राजधानी

खरोरा में सनसनीखेज हत्या का खुलासा खरोरा के तिल्दाडीह गांव में युवक की मौत निकली साजिश, पत्नी बनी मास्टरमाइंड

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के खरोरा थाना क्षेत्र अंतर्गत तिल्दाडीह गांव के पास मिली युवक की लाश की गुत्थी आखिरकार पुलिस ने सुलझा ली है। जिस मौत को शुरू में सड़क हादसा माना जा रहा था, वह दरअसल सुनियोजित हत्या निकली। इस हत्याकांड में सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि मृतक की पत्नी ही पूरी साजिश की मास्टरमाइंड थी। पुलिस ने पत्नी समेत कुल चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।

अवैध संबंध बना हत्या की वजह

मृतक किशोर सारथी की पत्नी रोशनी का खरोरा निवासी लीलेश उर्फ भूरू के साथ कथित तौर पर अवैध संबंध था। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जब किशोर को इस रिश्ते की भनक लगी तो उसने पत्नी से विवाद किया और मारपीट भी की। इसके बाद पति-पत्नी के बीच तनाव लगातार बढ़ता गया। इसी तनाव ने खौफनाक मोड़ ले लिया।

पुलिस जांच में सामने आया कि रोशनी ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर पति को रास्ते से हटाने की साजिश रची। आरोप है कि उसने अपने जेवर गिरवी रखकर प्रेमी को पैसे दिए ताकि हत्या की योजना को अंजाम दिया जा सके।

थार से कुचलकर की गई हत्या

योजना के तहत लीलेश ने एक थार गाड़ी किराए पर ली। इसके बाद उसने धरसींवा क्षेत्र के दो अन्य साथियों को साथ मिलाया। सुनियोजित तरीके से किशोर की बाइक को पहले टक्कर मारी गई और फिर उसे तीन से चार बार गाड़ी से कुचल दिया गया, ताकि मामला सड़क दुर्घटना जैसा लगे। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी मौके से फरार हो गए।

घटना के बाद क्षेत्र में दहशत का माहौल था। परिजनों ने इसे हादसा मानने से इनकार किया, जिसके बाद पुलिस ने मामले की गंभीरता से जांच शुरू की।

संयुक्त टीम ने किया खुलासा

खरोरा पुलिस और क्राइम ब्रांच की संयुक्त टीम ने तकनीकी साक्ष्यों, कॉल डिटेल्स और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर जांच को आगे बढ़ाया। पूछताछ और साक्ष्यों के आधार पर पत्नी रोशनी, प्रेमी लीलेश और उसके दो सहयोगियों को गिरफ्तार कर लिया गया। चारों आरोपियों से पूछताछ जारी है।

बढ़ते अपराध पर गंभीर सवाल

यह घटना न केवल एक परिवार के टूटने की कहानी है, बल्कि समाज में बढ़ते अपराधों की भयावह तस्वीर भी पेश करती है। वैवाहिक विवाद, अवैध संबंध और आपसी तनाव अब कई मामलों में हिंसक रूप ले रहे हैं। छोटी-छोटी बातों पर हत्या जैसी वारदातें समाज के लिए गंभीर चेतावनी हैं।

पारिवारिक संवाद की कमी, बढ़ता अविश्वास और त्वरित समाधान की मानसिकता अपराध को बढ़ावा दे रही है। ऐसे मामलों में कानूनी जागरूकता, काउंसलिंग और सामाजिक हस्तक्षेप की जरूरत पहले से कहीं ज्यादा महसूस की जा रही है।

खरोरा की यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि रिश्तों में दरार अगर समय रहते न भरी जाए तो उसका अंजाम कितना भयावह हो सकता है। पुलिस ने मामले में त्वरित कार्रवाई कर आरोपियों को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया है, लेकिन यह घटना समाज में बढ़ते अपराधों पर गंभीर चिंतन की मांग करती है।

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