“ कमीशन का खेल, रेत का मेल—अवैध उत्खनन बना सोने की खान!”
ज़िला जांजगीर चांपा ब्लॉक नवागढ़ क्षेत्र में इन दिनों अवैध रेत उत्खनन का ऐसा खेल चल रहा है, मानो कानून नाम की कोई चीज बची ही न हो। नदी-नालों की छाती चीरकर दिन-रात रेत निकाली जा रही है और पूरा सिस्टम “कमीशन के धंधे” पर टिका हुआ है। हर ट्रैक्टर-ट्रॉली से लेकर बड़े डंपर तक—सबका रेट फिक्स है, और बिना सेटिंग के एक कण भी हिलना मुश्किल बताया जा रहा है।
सूत्रों की मानें तो यह सिर्फ अवैध खनन नहीं, बल्कि “कमीशन का संगठित कारोबार” बन चुका है। नीचे से ऊपर तक हिस्सा बंट रहा है, तभी तो शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नदारद है। रात के अंधेरे में मशीनों की गड़गड़ाहट और रेत से भरे वाहनों की कतारें इस बात की गवाही देती हैं कि खेल कितना बड़ा है।
गांव वालों का आरोप है कि कई बार सूचना देने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी आंख मूंदे बैठे हैं। हालात ये हैं कि नदी का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है, जलस्तर गिरता जा रहा है और पर्यावरण का संतुलन बिगड़ता जा रहा है—लेकिन कमीशन की चमक में सब कुछ दबता नजर आ रहा है।
सबसे बड़ा सवाल—क्या अवैध रेत का यह “काला कारोबार” बिना संरक्षण के संभव है? आखिर किसके इशारे पर चल रहा है यह खेल? और कब जागेगा प्रशासन?
अगर अब भी सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में नदियां सूख जाएंगी और जिम्मेदार सिर्फ और सिर्फ वही सिस्टम होगा, जो आज कमीशन की नींद में सोया हुआ है।