निजी विद्यालयों में पारदर्शिता, गुणवत्ता और छात्र हित सर्वोपरि: प्रशासन सख्त, संस्था प्रमुखों को दिए स्पष्ट निर्देश आरटीई, अपार आईडी, यू-डाइस, शुल्क नियंत्रण, छात्र सुरक्षा और स्कूल बसों के संचालन पर विशेष जोर
प्रद्युम्न शुक्ल, ब्यूरो चीफ कांकेर बिहान छत्तीसगढ़
उत्तर बस्तर कांकेर, 19 जुलाई 2026
जिले में संचालित अशासकीय (निजी) विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, पारदर्शिता, जवाबदेही एवं विद्यार्थियों के अधिकारों की प्रभावी सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा शनिवार को निजी विद्यालयों के संस्था प्रमुखों की महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। कलेक्टर निलेश कुमार महादेव क्षीरसागर के निर्देशानुसार आयोजित इस बैठक में जिले के विभिन्न निजी विद्यालयों के संचालकों एवं संस्था प्रमुखों ने भाग लिया।
बैठक की अध्यक्षता करते हुए जिला शिक्षा अधिकारी ने कहा कि प्रत्येक निजी विद्यालय की प्राथमिक जिम्मेदारी विद्यार्थियों को सुरक्षित, गुणवत्तापूर्ण, अनुशासित एवं नियमों के अनुरूप शिक्षा उपलब्ध कराना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि शासन की छात्र हितैषी योजनाओं का लाभ प्रत्येक पात्र विद्यार्थी तक समयबद्ध, पारदर्शी एवं बिना किसी भेदभाव के पहुंचना चाहिए। शिक्षा केवल परीक्षा परिणाम तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों के बौद्धिक, नैतिक, सामाजिक एवं शारीरिक विकास के लिए सकारात्मक वातावरण उपलब्ध कराना भी विद्यालयों का दायित्व है।
बैठक में शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष जोर दिया गया। अधिकारियों ने संस्था प्रमुखों को निर्देशित किया कि आरटीई के अंतर्गत प्रवेशित विद्यार्थियों को शासन द्वारा निर्धारित सभी सुविधाएं अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराई जाएं तथा उनसे किसी भी प्रकार का अतिरिक्त शुल्क न लिया जाए। ऐसे विद्यार्थियों के साथ किसी भी प्रकार का भेदभाव न हो और उन्हें अन्य विद्यार्थियों के समान सम्मान, अवसर एवं सुविधाएं प्रदान की जाएं। जिला शिक्षा अधिकारी एवं डीएमसी समग्र शिक्षा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि आरटीई के नियमों का उल्लंघन पाया गया तो संबंधित संस्था के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।
बैठक के दौरान डिजिटल शिक्षा व्यवस्था एवं शैक्षणिक अभिलेखों के सुव्यवस्थित संधारण पर भी विस्तार से चर्चा की गई। सभी विद्यालयों को निर्देशित किया गया कि यू-डाइस (UDISE+) से संबंधित समस्त जानकारी, स्टूडेंट प्रोग्रेशन का कार्य एवं विद्यार्थियों की अपार आईडी (APAAR ID) निर्धारित समय-सीमा में शत-प्रतिशत पूर्ण करें। अधिकारियों ने कहा कि प्रत्येक विद्यार्थी का शैक्षणिक रिकॉर्ड अद्यतन रखा जाए तथा विभागीय पोर्टलों पर सही एवं प्रमाणिक जानकारी समय पर अपलोड की जाए, जिससे भविष्य में विद्यार्थियों को किसी प्रकार की प्रशासनिक अथवा शैक्षणिक कठिनाई का सामना न करना पड़े।
बैठक में विद्यार्थियों को निःशुल्क पाठ्यपुस्तकों के समयबद्ध वितरण तथा शासन द्वारा संचालित विभिन्न छात्र हितैषी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी विशेष बल दिया गया। अधिकारियों ने कहा कि किसी भी पात्र विद्यार्थी को केवल लापरवाही या प्रशासनिक त्रुटि के कारण शासन की योजनाओं से वंचित नहीं रहना चाहिए। सभी विद्यालयों को विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति, शैक्षणिक प्रगति एवं समग्र विकास पर निरंतर निगरानी रखने के निर्देश दिए गए।
विद्यालयों में छात्र सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए स्कूल बसों के सुरक्षित संचालन पर भी विस्तार से समीक्षा की गई। संस्था प्रमुखों को निर्देशित किया गया कि प्रत्येक स्कूल बस का फिटनेस प्रमाण-पत्र, बीमा, परमिट एवं अन्य आवश्यक दस्तावेज पूर्ण रूप से वैध हों। बस चालकों एवं परिचालकों के वैध लाइसेंस, पुलिस सत्यापन, निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन, फर्स्ट एड किट, अग्निशमन यंत्र, आपातकालीन निकास व्यवस्था, सीसीटीवी (जहां लागू हो) तथा परिवहन विभाग द्वारा निर्धारित सभी सुरक्षा नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए। अधिकारियों ने कहा कि विद्यार्थियों की सुरक्षा के साथ किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
बैठक में विद्यालयों में अनुशासन, स्वच्छता, सुरक्षित एवं सकारात्मक शिक्षण वातावरण, अभिभावकों के साथ बेहतर समन्वय, नियमित शैक्षणिक गतिविधियों तथा विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर भी विस्तृत चर्चा की गई। संस्था प्रमुखों को निर्देशित किया गया कि विद्यालयों में शिकायत निवारण व्यवस्था प्रभावी रहे तथा अभिभावकों की समस्याओं का समयबद्ध समाधान किया जाए।
बैठक के अंत में उपस्थित सभी निजी विद्यालयों के संस्था प्रमुखों ने शासन के दिशा-निर्देशों का पूर्णतः पालन करने, विद्यार्थियों के हितों की रक्षा करने तथा गुणवत्तापूर्ण, पारदर्शी एवं उत्तरदायी शिक्षा व्यवस्था विकसित करने का विश्वास दिलाया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि आगामी समय में निजी विद्यालयों की नियमित समीक्षा एवं निरीक्षण जारी रहेगा, ताकि जिले में शिक्षा व्यवस्था अधिक प्रभावी, पारदर्शी, सुरक्षित एवं छात्र-केंद्रित बन सके।