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साइकिल कि प्रासंगिकता और उपयोगिता हमेशा बनी रहेगी पालिकाध्यक्ष प्रदीप नामदेव की पुरानी साइकिल वाली तस्वीर सोशल मीडिया पर छाई रही

हरदीप सिंह सलूजा ब्यूरो जांजगीर- चांपा

चांपा

विश्व साइकिल दिवस के अवसर पर नगर के स्वतंत्र पत्रकार एवं पालिकाध्यक्ष प्रदीप नामदेव के पुराने मित्र अनंत थवाईत ने तीस पैंतीस वर्ष पुरानी तस्वीरों के साथ अपनी यादों को साझा किया इस संबंध मे संपादक कुलवंत सिंह सलूजा से चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि साइकिल की प्रासंगिकता एवं उपयोगिता हमेशा से बनी रही है . पुरानी फिल्मों मे साइकिल के साथ नायक नायिकाओं को गीत गाते हुए बड़ी खुबसूरती के साथ फिल्मांकन किया गया है. डाकिया का नाम लेते ही साइकिल के साथ थैला लटकाए डाकिया की तस्वीर मानस पटल पर उभर आती है . साइकिल राजनीतिक दल की भी पसंद बनी हुई है समाजवादी पार्टी ने साइकिल चिन्ह के साथ उत्तर प्रदेश और केन्द्र मे सरकार भी चलाया है . साइकिल से ही फेरी वाले गांव-गांव घूमकर अपने सामानों की बिक्री करते हुए जीवन यापन करते हैं . 
अनंत थवाईत ने नब्बे के दशक मे अपने अखबार वितरण को याद करते हुए कहा कि वे सबेरे सबेरे साइकिल से ही अख़बार वितरण किया करते थे.आज भी अखबारों के वितरक साइकिल का ही उपयोग करते हुए सभी के घरों में अखबार पहुंचाने का काम करते हैं.खैर..अनंत थवाईत ने विश्व साइकिल दिवस पर जो बातें साझा की उसे हम यहां ज्यों का त्यों प्रस्तुत कर रहे हैं..

.संपादक कुलवंत सिंह सलूजा 


मित्रों किशोरावस्था और युवावस्था के दौरान आने जाने के लिए सफर में साइकिल हमारे अभिन्न साधन हुआ करती थी। हम स्कूल कालेज के दिनों मे साइकिल से ही आना जाना किया करते थे.उन दिनों हम पंद्रह बीस किलोमीटर की यात्रा साइकिल से ही सहज रुप से कर लिया करते थे .आज विश्व साइकिल दिवस के अवसर पर स्मृति पटल पर पुराने दिनों की स्मृतियां उभर आई । और पालिकाध्यक्ष प्रदीप नामदेव की साइकिल वाली पुरानी तस्वीर के साथ हम मित्रों की साइकिल वाली तीस वर्ष से भी अधिक पुरानी तस्वीरों के साथ कुछ बातें भी आप सबसे साझा कर रहा हूं 


बचपन से लेकर जवानी की कहानी को समेटे,इतिहास का पहिया घुमाता यह साइकिल विविध प्रसंगों ,अवसरों का साक्षी है.. कभी चाय दूकान मे तो कभी चौक चौराहों पर अपनी सवारी की उपस्थिति का एहसास कराता यह साइकिल स्कूल कालेज के जमाने मे भी नए नए गुल खिलाती थी एक ओर यह साइकिल शासन प्रशासन के विरोध मे निकाली गई रैली मे शामिल होती थी तो वहीं दूसरी ओर कालेज के सुनहरे दिनों मे जब साइकिल सवार कक्षा मे अध्ययन कर रहा होता तो कालेज की कुछ फुलझडियां इस साइकिल को स्पर्श करके अपनी ख्वाबों को भी सजाती थी । साइकिल के पहिए के ऊपर मटगाड  रबड़ पर आंखों के चित्र और "सुनयना" लिखा शब्द चर्चा का विषय हुआ करती थी । एक रंगकर्मी से लेकर सत्ताधर्मी तक के सफर मे भी प्रदीप नामदेव के संग इस साइकिल की खास भूमिका रही है । पालिका चुनाव मे पार्षद चुनने के बाद "प्रदीप भाई" का दस वर्ष तक इसी साइकिल ने पालिका कार्यालय आने जाने के लिए साथ निभाया और वे जब पालिकाध्यक्ष चुनाव मे विजयी होकर अध्यक्ष पद का शपथ लेने के लिए पालिका कार्यालय की ओर रवाना हुए तब भी इस साइकिल ने उनका साथ निभाया । उनकी साइकिल दो बार चोरी भी हुई और मिल भी गई थी ।

खैर...!
आज विश्व साइकिल दिवस के अवसर पर ,साइकिल चलाने से हमारे जीवन और स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव पड़ता है इस बारे मे भी खुब चर्चा हो रही है .तो ऐसे समय मे मुझे बीते दिनों की  साइकिल चलाने वाली बातें याद आ गई.और उसे आप सबसे साझा कर दिया.
और हां एक बात और तस्वीरों मे दिखाई दे रहे साइकिल सवार समाजवादी पार्टी के साइकिल सवार नहीं है बल्कि ये सभी भाजपा के विचार धारा को धारण कर इस साइकिल से प्रचार प्रसार करने वाले रहे हैं .

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