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कांकेर की ऐतिहासिक पुरानी कचहरी बनी ज्ञान, संस्कृति और सफलता का संगम हर दिन हजारों सपनों को मिल रही नई उड़ान, 89 युवाओं ने हासिल की शासकीय सेवा में सफलता

सेंट्रल लाइब्रेरी सह मावा मोदोल बना प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का प्रमुख केंद्र, आदिवासी संस्कृति संरक्षण में भी निभा रहा अहम भूमिका

प्रद्युम्न शुक्ल, ब्यूरो चीफ कांकेर बिहान छत्तीसगढ़ 

उत्तर बस्तर कांकेर, 25 जून 2026। जिला मुख्यालय कांकेर स्थित ऐतिहासिक पुरानी कचहरी आज शिक्षा, संस्कृति और युवा सशक्तिकरण का जीवंत प्रतीक बनकर उभर रही है। कभी न्यायिक गतिविधियों का केंद्र रहा यह परिसर अब विद्यार्थियों के सपनों को साकार करने और जिले की सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है।

कलेक्टर श्री निलेश कुमार महादेव क्षीरसागर एवं जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री हरेश मंडावी के मार्गदर्शन में संचालित सेंट्रल लाइब्रेरी सह मावा मोदोल जिले के युवाओं के लिए आशा और प्रेरणा का केंद्र बन गया है। जिला प्रशासन की महत्वाकांक्षी पहल ‘हमर लक्ष्य’ के अंतर्गत विकसित यह संस्थान शिक्षा, कैरियर मार्गदर्शन, भाषा संरक्षण एवं सांस्कृतिक संवर्धन का अनूठा मॉडल प्रस्तुत कर रहा है।

सेंट्रल लाइब्रेरी सह मावा मोदोल के नोडल अधिकारी एवं जिला मिशन समन्वयक श्री नवनीत पटेल ने बताया कि प्रतिदिन लगभग एक हजार विद्यार्थी यहां अध्ययन कर रहे हैं। शांत, अनुशासित एवं आधुनिक अध्ययन वातावरण के कारण यह केंद्र प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं की पहली पसंद बन गया है। वर्तमान में छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग सहित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए विशेष मार्गदर्शन कक्षाएं संचालित की जा रही हैं। वहीं उप निरीक्षक भर्ती परीक्षा की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए मैराथन क्लासेस भी आयोजित की जा रही हैं, जिनका लाभ बड़ी संख्या में युवा उठा रहे हैं।

जिला शिक्षा अधिकारी श्री रमेश कुमार निषाद के मार्गदर्शन में इस केंद्र को और अधिक समृद्ध एवं सुविधायुक्त बनाने की दिशा में लगातार कार्य किया जा रहा है। यहां उपलब्ध संसाधनों, अनुभवी मार्गदर्शन और अनुकूल अध्ययन वातावरण का ही परिणाम है कि अब तक 89 युवा विभिन्न शासकीय सेवाओं में चयनित होकर सफलता की नई कहानी लिख चुके हैं। यह उपलब्धि जिले के अन्य विद्यार्थियों के लिए भी प्रेरणास्रोत बन रही है।

पुरानी कचहरी परिसर केवल शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि आदिवासी संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण का भी प्रमुख स्थल बन चुका है। यहां स्थापित कोयाबाना आदिवासी संग्रहालय जनजातीय जीवन, संस्कृति, लोक परंपराओं और इतिहास को सहेजने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहा है। साथ ही गोंडी एवं हल्बी भाषाओं के संरक्षण और संवर्धन के लिए नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम भी संचालित किए जा रहे हैं। वर्तमान में लगभग 80 विद्यार्थी इन भाषाओं का अध्ययन कर अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ाव मजबूत कर रहे हैं।

ऐतिहासिक प्रवेश द्वार, सुव्यवस्थित उद्यान, हरियाली से आच्छादित परिसर और स्वच्छ वातावरण इस स्थल की सुंदरता में चार चांद लगाते हैं। यहां आने वाले विद्यार्थी, अभिभावक एवं पर्यटक न केवल अध्ययन और सांस्कृतिक गतिविधियों का लाभ उठा रहे हैं, बल्कि इस अनूठी पहल की सराहना भी कर रहे हैं।

आज कांकेर की पुरानी कचहरी केवल एक ऐतिहासिक धरोहर नहीं, बल्कि शिक्षा, संस्कृति और युवाओं के सुनहरे भविष्य को आकार देने वाला प्रेरणादायी केंद्र बन चुकी है।

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