राजधानी

संसदीय समिति की रिपोर्ट:प्राइवेट अस्पतालों पर शिकंजा कसने का सुझाव,

रायपुर

देश में निजी अस्पतालों के इलाज, बिलिंग और शुल्क निर्धारण की व्यवस्था में बड़े बदलाव का रोडमैप तैयार किया गया है। संसद की स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण संबंधी स्थायी समिति ने राज्यसभा और लोकसभा में अपनी 176वीं रिपोर्ट पेश करते हुए 361 पन्नों में 365 सिफारिशें दी हैं। रिपोर्ट में समिति ने अनुसार मानक मेडिकल और सर्जिकल प्रक्रियाओं के पैकेज रेट पहले से सार्वजनिक करने, मरीज को इलाज शुरू होने से पहले अनुमानित खर्च बताने, इमरजेंसी में पहले इलाज और बाद में भुगतान की व्यवस्था तथा आयुष्मान भारत का बीमा कवर 5 लाख से बढ़ाकर 10 लाख रुपए करने जैसी सिफारिशें की हैं।

प्रो. राम गोपाल यादव की अध्यक्षता वाली 31 सदस्यीय समिति ने करीब 18 महीने तक अध्ययन किया। राज्यों, विशेषज्ञ संस्थानों, अस्पतालों, बीमा कंपनियों और आम लोगों से 167 ज्ञापन प्राप्त किए। समिति ने चेन्नई, बेंगलुरु और गोवा का अध्ययन दौरा किया तथा AIIMS, राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA), IRDAI, NPPA, CDSCO और नीति आयोग सहित कई संस्थाओं से चर्चा के बाद रिपोर्ट तैयार की। समिति में छत्तीसगढ़ की राज्यसभा सांसद लक्ष्मी वर्मा भी सदस्य थीं।

समिति ने यह भी माना है कि अस्पतालों की परिचालन लागत लगातार बढ़ रही है। इसलिए रिपोर्ट केवल मरीजों पर शुल्क नियंत्रण की बात नहीं करती, बल्कि अस्पतालों की लागत कम करने के उपाय भी सुझाती है। स्वास्थ्य सेवाओं को जीएसटी में जीरो-रेटेड करने की सिफारिश की गई है, ताकि अस्पतालों को इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) मिल सके। साथ ही स्वास्थ्य क्षेत्र को प्रायोरिटी सेक्टर लेंडिंग में शामिल करने का सुझाव दिया गया है, जिससे अस्पतालों को कम ब्याज पर ऋण उपलब्ध हो सके।

यह रिपोर्ट अभी कानून नहीं है। स्वास्थ्य मंत्रालय को इस पर एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) प्रस्तुत करनी होगी। जिन सिफारिशों में कानूनी, कर या नियामकीय बदलाव आवश्यक होंगे, उन पर केंद्र सरकार, संबंधित मंत्रालय, नियामक संस्थाएं तथा आवश्यकता पड़ने पर जीएसटी परिषद और संसद को निर्णय लेना होगा। यदि समिति की प्रमुख सिफारिशें लागू होती हैं तो पहली बार निजी अस्पतालों के शुल्क निर्धारण, इलाज की लागत, दवा कीमतों से जुड़े नियमों में बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

Leave Your Comment

Click to reload image