“गड्ढों में फंसा विकास! लवन-भाटापारा बायपास पर 10 किमी जाम, 15 घंटे से बेहाल ड्राइवर—डबल इंजन सरकार की सड़क व्यवस्था पर सवाल”*
15 घंटे से सड़क पर भूखे-प्यासे बेहाल ड्राइवर
गोविंद राम ब्यूरो चीफ
बलौदाबाजार
विकास के दावों के बीच लवन-भाटापारा बायपास मार्ग की बदहाली ने प्रशासनिक व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। शनिवार सुबह लवन रोड चौक से भाटापारा बायपास मार्ग पर गड्ढों में दो ट्रक एक साथ फंस गए और देखते ही देखते आवागमन पूरी तरह ठप हो गया। स्थिति यह है कि 15 घंटे से अधिक समय से वाहन मार्ग में फंसे हुए हैं, करीब 10 किलोमीटर लंबा जाम लग गया है और ट्रकों के चालक भूखे-प्यासे सड़क पर ही अपनी गाड़ियों के साथ बेहाल खड़े रहने को मजबूर हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस बायपास मार्ग से रोजाना चार-पांच सीमेंट प्लांटों से जुड़े सैकड़ों भारी वाहनों का आवागमन होता है, उसकी यह दुर्दशा आखिर जिम्मेदार अधिकारियों को क्यों नजर नहीं आ रही है?
गड्ढे में फंसे ट्रक, टूटे पट्टे, थम गई पूरी रफ्तार
लवन से भाटापारा मुख्यालय को जोड़ने वाला यह महत्वपूर्ण बायपास मार्ग करीब 9-10 वर्ष पुराना हो चुका है। बारिश के पहले से ही सड़क पर जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे बने हुए हैं। अब इन गड्ढों ने सड़क को जानलेवा बाधा में तब्दील कर दिया है।
बताया जा रहा है कि मार्ग में 7 से 8 वाहन अलग-अलग स्थानों पर गड्ढों में फंसे हुए हैं, वहीं कई ट्रकों के पट्टे टूट गए हैं। भारी वाहनों को निकालने और खराब वाहनों को सुधारने में भी काफी परेशानी हो रही है। दो ट्रकों के फंसने के बाद स्थिति इतनी बिगड़ी कि करीब 10 किलोमीटर तक वाहनों की कतार लग गई। इसका सीधा असर आम लोगों, दोपहिया वाहन चालकों और चारपहिया वाहन चालकों पर पड़ रहा है। आवश्यक काम से निकलने वाले लोग घंटों जाम में फंसे हैं।
वर्षों से नवीनीकरण नहीं, हर साल सिर्फ पैचवर्क का सहारा
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस महत्वपूर्ण मार्ग को बने करीब एक दशक होने जा रहा है, लेकिन आज तक इसका समुचित नवीनीकरण नहीं किया गया। पिछले कुछ वर्षों से मरम्मत के नाम पर जगह-जगह पैचवर्क कर जिम्मेदारी पूरी करने की कोशिश होती रही। नतीजा सामने है जिसमें बारिश आते ही सड़क फिर गड्ढों में तब्दील हो गई और अब एक-एक गड्ढा पूरे यातायात पर भारी पड़ रहा है।
सवाल यह है कि जब विभाग को पता है कि इस मार्ग से प्रतिदिन सैकड़ों भारी वाहन गुजरते हैं, तो फिर सड़क की स्थायी मरम्मत क्यों नहीं कराई गई?
इस पूरे मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि इस बायपास मार्ग से जिले के आला अधिकारियों के कार्यालय महज 4 किलोमीटर से भी कम दूरी पर हैं। बावजूद इसके, घंटों से सड़क पर जाम लगा है, वाहन फंसे हैं, ड्राइवर परेशान हैं और आम जनता हलकान है, लेकिन समाचार लिखे जाने तक किसी जिम्मेदार अधिकारी के मौके पर पहुंचने की सूचना नहीं है। क्या अधिकारियों को सड़क की वास्तविक स्थिति देखने के लिए भी किसी बड़े हादसे का इंतजार है?
डबल इंजन सरकार में सड़क की यह हालत आखिर किसके खाते में
सरकार विकास और बेहतर सड़क व्यवस्था के दावे करती है, लेकिन जिला मुख्यालय से कुछ ही किलोमीटर दूर एक महत्वपूर्ण बायपास पर 15 घंटे से अधिक समय तक ट्रकों का फंसा रहना और करीब 10 किलोमीटर का जाम उन दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
एक तरफ सरकार विकास की रफ्तार की बात करती है, दूसरी तरफ महत्वपूर्ण औद्योगिक मार्ग पर वाहन गड्ढों में फंसकर घंटों खड़े हैं। ऐसे में ‘डबल इंजन सरकार’ के विकास की जमीनी तस्वीर आखिर क्या है?
फिलहाल सबसे बड़ी मांग यही है कि सड़क निर्माण विभाग तत्काल मौके पर पहुंचे, फंसे वाहनों को निकालने की व्यवस्था करे और गड्ढों का युद्धस्तर पर पेचवर्क कराकर आवागमन बहाल करे। लेकिन सवाल सिर्फ आज के जाम का नहीं है। सवाल उस व्यवस्था का है जिसने वर्षों से इस महत्वपूर्ण मार्ग को स्थायी मरम्मत के बजाय पैचवर्क के भरोसे छोड़ रखा है।