प्रेरणादायक उद्धरण , पुछेली चांपा में रहने वाले लोकेश यादव और श्रीमति लीना यादव की कहानी कैसे एक दंपति अपने जीवन में बदलाव लाकर समाज के लिए कुछ कर सकता हैंं ।
बिना किसी स्वार्थ किंतु त्याग और सेवा भावना रखने वाले यादव दंपत्ति हर समाज के लिए प्रेरणास्त्रोत ।
चांपा । चांपा से करीबन लगभग 8 किलोमीटर दूर एक छोटा सा गांव हैं,जिसका नाम पुछेली हैं । सड़क किनारे छोटी-सी गली पार करने के बाद एक मकान दूर से ही स्वच्छ और साफ दिखाई देता हैं । तीन-चार दिन पहले ही इस मकान में लोकेश यादव और उनकी अर्द्धांगिनी श्रीमति लीना यादव ने गृह प्रवेश किया हैं । अपने छोटे से आशियाना का नाम इन्होंने वृंदावन रखा हैं । इस नवनिर्मित आशियाना में स्मृति शेष पिता बुधराम यादव की फोटो दूर से दिखाई देता हैं । शिक्षित यादव पति-पत्नी में एक प्रतिष्ठित किंतू बहुराष्ट्रीय कंपनी में वरिष्ठ समन्वयक जिनका नाम हैं लोकेश यादव दूसरी प्रतिष्ठित निजी स्कूल में शिक्षिका श्रीमति लीना यादव । दोनों ने ऐशो-आराम तथा विलासिता पूर्ण जीवन को छोड़कर साधारण जीवन शैली अपनाई हैं और अब पर्यावरण संरक्षण के लिए काम करने का निर्णय लिया हैं । प्रगतिशील स्वर्ण एवं रजत समिति चांपा सचिव तथा दैनिक मूलमंत्र/ न्यूज़ क्रिएशन/ बिहान छत्तीसगढ़ के लेखक शशिभूषण सोनी से इनका पारिवारिक संबंध हैं । अक्सर घर-परिवार के कार्यक्रमों में आना-जाना लगा रहता हैं ।
हर गांव श्रेष्ठ गांव के उद्घोष लोकेश।
उर्जावान लोकेश यादव बम्हनीडीह ब्लांक के एक छोटे-से गांव पुछेली में रहकर बच्चों को पढ़ाने लगे एवं अब पर्यावरण संरक्षण कि दिशा में काम कर रहे हैं । दोनों ही छत्तीसगढ़ पर्यावरण मित्र मंडल से जुड़कर अपनी सेवाएं दे रहे हैं । उनका नारा हैं 'हर गांव ,श्रेष्ठ गांव ' के उद्घोष लोकेश यादव का कहना हैं कि बचपन से ही पूज्य पिता बुधराम यादव और श्रीमति गंगाबाई यादव मां की मितव्ययिता लगती थी कि बड़े होकर समझ में आया कि रुपए-पैसों का सदुपयोग करना चाहिए , अतएव इसी सीख को अपनाया और यही बातें हमारे बुरे वक्त की सेविंग थी। शशिभूषण सोनी ने कहा कि पिता की शिक्षा ने लोकेश यादव को आत्मनिर्भर बनाने में मदद की और उन्हें अपने जीवन में सही निर्णय लेने में सक्षम बनाया ।
नवोदय विद्यालय से शिक्षित लोकेश यादव से विशेष बातचीत ।
बिहान छत्तीसगढ़ से बातचीत करते हुए लोकेश यादव ने कहा कि 4 लाख रुपये की अच्छी-खासी एमएनसी की नौकरी छोड़कर जब मैनें स्वयं का स्टार्ट-अप करने का फैसला किया , तब सबसे पहले मेरे पिताजी बुधराम यादव ने मेरा साथ दिया । आज मुझे उनके द्वारा दी गई शिक्षा का मतलब समझ में आ रहा हैं । पिता की मितव्ययिता मेरे लिए ही थी । सच में ऐसे ही तो होते हैं पिता जो अपनी ज़रूरतों को पीछे रखकर हमारी पढ़ाई-लिखाई और अन्यान्य शौक पूरे करते हैं और एक-एक पाई जोड़कर हमारे भविष्य को सुरक्षित करते हैं ताकि अगर कभी हम कमाई न कर सकें तो भूखे-प्यासे न रहना पड़े । सच में पिताजी सिर्फ पालते नहीं वो हमें हर हाल में संभालते भी थे। उन्होंने रुआंसे आंखों से स्मरण करते हुए कहा कि आज पूज्य पिताजी हमारे बीच नहीं हैं पर उनके द्वारा दी गई शिक्षा और मार्गदर्शन हमेशा हम सबका मार्ग प्रशस्त करती रहेंगी ।
मितव्ययिता - लोकेश यादव के पिता बुधराम यादव ने जीवनपर्यंत मितव्ययिता की शिक्षा दी, जो उनके जीवन में महत्वपूर्ण साबित हुई ।
आत्मनिर्भरता - शासकीय शिक्षक बुधराम यादव की एक शिक्षा ने लोकेश यादव को आत्मनिर्भर बनाने में मदद की और उन्हें अपने जीवन में सही निर्णय लेने में सक्षम बनाया ।
नवोदय विद्यालय वाले लोकेश यादव गुरुजी ।
लोकेश यादव की कहानी एक प्रेरणादायक उदाहरण हैं जो दिखता हैं कि कैसे एक व्यक्ति अपने जीवन में बदलाव लाकर समाज और विद्यार्थियों के लिए कुछ कर सकता हैं । आज दोनों पति-पत्नी गांव-गांव के बच्चों को तो शिक्षित कर ही रहे हैं बल्कि अब आनलाइन के माध्यम से दूरदराज के विद्यार्थियों को भी शिक्षित कर रहे हैं। अब बच्चे इन्हें नवोदय विद्यालय वाला गुरुजी के नाम से संबोधित कर रहे हैं । गौरतलब है कि नवोदय विद्यालय से शिक्षित हैं लोकेश यादव ।