, बाद में यह संख्या बढ़कर लगभग 65 हो गई।
सोनम वांगचुक इस आंदोलन से 28 जून को जुड़े, जब उन्होंने दिल्ली के जंतर-मंतर पर NEET-UG पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ छात्रों के समर्थन में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की।