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सुशासन तिहार अंतर्गत समाधान शिविर का किया गया आयोजन जल संरक्षण हेतु जन-जागरूकता का प्रभावशाली आयोजन

सूरजपुर/21 मई 2025/ 

बिहान छत्तीसगढ़ संवादाता प्रतापपुर सूरज निर्मलकर

आज जनपद पंचायत सूरजपुर के अंतर्गत ग्राम पंचायत कल्याणपुर में ’’सुशासन तिहार’’ के अंतर्गत समाधान शिविर का आयोजन श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े मंत्री महिला एवं बाल विकास विभाग के उपस्थिति में किया गया। जिसमें मोर गांव मोर पानी एवम जल शक्ति अभियान के तहत एक सशक्त एवं जनहितकारी कार्यक्रम संपन्न हुआ। 

 मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े द्वारा शिविर में सभी नागरिकों को जल संरक्षण की शपथ दिलाई गई। उन्होंने वर्षा जल संचयन के महत्व को रेखांकित करते हुए नागरिकों से रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम और सोखता गड्ढा जैसे उपायों को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण हम सभी की नैतिक जिम्मेदारी है और यह समय की आवश्यकता भी है। जल संकट की भयावहता को रोकने के लिए जनसहभागिता से जल संचयन को एक जन आंदोलन का रूप देना अत्यंत आवश्यक है।

इस अवसर पर श्रीमती कमलेश नंदनी साहु, मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत सूरजपुर ने जानकारी दी कि जिले में मोर गांव मोर पानी मिशन के अंतर्गत जल शक्ति अभियान का क्रियान्वयन किया जा रहा है, जिसके पाँच प्रमुख घटक हैंकृ(1) जल संरक्षण एवं वर्षा जल संचयन, (2) वाटर शेड विकास, (3) पारंपरिक एवं अन्य जल टैंकों का नवीनीकरण, (4) बोरवेल रिचार्ज संरचनाओं का पुनः उपयोग, तथा (5) जल स्रोतों की समग्र संवर्धन। उन्होंने अभियान का प्रमुख स्लोगन बारिश को वहीं एकत्र करें, जहाँ गिरे, जब गिरे को दोहराते हुए लोगों से इसमें सक्रिय भागीदारी का आग्रह किया।

शिविर में अनेक गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति रही, जिनमें श्री बाबूलाल अग्रवाल, श्रीमती किरण केराम, जिला पंचायत सदस्य; श्रीमती स्वाती संत सिंह, अध्यक्ष, जनपद पंचायत सूरजपुर; श्री मनमत कुमार बछाड़, उपाध्यक्ष; लोकान्ता सिंह एवं राजकुमारी पैकरा, जनपद सदस्य; ठाकुर पैकरा; श्री बाबूलाल शाह, श्री मोहन शर्मा, श्री दिपेन्द्र दुबे, श्रीमती शिवानी जायसवाल, एसडीएम सूरजपुर; श्री विनोद सिंह, सीईओ जनपद पंचायत सूरजपुर; श्री सुरेंद्र पैकरा तहसीलदार लटोरी; श्री शैलेन्द्र कुमार, नायब तहसीलदार लटोरी; श्री विमल सिंह, एसडीओ, आरईएस; तथा संबंधित क्लस्टर के सभी सरपंच, सचिव एवं ग्रामवासी शामिल रहे।

यह कार्यक्रम न केवल जल संरक्षण के प्रति सामूहिक चेतना का परिचायक बना, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक सार्थक कदम सिद्ध होगा।

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