अंतागढ़ थाना प्रभारी रमेश जायसवाल पर फिर उठे सवाल, पत्रकारों से कथित दुर्व्यवहार के बाद भड़का विरोध
प्रद्युम्न शुक्ल ब्यूरो चीफ कांकेर बिहान छत्तीसगढ़
कांकेर। अंतागढ़ थाना एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गया है। पत्रकारों के साथ कथित दुर्व्यवहार के मामले ने अब तूल पकड़ लिया है, जिसके विरोध में क्षेत्र के पत्रकार थाना परिसर के बाहर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए हैं। पत्रकारों का आरोप है कि थाना प्रभारी रमेश जायसवाल ने एक वरिष्ठ पत्रकार के साथ अभद्र व्यवहार करते हुए पद का रौब दिखाया और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया।
बताया जा रहा है कि पत्रकार एक मामले की कवरेज के लिए थाना पहुंचे थे, जहां मामूली बात को लेकर थाना प्रभारी रमेश जायसवाल भड़क गए। घटना के बाद पत्रकारों में भारी नाराजगी देखने को मिली और उन्होंने थाना प्रभारी को हटाने की मांग को लेकर मोर्चा खोल दिया। आंदोलन को स्थानीय पत्रकारों के साथ-साथ कांकेर प्रेस क्लब के पदाधिकारियों का भी समर्थन मिल रहा है।
इस पूरे विवाद के बीच एक दिन पहले सामने आई घटना ने भी थाना प्रभारी रमेश जायसवाल की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दरअसल, अंतागढ़ में सरपंच आंदोलन के दौरान मुख्य मार्ग घंटों जाम रहा और यात्री भीषण गर्मी में परेशान होते रहे। आरोप है कि उस दौरान भी थाना प्रभारी आम लोगों और पत्रकारों की मदद करने के बजाय एक दुकान में बैठकर कूलर की हवा खाते नजर आए थे। रास्ता बंद होने पर कुछ पत्रकारों ने वैकल्पिक मार्ग और सहयोग की जानकारी मांगी, लेकिन थाना प्रभारी ने संवेदनशीलता दिखाने के बजाय उन्हें वापस लौटने की सलाह दे दी थी।
स्थानीय लोगों और पत्रकारों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब रमेश जायसवाल के व्यवहार को लेकर सवाल उठे हों। इससे पहले भी उन पर आम लोगों और पत्रकारों से रौबदार एवं असहयोगात्मक रवैया अपनाने के आरोप लग चुके हैं। अब लगातार सामने आ रही घटनाओं के बाद क्षेत्र में यह चर्चा तेज हो गई है कि आखिरकार पुलिस का रवैया जनता और मीडिया के प्रति इतना कठोर क्यों होता जा रहा है।
हालांकि थाना प्रभारी रमेश जायसवाल ने वर्तमान विवाद में किसी भी तरह की अभद्रता से इनकार करते हुए कहा है कि उन्होंने केवल “मर्यादित तरीके से बैठने” की बात कही थी। लेकिन पत्रकारों का सवाल है कि यदि व्यवहार सामान्य था तो फिर विरोध और धरने की स्थिति क्यों बनी।
फिलहाल मामला अब प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा का विषय बन चुका है तथा पत्रकारों ने स्पष्ट कर दिया है कि कार्रवाई नहीं होने तक आंदोलन जारी रहेगा।