,,राष्ट्रीय बागवानी मिशन,, प्रतापपुर की मॉडल नर्सरी बदहाल हाल में। भ्रष्टाचार की भेट चढ़ा।
बिहान छत्तीसगढ़ संवादाता प्रतापपुर सूरज निर्मलकर
जहां सरकार पर्यावरण संरक्षण व हरियाली बनाने के लिए "अंतरराष्ट्रीय बागवानी मिशन" कि जैसे महत्वाकांक्षी योजनाओं पर करोड रुपए खर्च कर रही है। वहीं दूसरी ओर प्रतापपुर के आखिरी छोर पर स्थित मॉडल नर्सरी शासकीय उद्यान इस योजना की जमीनी सच्चाई को उजागर कर रही है। नर्सरी में अमूल्य पौधे नष्ट हो रहे हैं, नर्सरी कभी हरियाली और नवाचार का मॉडल बन करता था, यह नर्सरी अब जंगल का रूप धारण कर लिया है, चारों ओर घास एवं झाड़ियां के कारण नर्सरी में कदम रखना खतरनाक हो गया है लोगों में डर है कि कहानी सांप बिच्छू जैसे जीव ना निकल आए इसमें न केवल नर्सरी का सौंदर्य नष्ट हुआ है बल्कि उसका मूल उद्देश्य आम जनता को गुणवत्ता युक्त पौधे उपलब्ध कारण पूरी तरह दस्त हो गया है।
1.कागजों में बट्टा बीच किसानों तक नहीं पहुंचा।
नर्सरी के उद्यान विभाग द्वारा हल्दी ,अदरक, आलू मिर्च जैसे बीजों का वितरण का रिपोर्ट काजू में पूरी हो गई है लेकिन आम नागरिक तक नहीं पहुंच पाया है तथा किसानों का दावा है कि हर साल आवेदन करते हैं लेकिन उन्हें बीच नहीं मिलते न कोई जानकारी दी जाती है। पूर्व में भी उद्यान अधीक्षक के ऊपर गंभीर आरोप लगे थे।
प्रतापपुर मॉडल नर्सरी के पूर्व अधीक्षक कई बार वित्तीय अनियमितता भेदभाव वितरण और लापरवाही जैसे मामलों में चर्चित रहे हैं लेकिन हर बार कार्रवाई की बजाय फाइलों को ठंडा बस्ती में डाल दिया गया है। नर्सरी परिसर में बनाई गई वर्मी कंपोस्ट इकाई पूरी तरह जर्जर हो गई है। कछु जमीन पर मीट पे जा रहे हैं और पूरा ढांचा अर्थ हो चुका है यह वही इकाई थी। जो किसानों को जैविक खाद्य को आपूर्ति कर सकती थी।
इस गंभीर मामले पर अब तक ना तो कोई जांच हुई और ना ही कोई जवाब दे ही तय की गई है क्षेत्र नागरिकों की मांग है कि दोषी अधिकारियों और कर्मचारी के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।