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धर्मांतरण और डी-लिस्टिंग के मुद्दे पर दिल्ली में गूंजेगी बस्तर की आवाज : कांकेर से 556 समाजजन दिल्ली रवाना”

प्रद्युम्न शुक्ल ब्यूरो चीफ कांकेर बिहान छत्तीसगढ़ 

कांकेर।
जनजातीय समाज की आस्था, संस्कृति, परंपरा एवं संवैधानिक अधिकारों से जुड़े विषयों को राष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी ढंग से रखने के उद्देश्य से आयोजित “जनजाति सांस्कृतिक समागम” कार्यक्रम में सहभागिता हेतु कांकेर जिले से 556 कार्यकर्ताओं एवं समाजजनों का दल दिल्ली के लिए रवाना हुआ है। यह राष्ट्रीय आयोजन 24 मई 2026 को लाल किला मैदान, दिल्ली में आयोजित होगा।

इस यात्रा का नेतृत्व जनजातीय सुरक्षा मंच के जिला संयोजक श्री देवेंद्र टेकाम एवं सह संयोजक श्री ईश्वर सिंह कवाड़े द्वारा किया जा रहा है। कार्यक्रम को लेकर जिलेभर में लंबे समय से योजनाबद्ध तैयारी की जा रही थी। गांव-गांव संपर्क कर समाज के लोगों को अभियान के उद्देश्य एवं महत्व से अवगत कराया गया।

आज के दौर में जहां अधिकांश आंदोलनों एवं आयोजनों में लोगों को लाने-ले जाने, भोजन एवं अन्य व्यवस्थाओं का पूरा खर्च नेतृत्वकर्ताओं अथवा संगठनों द्वारा वहन किया जाता है, वहीं इस अभियान की सबसे विशेष बात यह है कि दिल्ली जाने वाले प्रत्येक सहभागी ने स्वयं अपने टिकट एवं भोजन व्यवस्था हेतु आर्थिक सहयोग प्रदान किया है। मंच पदाधिकारियों के अनुसार, यह केवल एक कार्यक्रम नहीं बल्कि जनजातीय समाज की चेतना, सहभागिता एवं प्रतिबद्धता का प्रतीक है। समाज के लोग अपनी आस्था, संस्कृति एवं अधिकारों के प्रश्न को लेकर स्वयं आगे आ रहे हैं और इसी कारण इस अभियान को व्यापक जनसमर्थन एवं आत्मीय सहभागिता का स्वरूप प्राप्त हुआ है।

यात्रियों का दल पहले बसों के माध्यम से कांकेर से रायपुर पहुंचेगा तथा वहां से ट्रेन द्वारा दिल्ली के लिए रवाना होगा। यात्रा व्यवस्था को सुव्यवस्थित बनाए रखने हेतु सभी यात्रियों को 11 अलग-अलग गटों में विभाजित कर प्रत्येक गट के लिए प्रभारी नियुक्त किए गए हैं। नियुक्त प्रभारियों में महिलाओं के गट हेतु श्रीमती पूर्णिमा कावड़े एवं पार्वती को जिम्मेदारी दी गई है। वहीं अन्य गटों के लिए राज मेघा, निकेश नागवंशी, अशोक कश्यप, मुन्ना राम सलाम, हेमंत कोरेटी, विजय पटेल, जागेश्वर नरेटी, बिदेसिंह कल्लो, करण कुमार कोरेटी, महेश्वर उसेंडी, गोविंद कोरेटी, कृष्ण मड़ावी, मोहन हुपेंडी , नागसाय तुलावी, अमल नरवास, राजेन्द्र ध्रुव, शिवचरण कुंजाम, जीतराम नेताम, मुकेश राम साहू, देवराम नेताम, विनोद कुमार, रविन्द्र कुमार नेताम, पंकज कुमार नेताम, पंकू नायक, विमल किशोर, उमेश श्याम नागेश एवं उत्तम टाकेश को जिम्मेदारी सौंपी गई है। इन्हें अपने-अपने गटों के समन्वय, अनुशासन, संपर्क एवं यात्रा व्यवस्था की जिम्मेदारी दी गई है।

मंच पदाधिकारियों ने बताया कि बस्तर एवं अन्य जनजातीय क्षेत्रों में पिछले कई दशकों से बड़े स्तर पर धार्मिक परिवर्तन, सामाजिक विघटन एवं पारंपरिक जनजातीय पहचान के कमजोर होने को लेकर समाज के भीतर गंभीर चिंता बनी हुई है। अनेक गांवों में पारंपरिक रीति-रिवाज, देवी-देवताओं की मान्यताएं, सामुदायिक उत्सव एवं सामाजिक संरचनाएं प्रभावित हुई हैं, जिससे सामाजिक तनाव एवं विवाद की स्थितियां भी निर्मित हुई हैं।

मंच के अनुसार, जनजातीय समाज की मूल पहचान उसकी प्रकृति आधारित आस्था, सामुदायिक जीवन, परंपरागत संस्कृति एवं पूर्वजों से जुड़ी जीवन पद्धति रही है। समाज के लोगों का मानना है कि जब बड़ी संख्या में लोग अपनी पारंपरिक मान्यताओं एवं सामाजिक व्यवस्था से अलग होते हैं, तब उसका प्रभाव केवल धार्मिक स्तर तक सीमित नहीं रहता, बल्कि सामाजिक एकता, ग्राम व्यवस्था, पारंपरिक संस्कृति एवं सामुदायिक निर्णय प्रणाली पर भी पड़ता है।

कार्यक्रम में “डी-लिस्टिंग” का विषय भी प्रमुख रूप से उठाया जाएगा। मंच से जुड़े लोगों का कहना है कि अनुसूचित जनजाति वर्ग को संविधान के अंतर्गत जो विशेष संरक्षण एवं आरक्षण व्यवस्था प्रदान की गई है, उसका उद्देश्य जनजातीय समाज की सामाजिक, सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक परिस्थितियों के संरक्षण से जुड़ा हुआ है। इस विषय पर लंबे समय से देशभर में वैचारिक एवं संवैधानिक बहस चल रही है, जिसे लेकर समाज अपनी बात राष्ट्रीय स्तर पर रखना चाहता है।

जनजातीय सुरक्षा मंच के जिला संयोजक श्री देवेंद्र टेकाम ने कहा कि “यह केवल दिल्ली की यात्रा नहीं, बल्कि जनजातीय समाज की अस्मिता, संस्कृति और अधिकारों की आवाज को राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने का अभियान है। बस्तर का समाज अब अपनी परंपराओं और अधिकारों के संरक्षण के लिए संगठित रूप से आगे आ रहा है।”

सह संयोजक श्री ईश्वर सिंह कवाड़े ने कहा कि “जनजातीय समाज अपनी पहचान, परंपरा और संवैधानिक अधिकारों को लेकर जागरूक हुआ है। दिल्ली में आयोजित यह समागम आने वाले समय में जनजातीय समाज की दिशा और संघर्ष का महत्वपूर्ण पड़ाव सिद्ध होगा। कांकेर सहित पूरे बस्तर क्षेत्र से जिस प्रकार लोगों का समर्थन और सहभागिता मिल रही है, वह समाज की एकता और संकल्प को दर्शाता है।”

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