शराब के नशे में स्कूल आने के आरोपों से घिरे प्रधानपाठक, बच्चों ने कहा— डर के साए में पढ़ाई
इमरान खोखर ब्यूरो चीफ मुंगेली
मुंगेली। भारतीय संस्कृति में गुरु को भगवान का दर्जा दिया गया है। शिक्षक ही वह व्यक्ति होता है जो बच्चों के भविष्य को आकार देता है, उन्हें संस्कार देता है और जीवन की सही दिशा दिखाता है। लेकिन जब किसी शिक्षक के व्यवहार पर ही गंभीर सवाल खड़े होने लगें, तो यह केवल शिक्षा व्यवस्था ही नहीं बल्कि पूरे समाज के लिए चिंता का विषय बन जाता है। ऐसा ही एक गंभीर मामला जिला मुख्यालय से लगभग पांच किलोमीटर दूर स्थित ग्राम चमारी (रोहरा) के शासकीय प्राथमिक विद्यालय से सामने आया है, जहां पदस्थ प्रधानपाठक पर शराब के नशे में विद्यालय आने, परिसर में शराब सेवन करने, बच्चों के साथ अभद्र व्यवहार करने तथा मारपीट करने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
मिली जानकारी के अनुसार विद्यालय में कक्षा पहली से पांचवीं तक कुल 26 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। यहां शासन द्वारा दो शिक्षकों की पदस्थापना की गई है, जिनमें एक प्रधानपाठक और एक सहायक शिक्षक शामिल हैं। आरोपों के बाद पूरे गांव में इस मामले को लेकर नाराजगी और चिंता का माहौल है।
मीडिया पहुंची तो स्कूल में अनुपस्थित मिले प्रधानपाठक
मामले की जानकारी मिलने के बाद जब मीडिया की टीम विद्यालय पहुंची तो वहां केवल सहायक शिक्षक मौजूद मिले। संबंधित प्रधानपाठक विद्यालय में उपस्थित नहीं थे। पूछताछ के दौरान सहायक शिक्षक ने बताया कि प्रधानपाठक इंद्रा सिंह कंवर नियमित रूप से विद्यालय नहीं आते और कभी-कभार ही स्कूल पहुंचते हैं।
इसके बाद जब बच्चों, अभिभावकों और ग्रामीणों से चर्चा की गई तो कई गंभीर आरोप सामने आए।
बच्चों ने लगाए नशे में स्कूल आने और मारपीट के आरोप
विद्यालय में अध्ययनरत बच्चों एवं उनके अभिभावकों का आरोप है कि प्रधानपाठक जब भी स्कूल आते हैं तो कई बार शराब के नशे में रहते हैं। इतना ही नहीं, आरोप यह भी है कि वे विद्यालय परिसर में ही शराब का सेवन करते हैं।
बच्चों ने बताया कि जब वे उन्हें ऐसा करने से मना करते हैं तो प्रधानपाठक कथित तौर पर स्कूल का दरवाजा और खिड़कियां बंद कर देते हैं तथा गाली-गलौज करते हुए मारपीट भी करते हैं। बच्चों का कहना है कि इस वजह से उनमें भय का माहौल बन गया है और कई बच्चे स्कूल आने से डरने लगे हैं।
हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हो सकी है और जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
अभिभावकों ने कहा— शिक्षा के मंदिर में ऐसा माहौल चिंताजनक
ग्रामीणों और अभिभावकों का कहना है कि विद्यालय बच्चों के भविष्य निर्माण का स्थान होता है। यदि शिक्षक का आचरण ही विवादों के घेरे में होगा तो इसका सीधा असर बच्चों की शिक्षा और मानसिक स्थिति पर पड़ेगा।
अभिभावकों का आरोप है कि बच्चे भय और असुरक्षा के कारण खुलकर पढ़ाई नहीं कर पा रहे हैं। उनका कहना है कि यदि समय रहते मामले की जांच नहीं हुई तो बच्चों का भविष्य प्रभावित हो सकता है।
तीन बार निलंबित होने का भी दावा
ग्रामीणों ने यह भी दावा किया है कि संबंधित प्रधानपाठक अपने सेवा काल में पूर्व में तीन बार निलंबित हो चुके हैं और हर बार उनकी पुनः बहाली हो गई। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और न ही इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक दस्तावेज सामने आया है।
स्कूल में मूलभूत सुविधाओं की भी कमी
ग्रामीणों ने विद्यालय में मूलभूत सुविधाओं के अभाव का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना है कि विद्यालय में शौचालय की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है और स्वच्छ पेयजल की भी स्थायी सुविधा उपलब्ध नहीं है। बच्चों को पीने के पानी के लिए परेशानी उठानी पड़ती है।
ग्रामीणों का कहना है कि शिक्षा की गुणवत्ता के साथ-साथ मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता भी उतनी ही आवश्यक है।
जांच और कार्रवाई की मांग तेज
गांव के लोगों और अभिभावकों ने जिला प्रशासन तथा शिक्षा विभाग से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जांच में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित शिक्षक के विरुद्ध कड़ी विभागीय कार्रवाई की जानी चाहिए और बच्चों के हित में आवश्यक कदम उठाए जाने चाहिए।
साथ ही उन्होंने विद्यालय में शौचालय, पेयजल और अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की भी मांग की है।
बीईओ बोले— जांच के बाद होगी कार्रवाई
इस संबंध में विकासखंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) विमित्र धृतलहरे ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में आया है। उन्होंने बताया कि पूरे मामले की जांच कराई जाएगी और यदि जांच में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो नियमानुसार उचित कार्रवाई की जाएगी।