बलौदाबाजार-भाटापारा जिले में 85% से अधिक धान उठाव, प्रशासनिक कुशलता की झलक कलेक्टर दीपक सोनी के नेतृत्व में उपार्जन केंद्रों से तेज परिवहन, नुकसान पर लगेगी रोक
गोविन्द राम ब्यूरो चीफ
बलौदाबाजार:-
जिला बलौदाबाजार-भाटापारा इस वर्ष धान उठाव की गति में ऐतिहासिक उपलब्धि की ओर अग्रसर है। पिछले वर्षों की तुलना में इस बार धान उठाव अभूतपूर्व तेजी से हो रहा है। जिले में अंतिम धान खरीदी 6 फरवरी को सम्पन्न हुई थी और महज 21 दिनों के भीतर 27 फरवरी 2026 तक कुल 85 प्रतिशत से अधिक धान का उठाव किया जा चुका है। यह अब तक की सबसे तेज गति को दर्शाता है, जिससे जिला प्रशासन की सक्रियता और मजबूत कार्यप्रणाली स्पष्ट झलकती है।
जिले के सभी 166 धान उपार्जन केंद्रों में जोर-शोर से लगातार उठाव जारी है। जिला कलेक्टर दीपक सोनी के कुशल प्रशासनिक नेतृत्व, सतत मॉनिटरिंग और समन्वय के कारण यह उपलब्धि संभव हो पाई है। प्रशासनिक टीम द्वारा समयबद्ध योजना, परिवहन व्यवस्था की सुदृढ़ता तथा नियमित समीक्षा से धान उठाव में उल्लेखनीय प्रगति हुई है।
कई उपार्जन केंद्र लगभग पूर्ण उठाव की स्थिति में पहुँच चुके हैं। इनमें अमोदी, खैरी, फरहदा (हथबंद), टीकूलिया, रिसदा, बलौदाबाजार, अर्जुनी, चंदेरी, देवरी भाटापारा, दशरमा, मिरगी, लाहोद, धुर्राबांधा और गोरधी जैसे केंद्र शामिल हैं, जहाँ 99 प्रतिशत तक धान उठाव हो चुका है। वहीं 70 से अधिक उपार्जन केंद्रों में 98 प्रतिशत तक तथा लगभग 50 केंद्रों में 80 प्रतिशत तक उठाव पूर्ण हो चुका है, जो जिले की उत्कृष्ट प्रगति को दर्शाता है।
पिछले वर्षों में स्थिति बिल्कुल विपरीत रहती थी। उपार्जन केंद्रों में धान लंबे समय तक पड़ा रहता था, जिससे बोरे धूल-मिट्टी, बारिश, चूहों और भीषण गर्मी के कारण खराब होने की आशंका बनी रहती थी। खरीदी समाप्त होने के कई दिनों बाद तक परिवहन के वाहन नजर नहीं आते थे। लेकिन इस वर्ष जिले के चारों ओर लगातार धान परिवहन करते वाहन दिखाई दे रहे हैं और केंद्रों से निर्बाध उठाव जारी है।
इस तेज गति का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि धान खराब होने, सूखत तथा अन्य नुकसान की संभावना लगभग समाप्त हो जाएगी। प्रशासन की इस सक्रियता से किसानों और समितियों दोनों को राहत मिलेगी तथा सरकारी संसाधनों की बचत भी होगी।
जिला प्रशासन की पूरी टीम की प्रतिबद्धता और योजनाबद्ध कार्यप्रणाली ने बलौदाबाजार-भाटापारा को धान प्रबंधन के क्षेत्र में नई पहचान दिलाई है। लोगों का मानना है कि यदि यही गति बनी रही तो जिले में शीघ्र ही शत-प्रतिशत धान उठाव का लक्ष्य भी हासिल हो जाएगा।
जिले में तेज गति से हो रहा धान उठाव न केवल प्रशासनिक दक्षता का प्रतीक है, बल्कि यह किसानों के विश्वास, पारदर्शिता और सुशासन की मजबूत मिसाल भी बनता जा रहा है।