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नगर पालिका मुंगेली के सरकारी कर्मचारी जनप्रतिनिधियों के घरों में झाड़ू-पोछा और बर्तन धो रहे हैं, सीएमओ ने कहा- नोटिस जारी कर होगी कार्रवाई

इमरान खोखर बिहान ब्यूरो चीफ 


 

 मुंगेली: नगरपालिका मुंगेली में वर्षों से चली आ रही एक ऐसी व्यवस्था अब सवालों के घेरे में है, जिसने सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए है,आरोप है कि नगरपालिका के लगभग आधा दर्जन नियमित और प्लेसमेंट कर्मचारी सरकारी वेतन लेने के बावजूद जनप्रतिनिधियों के निजी आवासों में घरेलू कार्य कर रहे हैं। इनमें झाड़ू-पोछा लगाने, बर्तन साफ करने और अन्य निजी सेवाएं देने जैसे काम भी शामिल बताए जा रहे हैं।सबसे हैरानी की बात यह है कि यह कोई नई व्यवस्था नहीं, बल्कि लंबे समय से चली आ रही परंपरा बताई जा रही है। बावजूद इसके अब तक किसी जिम्मेदार अधिकारी ने इस पर प्रभावी कार्रवाई नहीं की। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर इन कर्मचारियों को किसके निर्देश पर जनप्रतिनिधियों के निजी कार्यों में लगाया गया है और इसके लिए जवाबदेह कौन है?

कर्मचारियों की कमी का रोना, लेकिन कर्मचारी निजी सेवाओं में व्यस्त
एक ओर नगरपालिका प्रशासन लगातार कर्मचारियों की कमी का हवाला देता रहा है, वहीं दूसरी ओर उन्हीं कर्मचारियों का एक हिस्सा नगरपालिका कार्यालय और जनहित कार्यों को छोड़कर जनप्रतिनिधियों के घरों में सेवा देता नजर आ रहा है। इससे नगर की सफाई व्यवस्था और अन्य प्रशासनिक कार्यों पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।स्थानीय लोगों का कहना है कि जब कर्मचारियों का वेतन सरकारी खजाने से दिया जा रहा है तो उनका उपयोग केवल शासकीय कार्यों के लिए होना चाहिए। निजी कार्यों में उनकी तैनाती न केवल नियमों के विरुद्ध है बल्कि सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग की श्रेणी में भी आती है।

सदियों पुरानी परंपरा या सरकारी व्यवस्था पर सवाल?
नगरपालिका के जानकारों के अनुसार यह व्यवस्था वर्षों से चली आ रही है और कई बार इसकी चर्चा भी हुई, लेकिन कभी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, यही कारण है कि यह अब एक "परंपरा" का रूप ले चुकी है। हालांकि सवाल यह है कि क्या किसी गलत व्यवस्था को लंबे समय तक चलने देने से वह वैध हो जाती है?

सीएमओ ने लिया संज्ञान, नोटिस जारी
मामला सामने आने के बाद नगरपालिका के मुख्य नगरपालिका अधिकारी (सीएमओ) होरी सिंह ने संज्ञान लेते हुए संबंधित कर्मचारियों को नोटिस जारी करने की पुष्टि की है। सीएमओ का कहना है कि मामले की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदारों के विरुद्ध भी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

जिले में और भी हो सकती हैं ऐसी व्यवस्थाएं
सूत्रों की मानें तो मुंगेली जिले में ऐसे कई शासकीय कर्मचारी हैं जो वेतन तो सरकार से प्राप्त कर रहे हैं, लेकिन उनकी सेवाएं प्रभावशाली नेताओं और अधिकारियों के निजी कार्यों में ली जा रही हैं। यदि इसकी व्यापक जांच कराई जाए तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं और शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो सकते हैं।

अब देखना होगा कि सीएमओ द्वारा जारी नोटिस और जांच की प्रक्रिया केवल औपचारिकता साबित होती है या फिर वास्तव में जिम्मेदार लोगों तक कार्रवाई की आंच पहुंचती है। फिलहाल यह मामला नगरपालिका मुंगेली की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

बड़ा सवाल:-
* सरकारी वेतन पाने वाले कर्मचारी निजी कार्यों में क्यों लगे हैं?
* इन कर्मचारियों को जनप्रतिनिधियों के घरों में किसके आदेश पर भेजा गया?
* क्या नगरपालिका प्रशासन को इसकी जानकारी थी?
* यदि जानकारी थी तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
* क्या जिले के अन्य विभागों में भी ऐसी व्यवस्था संचालित हो रही है?

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