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गिरौद से दिल्ली तक गूंजी आधी आबादी की हुंकार: पूर्व विधायक अनिता शर्मा के नेतृत्व में महिलाओं ने पीएम को लिखे पोस्ट कार्ड, मांगा 33% आरक्षण 'कानून का झुनझुना नहीं, अपना हक लेकर रहेंगी बहनें'

गिरौद से दिल्ली तक गूंजी आधी आबादी की हुंकार: पूर्व विधायक अनिता शर्मा के नेतृत्व में महिलाओं ने पीएम को लिखे पोस्ट कार्ड,

मांगा 33% आरक्षण'कानून का झुनझुना नहीं, अपना हक लेकर रहेंगी बहनें'

धरसीवां/रायपुर। चुनावी मंचों से महिलाओं के सम्मान और सशक्तिकरण के बड़े-बड़े दावे करने वाली केंद्र सरकार के सामने अब ग्रामीण भारत की जागरूक महिलाओं ने एक सीधा और तीखा सवाल खड़ा कर दिया है। सवाल यह कि आखिर देश की संसद और विधानसभाओं में हमारी हक की कुर्सी हमें कब मिलेगी? इसी सुलगते सवाल के साथ धरसीवां विधानसभा क्षेत्र के ग्राम पंचायत गिरौद में एक अभूतपूर्व राजनीतिक हलचल देखने को मिली, जहां ग्रामीण महिलाओं ने किसी रैली या धरने के बजाय सीधे प्रधानमंत्री के नाम "पोस्ट कार्ड अभियान" छेड़कर अपनी बात दिल्ली तक पहुंचाई। कांग्रेस पार्टी के बैनर तले हुए इस अनूठे प्रदर्शन का कमान क्षेत्र की पूर्व विधायक श्रीमती अनिता योगेंद्र शर्मा ने संभाला, जिन्होंने अपनी ओजस्वी वाणी से इस अभियान को एक बड़े जन-आंदोलन की शक्ल दे दी।

ग्राम पंचायत गिरौद के इस आयोजन में पारंपरिक बंधनों को पीछे छोड़ते हुए ग्रामीण महिलाएं जिस तरह एकजुट हुईं, उसने यह साफ कर दिया कि अब देश की राजनीति को बदलने का माद्दा सिर्फ शहरों तक सीमित नहीं है। पोस्ट कार्ड पर 33 प्रतिशत महिला आरक्षण को तत्काल प्रभाव से लागू करने की मांग लिखते हुए महिलाओं के चेहरों पर एक अलग ही आक्रोश और दृढ़ता थी। उनका साफ कहना था कि जब हर मोर्चे पर देश को संभालने में महिलाएं आगे हैं, तो लोकतंत्र के सबसे बड़े मंदिर में उनके प्रवेश को भविष्य के वादों के जाल में क्यों उलझाया जा रहा है?

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नारी शक्ति का शंखनाद: अधिकारों के लिए दिल्ली को ललकार,,

    संसद की दहलीज पर खड़ी देश की आधी आबादी की इस लड़ाई को अपनी आवाज देते हुए पूर्व विधायक श्रीमती अनिता योगेंद्र शर्मा ने केंद्र सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल दागे। उन्होंने उपस्थित जनसमूह को झकझोरते हुए कहा"मेरी सजग और संघर्षशील बहनों, आज गिरौद की इस पावन धरती से जो पोस्ट कार्ड दिल्ली की ओर रवाना हो रहे हैं, वे सिर्फ कागज के टुकड़े नहीं हैं, बल्कि ये केंद्र की सोई हुई सत्ता को जगाने का शंखनाद हैं। सरकार ने कानून का झुनझुना तो हमारे हाथों में थमा दिया, लेकिन उसे अमलीजामा पहनाने की तारीख को कोसों दूर धकेल दिया। मैं पूछना चाहती हूं कि आखिर हमारी हिस्सेदारी को लागू करने के लिए किस मुहूर्त का इंतजार किया जा रहा है? जिस देश की आधी आबादी नीति-निर्धारण से महरूम हो, उस देश के पूर्ण विकास की कल्पना करना ही बेमानी है। विकास की गाथा तब तक अधूरी है, जब तक हमारी बहनें कानून बनाने वाली मेज पर पुरुषों के कंधे से कंधा मिलाकर नहीं बैठतीं।

 हक की बुलंद आवाज़: रुकेगा नहीं जन-आंदोलन

 कांग्रेस पार्टी ने हमेशा महिलाओं को सिर्फ वोटर नहीं, बल्कि देश का भविष्य माना है और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए अग्रिम पंक्ति में खड़े होकर लड़ाई लड़ी है। आज केंद्र सरकार की नीयत साफ नहीं है, इसीलिए इस कानून को टालने के बहाने ढूंढे जा रहे हैं। लेकिन हम अब और चुप बैठने वाले नहीं हैं। यह लड़ाई हमारे आत्मसम्मान की है, हमारे हक की है। आज इस मंच से मैं यह साफ कर देना चाहती हूं कि जब तक हमारी माताओं-बहनों को उनका यह संवैधानिक अधिकार जमीन पर नहीं मिल जाता, तब तक यह जन-आंदोलन थमेगा नहीं। हम हर गांव, हर घर तक जाएंगे और इस हक की आवाज को इतनी बुलंद करेंगे कि दिल्ली के हुक्मरानों को झुकना ही पड़ेगा।"

 पूर्व विधायक के सुर में सुर मिलाते हुए महिला ब्लॉक अध्यक्ष मंजू वर्मा, मंडल अध्यक्ष पंकज नायक, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष डोमेश्वरी वर्मा और पूर्व जनपद सदस्य नीतू साहू सहित अनेक कांग्रेस पदाधिकारियों ने इस अभियान को घर-घर तक ले जाने का संकल्प लिया।

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