जिला

दूरस्थ विद्यालयों में शैक्षणिक स्तर उन्नयन हेतु विशेष समीक्षा बैठक आयोजित

अधिगम परिणामों में सुधार, एफएलएन एवं नवाचार आधारित शिक्षण पर दिया गया विशेष जोर

प्रद्युम्न शुक्ल ब्यूरो चीफ कांकेर बिहान छत्तीसगढ़ 

उत्तर बस्तर कांकेर, 25 जून 2026। कलेक्टर श्री निलेश कुमार क्षीरसागर एवं जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री हरेश मंडावी के मार्गदर्शन में जिले के सुदूर एवं वनांचल क्षेत्रों के विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से शिक्षा विभाग द्वारा लगातार समीक्षा बैठकों का आयोजन किया जा रहा है। इसी क्रम में विकासखंड अंतागढ़ के आमाबेड़ा एवं अंतागढ़ में विशेष शैक्षणिक समीक्षा बैठक संपन्न हुई।

स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय आमाबेड़ा एवं अंतागढ़ में आयोजित इस बैठक में विद्यालयों की शैक्षणिक प्रगति, विद्यार्थियों के अधिगम स्तर, नियमित शिक्षण व्यवस्था, विद्यालयवार उपलब्धियों तथा क्षेत्रीय आवश्यकताओं का विस्तृत परीक्षण किया गया। बैठक में आधारभूत साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान (एफएलएन) को मजबूत बनाने, कमजोर विद्यार्थियों के लिए अतिरिक्त शैक्षणिक सहयोग उपलब्ध कराने तथा सतत एवं व्यापक मूल्यांकन प्रणाली को प्रभावी ढंग से लागू करने पर विशेष चर्चा की गई।

साथ ही विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति बढ़ाने, शाला त्यागी बच्चों को पुनः शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने, पुस्तकालयों के बेहतर उपयोग, गतिविधि आधारित शिक्षण, प्रयोगात्मक शिक्षा तथा स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप नवाचारी शिक्षण पद्धतियों को अपनाने पर बल दिया गया। बैठक में क्षेत्र के संकुल प्राचार्य, संकुल समन्वयक एवं विभिन्न विद्यालयों के संस्था प्रमुख उपस्थित रहे।

जिला शिक्षा अधिकारी श्री रमेश कुमार निषाद ने संस्था प्रमुखों को निर्देशित करते हुए कहा कि प्रत्येक विद्यार्थी की शैक्षणिक प्रगति का नियमित आकलन किया जाए तथा भाषा एवं गणितीय दक्षता विकसित करने के लिए विशेष रणनीति के साथ कार्य किया जाए। उन्होंने विद्यालयों में परिणामोन्मुखी, नवाचारी एवं प्रभावी शैक्षणिक गतिविधियों के संचालन को प्राथमिकता देने पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि दूरस्थ एवं आदिवासी अंचलों के विद्यार्थियों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाना विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। शिक्षा का उद्देश्य केवल पाठ्यक्रम पूर्ण करना नहीं, बल्कि प्रत्येक विद्यार्थी में अपेक्षित अधिगम क्षमता विकसित करना है। इसके लिए संस्था प्रमुखों को नियमित शैक्षणिक अनुश्रवण, कक्षा निरीक्षण, शिक्षकों के मार्गदर्शन तथा सतत अकादमिक सहयोग की व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश दिए गए।

बैठक के दौरान उपस्थित अधिकारियों एवं संस्था प्रमुखों ने क्षेत्रीय स्तर पर सामने आने वाली शैक्षणिक चुनौतियों एवं उनके समाधान संबंधी सुझाव साझा किए। सभी प्रतिभागियों ने समन्वित प्रयास, सतत निगरानी एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षण व्यवस्था के माध्यम से विद्यार्थियों के शैक्षणिक विकास को नई दिशा देने का संकल्प लिया।

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