भगवान श्रीजगन्नाथ बद्रीनाथ में स्नान , द्वारिकापुरी में श्रृंगार, रामेश्वरम में शयन और पुरी में अन्न प्रसाद ग्रहण करते हैं ।
जांजगीर-चांपा । आस्था, कर्म और पुनर्जन्म के धार्मिक रीति-रिवाजों के प्रतीक जगन्नाथ पुरी धाम को माना जाता हैं । महान तीर्थ के रुप में स्थापित इस मंदिर में भगवान श्रीजगन्नाथ ( कृष्ण ) , उनके भाई बलराम और बहन सुभद्रा की काष्ठ की बनी हुई मूर्ति दर्शनीय हैं । भुवनेश्वर से मात्र 60 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह हिंदुओं के चार पवित्र तीर्थों में से एक हैं । यहां के वैष्णव धर्म की मान्यता हैं कि राधा और कृष्ण की युगल मूर्ति की प्रतीक श्रीजगन्नाथ स्वामी जी ही हैं । शास्त्रों और पुराणों के अनुसार सभी मूर्तियों की प्राण-प्रतिष्ठा राजा इंद्रघुम्न ने मंत्रोच्चारण एवं विधि-विधान से स्वयं की थी । छत्तीसगढ़ अंचल सहित देश-विदेश में आज भगवान जगन्नाथ स्वामी की मूर्ति हैं और हर जगह रथयात्रा महोत्सव के रुप में मनाया जाता हैं । दिनांक 05 जुलाई को जगन्नाथ स्वामी नयन पथ गामी भवतु यानी कि भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा धूमधाम से निकली गई और यह वापस अपने मंदिर में पूजा-अर्चना कर प्रतिस्थापित की गई ।
रथयात्रा महोत्सव आज हिंदूओं का मुख्य त्योहार हैं, जिसमें भगवान जगन्नाथ अपने भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ गुंडिचा मंदिर पहुंचते हैं और फिर वापस अपने मुख्य मंदिर में दशमी तिथि को लौटते हैं । जगन्नाथ रथयात्रा का ऐतिहासिक महत्व -
भगवान जगन्नाथ की पूजा-आराधना -जगन्नाथ रथ यात्रा भगवान जगन्नाथ की पूजा-आराधना और उनकी महिमा का उत्सव मनाने के लिए मनाई जाती हैं । भगवान जगन्नाथ को वैसे भी विष्णु का अवतार माना जाता हैं ।
गुंडिचा मंदिर- गुंडिचा मंदिर भगवान जगन्नाथ की मौसी का घर हैं, जहां वे 8 दिन विश्राम करते हैं और फिर वापस अपने मुख्य मंदिर में लौटते हैं ।
बहुड़ा यात्रा यानी कि वापसी रथयात्रा -भगवान जगन्नाथ की वापसी रथयात्रा को 'बहुड़ा यात्रा ' कहा जाता हैं जो कि दक्षिणाभिमुखी यात्रा हैं।
मंत्रोच्चारण और पुनर्स्थापना-भगवान जगन्नाथ को मंत्रोच्चारण के साथ मंदिर के मठाधीश और उनके लघु भ्राता द्वारा गर्भ गृह में पुनर्स्थापित किया जाता हैं ।
जगन्नाथ रथयात्रा में प्रेस क्लब चांपा की रही हैं भागीदारी ।
प्रेस क्लब चांपा के उर्जावान अध्यक्ष कुलवंत सिंह सलूजा, सचिव डॉ मूलचंद गुप्ता , कोषाध्यक्ष विक्रम तिवारी, बलराम पटेल, शशिभूषण सोनी और मार्गदर्शक डॉ रविन्द्र द्विवेदी सहित अन्यान्य सदस्यों ने जगन्नाथ रथ जयश्री ज्वेलर्स अस्थायी गुंडिचा मंदिर पहुंचकर पूजन-आरती में शामिल हुए । जगन्नाथ रथयात्रा में प्रेस क्लब चांपा के सदस्यों की सामुदायिक भागीदारी एक महत्वपूर्ण पहलू हैं जिसमें लोग भगवान जगन्नाथ भगवान और श्रीविग्रहों की पूजा-आराधना में भाग लिया ।
प्रेस क्लब चांपा अध्यक्ष कुलवंत सलूजा साथियों के साथ जगन्नाथ स्वामी का लिया आशीर्वाद ।
धार्मिक मान्यता हैं कि महाप्रभु जगन्नाथ बद्रीनाथ में स्नान करते हैं, द्वारिकापुरी में श्रृंगार रामेश्वरम में शयन और पुरी में अन्नग्रहण करते हैं। आषाढ़ शुक्ल पक्ष द्वितीया को रथयात्रा निकलती हैं और दशमी तिथि को वापस आती हैं । मुख्य मंदिर से निकलकर भगवान जगन्नाथ स्वामी अस्थायी रुप में किसी घर या आश्रय स्थल जिसे गुंडिचा मंदिर भी कहा जाता हैं उस स्थल पर सात दिनों तक तीनों विग्रह विराजते हैं । इस वर्ष कंचन की नगरी चांपा के जगन्नाथ बड़े मठ मंदिर से निकाली गई रथयात्रा में सात दिनों का सौभाग्य जय श्री ज्वेलर्स के संचालक संतोष और उनकी अर्द्धांगिनी श्रीमति सरिता सोनी को प्राप्त हुआ । प्रेस क्लब चांपा के सदस्यों ने पहुंचकर जगन्नाथ स्वामी जी की पूजा-अर्चना की और अंचल के श्रद्धालु भक्तों के लिए सुख, शांति और समृद्धि के लिए भगवान जगन्नाथ स्वामी से प्रार्थना की ।
आध्यात्मिक महत्व - जगन्नाथ रथयात्रा का आध्यात्मिक महत्व हैं, जिसमें भगवान जगन्नाथ की महिमा और उनकी शक्ति का वर्णन किया जाता हैं । साहित्यकार शशिभूषण सोनी ने कहा कि उत्कल प्रांत के प्रमुख देवता पहले जगन्नाथ स्वामी माने जाते थे और अब यह देवता सर्व प्रदेश के देवता बन गए हैं । इस तरह से जगन्नाथ रथयात्रा एक महत्वपूर्ण त्यौहार बन गया हैं , जिसमें भगवान जगन्नाथ की पूजा-आराधना और उनकी महिमा का उत्सव मनाया जाता हैं ।