जिला

स्कूल बसों की फिटनेस जांच सराहनी, पर कौन से चार बिंदु जांच मे छोड़ दिए ?

चाम्पा,

शासन के निर्देशनुसार सभी स्कूलों के वाहनों के फिटनेस सभी जिलों में  की जा रही है, जिसमे नियमानुसार 1994 के नियम 114 के खंड (1-A) के अनुसार पूरी तरह पीले रंग से रंगा जाना चाहिए और आगे-पीछे “स्कूल बस” स्पष्ट रूप से लिखा होना चाहिए।
2. खिड़कियों में क्षैतिज रॉड
बस की सभी खिड़कियों पर क्षैतिज (Horizontal) सुरक्षा रॉड लगे होने चाहिए।
3. प्राथमिक उपचार पेटी
हर स्कूल बस में प्राथमिक उपचार पेटी (First Aid Box) होना अनिवार्य है।
4. प्रशिक्षित परिचारक (अटेंडेंट)
वाहन में एक ऐसा परिचारक होना चाहिए जो बच्चों की सुरक्षा हेतु प्रशिक्षित हो, विशेष रूप से छोटे बच्चों को चढ़ाने-उतारने में मदद करने हेतु।
5. वाहन का संचालन प्रशिक्षित चालक द्वारा
चालक के पास वैध भारी मोटर वाहन ड्राइविंग लाइसेंस हो और कम से कम 5 वर्ष का अनुभव होना चाहिए।
6. स्कूल से निर्धारित बस स्टॉप के बाहर बच्चे नहीं उतारने की शपथ
चालक कोई भी बच्चा रास्ते में कहीं नहीं उतारेगा, केवल निर्धारित स्थान पर ही उतारेगा।
7. बस का स्पीड गवर्नर चालू हो
वाहन की गति सीमित करने हेतु स्पीड गवर्नर कार्यशील होना चाहिए, जिसकी सीमा निर्धारित है।
8. सीट बेल्ट (यदि सीटें हों)
यदि वाहन में सीट बेल्ट लगी हो, तो उनका उपयोग अनिवार्य है।
9. वाहन के आगे और पीछे स्कूल नाम स्पष्ट लिखा हो
स्कूल बस पर स्कूल का नाम व सम्पर्क क्रमांक स्पष्ट रूप से लिखा जाना चाहिए।
10. डोर लॉकिंग सिस्टम
बस के दरवाजे पर विश्वसनीय लॉकिंग सिस्टम होना चाहिए जिससे दरवाजे स्वतः न खुलें।
11. सीसीटीवी कैमरा और जीपीएस सिस्टम (यदि संभव हो)
सुरक्षा के लिए CCTV और GPS सिस्टम लगवाने की सिफारिश की गई है।
12. प्रेशर हॉर्न निषेध
बसों में प्रेशर हॉर्न नहीं लगे होंगे। यदि पाए जाते हैं तो उन्हें हटाया जाना अनिवार्य है।
13. वाहन की स्वच्छता और सफाई
बस को रोज़ साफ़ और सैनिटाइज किया जाना चाहिए। फर्श और सीटें साफ हों।
14. मोटरयान अधिनियम 1988 की धारा 56 अनुसार फिटनेस प्रमाण पत्र
सभी स्कूल बसों के पास वैध फिटनेस प्रमाण पत्र होना आवश्यक है।
15. प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र (PUC)
सभी बसों के पास वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र होना चाहिए।
16. 12 वर्ष से अधिक पुराने वाहन नहीं चलेंगे
कोई भी स्कूल वाहन 12 साल से अधिक पुराना नहीं होना चाहिए। सभी जिलों में शासन के निर्देशनुसार सभी पालन अनिवार्य रूप से किया जाना चाहिए ।

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