धरसीवा में जल प्रदूषण का मुद्दा सदन में गूंजा, कारखानों के एसिड उत्सर्जन की जांच की मांग जल स्रोतों से खिलवाड़ करने वालों पर हो कड़ी कार्रवाई- अनुज शर्मा
धरसीवा। धरसीवा विधानसभा क्षेत्र में कारखानों से हो रहे खतरनाक एसिड उत्सर्जन और उससे फैल रहे जल प्रदूषण का मामला अब विधानसभा तक पहुँच गया है। क्षेत्र के विधायक अनुज शर्मा ने विधानसभा सदन में इस गंभीर विषय को उठाते हुए सरकार से तत्काल जांच कराने और दोषी औद्योगिक इकाइयों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की। उन्होंने कहा कि जल स्रोतों में बढ़ते प्रदूषण के कारण क्षेत्र के नागरिकों के स्वास्थ्य, पर्यावरण और कृषि व्यवस्था पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
विधानसभा में अपनी बात रखते हुए विधायक अनुज शर्मा ने बताया कि धरसीवा क्षेत्र में संचालित कुछ औद्योगिक कारखानों द्वारा पर्यावरण नियमों की अनदेखी करते हुए रासायनिक अपशिष्ट पदार्थों का उचित उपचार (ट्रीटमेंट) किए बिना ही उन्हें भूमिगत डाला जा रहा है। इसके साथ ही एसिड युक्त अपशिष्ट जल को आसपास के जल स्रोतों और नालों में भी बहाया जा रहा है। इस कारण क्षेत्र का भूमिगत जल तेजी से प्रदूषित होता जा रहा है और कई स्थानों पर पानी की गुणवत्ता प्रभावित होने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
उन्होंने सदन को यह भी बताया कि क्षेत्र के नागरिकों से इस संबंध में लगातार शिकायतें प्राप्त हो रही हैं। लोगों का कहना है कि कई स्थानों पर हैंडपंप और कुओं का पानी दूषित हो गया है, जिससे स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं। दूषित और एसिड युक्त पानी के कारण त्वचा रोग, पेट संबंधी बीमारियों सहित अन्य स्वास्थ्य समस्याओं की आशंका बढ़ गई है। इसके अलावा इसका असर कृषि भूमि और पशुधन पर भी पड़ रहा है, जिससे किसानों और ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है।
विधायक अनुज शर्मा ने कहा कि धरसीवा के नागरिकों का स्वास्थ्य और स्वच्छ जल संसाधनों की उपलब्धता उनकी प्राथमिकता है। यदि औद्योगिक इकाइयों की लापरवाही के कारण जल स्रोत प्रदूषित हो रहे हैं तो इसे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने सदन में सरकार से मांग की कि इस पूरे मामले में प्रशासन त्वरित संज्ञान लेते हुए प्रभावित क्षेत्रों का सर्वे कराए और लोगों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक कदम उठाए।
श्री शर्मा ने यह भी मांग की कि राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के माध्यम से संबंधित औद्योगिक इकाइयों की तत्काल जांच कराई जाए। जो कारखाने पर्यावरण मानकों का उल्लंघन करते पाए जाएं, उनके खिलाफ पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के तहत कठोर दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही सभी औद्योगिक इकाइयों को ‘जीरो लिक्विड डिस्चार्ज’ नीति का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए जाएं, ताकि भविष्य में जल स्रोतों को प्रदूषित होने से रोका जा सके और क्षेत्र के नागरिकों को स्वच्छ एवं सुरक्षित जल उपलब्ध हो सके।