सिलतरा से अंबेडकर चौक तक गूंजेगी हक की आवाज बिचौलिया प्रथा और अवैध वसूली के खिलाफ परिवहन संघ का अनिश्चितकालीन शंखनाद पांच सूत्रीय मांगों को लेकर 18 मार्च से राजधानी में चक्का जाम की चेतावनी
धरसींवा। छत्तीसगढ़ के औद्योगिक क्षेत्र सिलतरा से एक बार फिर स्थानीय हक और रोज़गार को लेकर आंदोलन की आवाज तेज हो गई है। अपनी पांच सूत्रीय मांगों को लेकर संघर्षरत छत्तीसगढ़ औद्योगिक परिवहन कल्याण संघ, सिलतरा-रायपुर ने 18 मार्च से राजधानी रायपुर के अंबेडकर चौक में अनिश्चितकालीन परिवहन हड़ताल का ऐलान किया है। संघ ने स्पष्ट किया है कि यदि उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो यह आंदोलन और भी व्यापक रूप ले सकता है, जिसका सीधा असर प्रदेश के औद्योगिक परिवहन और माल ढुलाई व्यवस्था पर पड़ना तय माना जा रहा है।
संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि यह समस्या आज की नहीं बल्कि पिछले दो दशकों से लगातार चली आ रही है। जब क्षेत्र में बड़े-बड़े उद्योग स्थापित हुए थे, तब स्थानीय किसानों और ग्रामीणों ने अपनी जमीनें इस उम्मीद के साथ दी थीं कि इससे क्षेत्र में रोजगार और आर्थिक समृद्धि आएगी। कई परिवारों ने भविष्य की उम्मीद में कर्ज लेकर ट्रक खरीदे, ताकि उद्योगों में परिवहन कार्य कर अपने परिवार का भरण-पोषण कर सकें। लेकिन वर्तमान स्थिति में स्थानीय लोगों को प्राथमिकता नहीं मिल रही है और उद्योगों में बाहरी लोगों तथा उद्योगपतियों के परिचितों की गाड़ियों को काम दिया जा रहा है। इससे स्थानीय ट्रक मालिकों के सामने रोज़गार का संकट खड़ा हो गया है।
बिचौलिया प्रथा और अवैध वसूली पर आक्रोश
संघ ने आरोप लगाया है कि औद्योगिक इकाइयों में बिचौलिया प्रथा ने पूरी परिवहन व्यवस्था को प्रभावित कर दिया है। बिचौलियों के हस्तक्षेप के कारण गाड़ी मालिकों को उनका उचित मेहनताना नहीं मिल पा रहा है। इसलिए संघ की प्रमुख मांग है कि परिवहन कार्य केवल संघ की अधिकृत बिल्टी के माध्यम से ही संचालित किया जाए, ताकि बिचौलियों की भूमिका समाप्त हो और स्थानीय गाड़ी मालिकों को सीधे काम मिल सके।
हड़ताल का एक बड़ा कारण औद्योगिक प्लांटों में कथित अवैध वसूली भी बताया जा रहा है। संघ का आरोप है कि कई प्लांटों में वजन (कांटा) के नाम पर ट्रक मालिकों से जबरन पैसे वसूले जाते हैं, जिसका कोई वैधानिक आधार नहीं है। इससे परिवहन व्यवसाय से जुड़े लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
लोडिंग-अनलोडिंग में देरी से बढ़ रही परेशानी
संघ ने लोडिंग और अनलोडिंग व्यवस्था पर भी नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि वर्तमान में ट्रकों को प्लांट परिसर में 24-24 घंटे तक खड़ा रखा जाता है, जिससे समय और संसाधनों की भारी बर्बादी होती है। संघ की मांग है कि लोडिंग और खाली कराने की एक निश्चित समय सीमा तय की जाए, ताकि गाड़ियों का संचालन सुचारु रूप से हो सके।
संघ ने प्रशासन और उद्योग प्रबंधन को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि उनकी पांचों मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो 18 मार्च से अंबेडकर चौक पर अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन और चक्का जाम शुरू किया जाएगा। इस आंदोलन में बड़ी संख्या में ट्रक मालिक, चालक और उनके परिवार शामिल होंगे।
इस दौरान संघ अध्यक्ष लखविंदर सिंह, सचिव बलराम साहू, अजय सिंह, जितेंद्र दुबे, बबलू खान, कमलेश वर्मा, कमलेश मिश्रा, परवेज़ अहमद, पिंटू पाठक, बृजेश मिश्रा, विकास गुप्ता, लेखु वर्मा, मनीष शुक्ला, होरीलाल वर्मा सहित सैकड़ों सदस्य उपस्थित रहे। संघ ने स्पष्ट किया है कि जब तक स्थानीय परिवहन व्यवसायियों को न्याय नहीं मिलता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।