पैदल चलकर मितानिन ने प्रसूता को पहुंचाया अस्पताल; जशपुर
जशपुर
छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में प्रसव के बाद मितानिन ने गर्भवती महिला को पीठ पर उठाकर बाढ़ के बीच नदी पार कराई। इसके बाद प्रसूता को अस्पताल पहुंचाने के लिए 2 किलोमीटर पैदल चली। घटना मनोरा विकासखंड के सातलुटोली गांव की है।
मिली जानकारी के मुताबिक 2 जुलाई की रात संगीता बाई नाम की महिला को प्रसव पीड़ा शुरू हुई। लगातार बारिश से गांव की पुलिया पहले ही बह चुकी थी। एम्बुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पाई। ग्रामीण इलाका, कच्चे रास्ते, उफनती नदी और रात के अंधेरे ने हालात को और संकट में डाल दिया।
परिजनों ने बताया कि संगीता बाई अपने मायके सतालूटोली गांव में थी। 4 दिन पहले स्थानीय मेडिकल ऑफिसर ने उनकी जांच की थी। प्रसव का समय न होने के कारण उन्हें घर भेज दिया गया था। 1-2 तारीख की रात को उन्हें प्रसव पीड़ा शुरू हुई।
बारिश के बीच परिजनों ने सोनक्यारी ग्राम पंचायत की मितानिन बिफनी बाई तक सूचना पहुंची। बिना एक पल गंवाए वह गांव पहुंचीं। वहां उन्होंने घर पर ही सुरक्षित डिलीवरी करवाई। अगले दिन मां और नवजात को सोनक्यारी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तक ले जाना जरूरी था,
इस दौरान एम्बुलेंस गांव तक नहीं आ सकी। तब बिफनी बाई ने खुद संगीता बाई को अपनी पीठ पर उठाया, दूसरी महिला ने नवजात को संभाला और तीसरी साथ चली। तीनों महिलाएं उफनती नदी को पार कर डेढ़ किलोमीटर पैदल चलती हुईं सोनक्यारी स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचीं।
इस घटना का किसी ने वीडियो बनाकर वायरल कर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय पर बिफनी बाई नहीं आतीं तो शायद मां-बच्चे दोनों की जान को खतरा हो सकता था। ग्रामीणों ने मितानिन को 'फरिश्ता' की संज्ञा दी है। उन्होंने कहा, "ऐसी महिलाएं ही गांव की असली डॉक्टर हैं।"
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. जीएस जात्रा ने घटना की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि मां और बच्चा दोनों पूरी तरह स्वस्थ हैं। उन्होंने मितानिन के कार्य की सराहना की। इसे मानवता की असली सेवा बताया।