राजधानी

“जमीन मेरी, कब्जा फैक्ट्री का”: न्याय की आस में हाई-वोल्टेज टावर पर चढ़ा किसान 12 साल से भटकते किसान का फूटा गुस्सा, 6 घंटे तक टावर पर डटा रहा; मुआवजे की घोषणा के बाद उतरा नीचे

धरसींवा। औद्योगिक क्षेत्र सिलतरा एक बार फिर किसानों और उद्योगों के बीच जमीन विवाद को लेकर सुर्खियों में है। सोनड्रा के किसान किशन लाल पिता लखन लाल ने अपनी जमीन पर कथित कब्जे के विरोध में हाई-वोल्टेज बिजली टावर पर चढ़कर विरोध दर्ज कराया। किसान का आरोप है कि उसकी 48 डिसमिल जमीन पर फॉर्च्यून उद्योग द्वारा कब्जा कर लिया गया है और पिछले 12 वर्षों से वह अपनी जमीन वापस पाने के लिए प्रशासनिक दफ्तरों के चक्कर काट रहा था, लेकिन उसकी कहीं सुनवाई नहीं हुई।

बताया जा रहा है कि लंबे समय से न्याय नहीं मिलने से परेशान किसान सोमवार को अचानक गांव के पास स्थित बिजली टावर पर चढ़ गया और जमीन वापस दिलाने की मांग करने लगा। टावर पर चढ़े किसान को देखकर इलाके में हड़कंप मच गया और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर जमा हो गए। किसान लगातार आरोप लगाता रहा कि उद्योग प्रबंधन के प्रभाव के कारण उसकी शिकायतों पर कार्रवाई नहीं हुई और प्रशासन भी इस मामले में गंभीर नहीं रहा।

प्रशासन की समझाइश, लेकिन टावर से उतरने को तैयार नहीं किसान

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, तहसीलदार और प्रशासनिक अधिकारी भारी अमले के साथ मौके पर पहुंचे। चौकी प्रभारी सहित अधिकारियों ने किसान को नीचे उतरकर अपनी बात रखने की समझाइश दी, लेकिन वह जमीन की वापसी और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग पर अड़ा रहा। यहां तक कि एसडीएम और तहसीलदार के समझाने के बावजूद किसान टावर से नीचे उतरने को तैयार नहीं हुआ।

स्थिति उस समय और तनावपूर्ण हो गई जब एसडीआरएफ की टीम ने रेस्क्यू की तैयारी की। टीम की गतिविधि देखकर किसान और भड़क गया और आत्मघाती कदम उठाने की चेतावनी देने लगा। लगभग छह घंटे तक चले इस घटनाक्रम में प्रशासन, पुलिस और ग्रामीण लगातार किसान को समझाने में लगे रहे।

बेटों की गुहार और मुआवजे की घोषणा के बाद टूटा गतिरोध

इस दौरान किसान के तीनों बेटे कुलेश्वर, लिलेश्वर और जागेश्वर निषाद भी मौके पर पहुंचे और पिता से टावर से नीचे उतरने की भावुक अपील करते रहे। आखिरकार लंबे मान-मनौव्वल और कंपनी प्रबंधन की ओर से 50 लाख रुपये मुआवजे की बात सामने आने के बाद किसान टावर से नीचे उतरने के लिए राजी हुआ, जिसके बाद प्रशासन ने राहत की सांस ली।

सिलतरा औद्योगिक क्षेत्र में पहले भी उठ चुके हैं ऐसे विवाद

गौरतलब है कि औद्योगिक क्षेत्र सिलतरा में पहले भी किसानों और उद्योगों के बीच जमीन को लेकर कई विवाद सामने आ चुके हैं। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि कई बार किसान उद्योगपतियों की कूटनीति और कानूनी जटिलताओं के कारण अपनी ही जमीन के मामलों में वर्षों तक न्याय के लिए भटकते रहते हैं। ऐसे मामलों में प्रशासन की धीमी कार्रवाई और उद्योगों के प्रभाव के कारण किसानों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

लोगों का कहना है किशन लाल की यह घटना भी इसी पीड़ा को उजागर करती है कि जब लंबे समय तक न्याय नहीं मिलता तो पीड़ित को अपनी आवाज उठाने के लिए ऐसे खतरनाक कदम उठाने पड़ते हैं। अब क्षेत्र के लोगों की नजर इस बात पर टिकी है कि प्रशासन इस मामले में आगे क्या कार्रवाई करता है ।

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