शिक्षा की ‘चंचल’ पहल: सांकरा के सरकारी स्कूल में नवाचारों से लौटी पढ़ाई की रौनक भावनात्मक जुड़ाव, कला आधारित शिक्षा और सामाजिक अभियानों से बदली तस्वीर; बच्चों को मिली सपनों की नई उड़ान
धरसीवां। रायपुर जिले के विकासखंड धरसीवां अंतर्गत ग्राम सांकरा के पूर्व माध्यमिक शाला में एक शिक्षिका के प्रयासों ने सरकारी स्कूल की तस्वीर बदल दी है। यहां पदस्थ शिक्षिका चंचल विजय शुक्ला ने अपने नवाचारों और संवेदनशील पहल के जरिए शिक्षा को केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित न रखकर बच्चों के सर्वांगीण विकास का माध्यम बना दिया है।
ग्रामीण क्षेत्रों में अक्सर बच्चों का स्कूल से दूरी बनाना एक बड़ी समस्या होती है, लेकिन सांकरा में इस चुनौती को अवसर में बदला गया। जब कुछ बच्चे स्कूल आना छोड़ने लगे, तो चंचल शुक्ला ने उनके घर-परिवार और व्यक्तिगत परिस्थितियों को समझते हुए उनसे संवाद स्थापित किया। उन्होंने बच्चों में यह भरोसा जगाया कि स्कूल उनके सपनों को साकार करने का सुरक्षित और प्रेरणादायक स्थान है। इसका असर यह हुआ कि जो बच्चे पहले पढ़ाई से विमुख थे, वे अब नियमित रूप से स्कूल आने लगे हैं।
शिक्षण पद्धति में भी उन्होंने पारंपरिक ढर्रे से हटकर ‘कला आधारित शिक्षा’ को अपनाया। विज्ञान जैसे विषयों को कविता, चित्रकला और लेखन से जोड़कर पढ़ाने से बच्चों की जिज्ञासा और रचनात्मकता में वृद्धि हुई है। छात्र अब कठिन विषयों को सहजता से समझने लगे हैं और अपनी अभिव्यक्ति भी बेहतर ढंग से कर पा रहे हैं।
इसके अलावा, स्कूल में स्वच्छता पखवाड़ा, योग-नृत्य गतिविधियां और व्यावसायिक शिक्षा जैसे कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जा रहे हैं। ‘आओ पेड़ लगाएं-जीवन बचाएं’ और ‘एक-दूसरे का बनें संबल’ जैसे अभियानों के माध्यम से बच्चों में पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक समरसता की भावना विकसित की जा रही है। इन गतिविधियों से न केवल शिक्षा का स्तर बेहतर हुआ है, बल्कि बच्चों के व्यक्तित्व में भी सकारात्मक बदलाव आया है।
इन प्रयासों का परिणाम यह है कि पिछले तीन वर्षों से लगातार इस विद्यालय के विद्यार्थियों का चयन प्रतिष्ठित ‘इंस्पायर अवार्ड’ के लिए हो रहा है। साथ ही, दक्ष, स्मृति पुस्तकालय, ज्ञान भारतम् और मिशन उत्कर्ष जैसी योजनाओं में भी स्कूल की सक्रिय भागीदारी रही है।
शिक्षिका के इस नवाचारपूर्ण कार्य की जिला शिक्षा अधिकारी, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्राम पंचायत द्वारा सराहना की जा रही है। जिला प्रशासन के मार्गदर्शन में सांकरा का यह स्कूल अब शिक्षा के क्षेत्र में एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर उभरा है।
नवाचारों से मिली पहचान
सांकरा के पूर्व माध्यमिक शाला में शिक्षिका चंचल शुक्ला के प्रयासों से शिक्षा का माहौल पूरी तरह बदल गया है। स्कूल में कला आधारित शिक्षा, पर्यावरण अभियान, योग-नृत्य और व्यावसायिक प्रशिक्षण जैसी गतिविधियों ने बच्चों की रुचि बढ़ाई है। लगातार तीन वर्षों से ‘इंस्पायर अवार्ड’ में चयन इस बात का प्रमाण है कि नवाचार और समर्पण से सरकारी स्कूल भी उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकते हैं।