विश्व पर्यावरण दिवस की सार्थकता वृक्षों की रक्षा करना हमारी जीवन में सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है ....डॉ. क्रांति खूंटे
हरदीप सिंह सलूजा ब्यूरो जांजगीर- चांपा
विश्व पर्यावरण दिवस की सार्थकता वृक्षों की रक्षा करना हमारी जीवन में सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है ....डॉ. क्रांति खूंटे..... कसडोल, अन्तर्राष्ट्रीय महिला पुरुस्कार से सम्मानित डॉ. क्रांति खूंटे ने विश्व पर्यावरण दिवस पर हमारे प्रतिनिधि को एक विशेष भेंट में बताया है कि विश्व पर्यावरण दिवस पर हम सभी देशवासियों वृक्षों के रक्षा कर पर्यावरण पर विशेष ध्यान रखना चाहिए क्योंकि वृक्षों से ही हम शुद्ध वातावरण से अपनी जीवन की रक्षा कर सकते हैं, क्योंकि वृक्षों से ही पर्यावरण की रक्षा की जा सकती है जिससे हम अपनी जीवन शैली को बदल सकते हैं,डॉ. क्रांति खूंटे ने आगे बताया है कि पर्यावरण की सुरक्षा और संरक्षण हेतु पूरे विश्व में पर्यावरण दिवस 5 जून को मनाया जाता है। वर्ष 1972 में पर्यावरण के प्रति वैश्विक स्तर पर राजनीतिक और सामाजिक जागृति लाने हेतु इस दिवस को मनाने की घोषणा संयुक्त राष्ट्र ने की थी। इसे 5 जून से 16 जून तक संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा आयोजित विश्व पर्यावरण सम्मेलन में चर्चा के बाद शुरू किया गया था। यह कई गैर-सरकारी संगठनों, व्यवसायों, सरकारी संस्थाओं द्वारा समर्थित है और पर्यावरण का समर्थन करने वाले संयुक्त राष्ट्र के प्राथमिक आउटरीच दिवस का प्रतिनिधित्व करता है।
5 जून 1973 को पहला विश्व पर्यावरण दिवस मनाया गया।तभी से ही यह समुद्री प्रदूषण, अधिक जनसंख्या, ग्लोबल वार्मिंग, टिकाऊ विकास और वन्यजीव अपराध जैसे पर्यावरणीय मुद्दों पर जागरूकता बढ़ाने का एक मंच रहा है। विश्व पर्यावरण दिवस सार्वजनिक आउटरीच के लिए एक वैश्विक मंच है, जिसमें सालाना 143 से अधिक देशों की भागीदारी होती है। प्रत्येक वर्ष, कार्यक्रम ने पर्यावरणीय कारणों की वकालत करने के लिए व्यवसायों, गैर सरकारी संगठनों, समुदायों, सरकारों और मशहूर हस्तियों के लिए एक थीम और मंच प्रदान किया है।
विश्व पर्यावरण दिवस काइतिहास
वर्ष 1974 में संयुक्त राष्ट्र द्वारा मानव पर्यावरण विषय पर संयुक्त राष्ट्र महासभा का आयोजन (5-16 जून 1972) किया गया था। इसी चर्चा के दौरान विश्व पर्यावरण दिवस का सुझाव भी दिया गया और इसके दो साल बाद, 5 जून 1974 से इसे मनाना भी शुरू कर दिया गया। 1987 में इसके केन्द्र को बदलते रहने का सुझाव सामने आया और उसके बाद से ही इसके आयोजन के लिए अलग अलग देशों को चुना जाता है। इसमें हर साल 143 से अधिक देश भाग लेते हैं और इसमें कई सरकारी, सामाजिक और व्यावसायिक लोग पर्यावरण की सुरक्षा, समस्या आदि विषय पर बात करते हैं।
विश्व पर्यावरण दिवस का महत्व
पर्यावरण को सुधारने हेतु यह दिवस महत्वपूर्ण है जिसमें पूरा विश्व रास्ते में खड़ी चुनौतियों को हल करने का रास्ता निकालता हैं। लोगों में पर्यावरण जागरूकता को जगाने के लिए संयुक्त राष्ट्र द्वारा संचालित विश्व पर्यावरण दिवस दुनिया का सबसे बड़ा वार्षिक आयोजन है। इसका मुख्य उद्देश्य हमारी प्रकृति की रक्षा के लिए जागरूकता बढ़ाना और दिन-प्रतिदिन बढ़ रहे विभिन्न पर्यावरणीय मुद्दों को देखना है।
वार्षिक विषय और प्रमुख पहल और उपलब्धियां के बारे उन्होंने बताया है कि लगभग पाँच दशकों से, विश्व पर्यावरण दिवस जागरूकता बढ़ा रहा है, कार्यवाही का समर्थन कर रहा है और पर्यावरण के लिए बदलाव ला रहा है। इसके इतिहास में प्रमुख उपलब्धियों की एक समयरेखा यहां दी गई है:
2005 के विश्व पर्यावरण दिवस की थीम "ग्रीन सिटीज" थी और नारा था "प्लांट फॉर द प्लैनेट!"।
2006 इस साल विषय था मरुस्थल और मरुस्थलीकरण और नारा था "शुष्क भूमि को मरुस्थल न बनाएं"।नारे ने शुष्क भूमि की रक्षा के महत्व पर बल दिया। विश्व पर्यावरण दिवस 2006 का मुख्य अंतर्राष्ट्रीय समारोह अल्जीरिया में आयोजित किया गया था।
2007 के विश्व पर्यावरण दिवस का विषय था "मेल्टिंग आइस - ए हॉट टॉपिक?" अंतर्राष्ट्रीय ध्रुवीय वर्ष के दौरान, विश्व पर्यावरण दिवस 2007 ने उन प्रभावों पर ध्यान केंद्रित किया जो जलवायु परिवर्तन के कारण ध्रुवीय पारिस्थितिक तंत्र और समुदायों पर व दुनिया के अन्य बर्फीले और बर्फ से ढके क्षेत्रों पर हो रहे हैं और जिनका वैश्विक प्रभाव पड़ रहा है।
विश्व पर्यावरण दिवस 2007 के मुख्य अंतर्राष्ट्रीय समारोह आर्कटिक सर्कल के उत्तर में एक शहर ट्रोम्सो, नॉर्वे में आयोजित किए गए थे।
मिस्र ने 2007 विश्व पर्यावरण दिवस के लिए एक डाक टिकट जारी किया था,डॉ. क्रांति खूंटे ने देशवासियों से अपील करते हुए कहा है कि हम सभी परिवार सहित शपथ ले कि हम वृक्षों की रक्षा कर शुद्ध वातावरण में अपनी जीवन शैली को बनाऐ रखें,तब ही विश्व पर्यावरण की सार्थकता बनी रहेगी !