छत्तीसगढ़ में सहायक शिक्षकों के 2292 पदों पर भर्ती का ऐलान 11 अक्टूबर 2026 को संभावित परीक्षा, ऑनलाइन आवेदन से भरे जाएंगे पद
नवा रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन के स्कूल शिक्षा विभाग ने राज्य की शासकीय स्कूलों में शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए बड़ी भर्ती प्रक्रिया शुरू करने की घोषणा की है। लोक शिक्षण संचालनालय, छत्तीसगढ़ द्वारा जारी संक्षिप्त विज्ञापन के अनुसार ई एवं टी संवर्ग की शालाओं में सहायक शिक्षक के कुल 2292 रिक्त पदों पर भर्ती की जाएगी। यह कदम प्रदेश के शिक्षा तंत्र को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
जारी विज्ञापन के मुताबिक, टी संवर्ग के अंतर्गत 795 और ई संवर्ग के अंतर्गत 1407 पदों को भरा जाएगा। इन पदों पर नियुक्ति के लिए संबंधित जिला शिक्षा अधिकारी को नियुक्तिकर्ता प्राधिकारी बनाया गया है। अभ्यर्थियों का चयन छत्तीसगढ़ व्यावसायिक परीक्षा मंडल के माध्यम से आयोजित लिखित परीक्षा के आधार पर किया जाएगा।
ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया व्यावसायिक परीक्षा मंडल की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से पूरी की जाएगी। अभ्यर्थी विस्तृत जानकारी जैसे शैक्षणिक योग्यता, आयु सीमा, परीक्षा योजना, पाठ्यक्रम और आरक्षण संबंधी नियमों की जानकारी विभागीय वेबसाइट और व्यापम की साइट पर देख सकते हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि आवेदन केवल ऑनलाइन माध्यम से ही स्वीकार किए जाएंगे।
भर्ती परीक्षा की संभावित तिथि 11 अक्टूबर 2026 निर्धारित की गई है। हालांकि, विभाग ने यह भी उल्लेख किया है कि रिक्त पदों की संख्या में आवश्यकता अनुसार परिवर्तन संभव है। ऐसे में अभ्यर्थियों को सलाह दी गई है कि वे समय-समय पर आधिकारिक वेबसाइट पर अपडेट देखते रहें।
इस भर्ती प्रक्रिया से राज्य के हजारों युवाओं को सरकारी नौकरी पाने का अवसर मिलेगा। साथ ही, लंबे समय से शिक्षकों की कमी से जूझ रहे सरकारी स्कूलों को भी राहत मिलने की उम्मीद है। ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए यह पहल काफी अहम मानी जा रही है।
वहीं, विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि चयन उपरांत की जाने वाली नियुक्तियां माननीय उच्चतम न्यायालय, नई दिल्ली में लंबित एस.एल.पी. (सी) क्रमांक 019668/2022 में पारित होने वाले अंतिम निर्णय के अधीन रहेंगी। ऐसे में अभ्यर्थियों को इस पहलू को ध्यान में रखते हुए आवेदन करने की सलाह दी गई है।
लोक शिक्षण संचालनालय के इस कदम को प्रदेश में शिक्षा के क्षेत्र में एक सकारात्मक पहल के रूप में देखा जा रहा है, जिससे आने वाले समय में स्कूलों में शिक्षण व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ होने की उम्मीद है।