श्मशान से गायब कपाल: अंधविश्वास की परछाईं या जागरूकता की पुकार?
रायपुर । छत्तीसगढ़ में तंत्र-मंत्र, काला जादू, टोनही और बैगा जैसे शब्द किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। आधुनिक दौर में जब दुनिया एआई और रॉकेट साइंस की बात कर रही है, तब भी प्रदेश के कुछ इलाकों से आने वाली घटनाएं यह सोचने पर मजबूर कर देती हैं कि क्या अंधविश्वास की जड़ें अब भी उतनी ही गहरी हैं?
बीते दिनों बालोद जिले से आई एक खबर ने लोगों को झकझोर दिया था, जहां श्मशान से एक बच्ची की खोपड़ी गायब होने की बात सामने आई थी। मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि राजधानी रायपुर से लगे जरवाय गांव से एक और चौंकाने वाली घटना सामने आ गई।
प्राप्त जानकारी के अनुसार 19 फरवरी को ग्राम जरवाय निवासी शेखर यादव का अंतिम संस्कार किया गया था। परंपरा के अनुसार जब परिवारजन अस्थि संग्रह के लिए श्मशान घाट पहुंचे, तो उन्होंने देखा कि चिता स्थल से मृतक की कपाल अर्थात खोपड़ी गायब है। इतना ही नहीं, चिता के पास सिंदूर, नींबू, काले कपड़े और अन्य तांत्रिक सामग्री भी बिखरी हुई मिली। घटना स्थल के पास एक लावारिस बाइक भी पाई गई।
इस दृश्य को देखकर परिवारजन स्तब्ध रह गए। गांव में खबर फैलते ही सनसनी का माहौल बन गया। आशंका जताई जा रही है कि किसी ने तंत्र क्रिया के लिए इस कृत्य को अंजाम दिया होगा। मामले की सूचना तत्काल कबीर नगर पुलिस को दी गई। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है और आसपास के लोगों से पूछताछ की जा रही है। लावारिस बाइक के आधार पर भी सुराग जुटाने का प्रयास किया जा रहा है।
यह घटना केवल एक आपराधिक मामला नहीं, बल्कि सामाजिक सोच पर भी सवाल खड़ा करती है। एक ओर सरकार और समाज शिक्षा, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और जागरूकता की बात करते हैं, वहीं दूसरी ओर ऐसी घटनाएं यह संकेत देती हैं कि अंधविश्वास अब भी कहीं न कहीं प्रभावी है। तंत्र-मंत्र और काला जादू के नाम पर इस तरह की गतिविधियां न केवल कानूनन अपराध हैं, बल्कि समाज में भय और असुरक्षा का वातावरण भी पैदा करती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी घटनाओं से निपटने के लिए केवल पुलिस कार्रवाई ही पर्याप्त नहीं, बल्कि व्यापक सामाजिक जागरूकता की आवश्यकता है। शिक्षा, संवाद और वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देना समय की मांग है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को यह समझाना होगा कि अंधविश्वास के नाम पर किसी भी प्रकार की आपराधिक गतिविधि स्वीकार्य नहीं है।
जरवाय की यह घटना एक चेतावनी है कि समाज को अब जागरूक और सजग होने की जरूरत है। सनसनी से आगे बढ़कर हमें यह सोचना होगा कि आने वाली पीढ़ी को किस दिशा में ले जाना है अंधविश्वास की ओर या विज्ञान और विवेक की राह पर।